#MeToo : 'बॉलीवुड के ‘संस्कारी’ अभिनेता ने किया मेरा बलात्कार'

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- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
अमरीका में साल 2017 में #MeToo मूवमेंट की शुरूआत हुई और अब एक साल बाद भारतीय महिलाएं इस मुहिम को आगे ले जा रही हैं.
महिलाएं अपने साथ हुई प्रताड़ना, उत्पीड़न की घटनाओं पर खुलकर बात कर रही हैं. नाना पाटेकर, विकास बहल, उत्सव चक्रवर्ती के बाद इसमें एक नया नाम सामने आया है. पर्दे पर 'संस्कारी' छवि वाले एक अभिनेता पर उनकी टीवी शो 'तारा' की डायरेक्टर और प्रोड्यूसर विंता नंदा ने बलात्कार का आरोप लगाया है.
एक फ़ेसबुक पोस्ट में विंता नंदा ने सीधे तौर पर नाम न लिखते हुए अपने शो तारा में मुख्य किरदार निभा रहे अभिनेता पर यह आरोप लगाया है. उन्होंने ये भी लिखा है कि ये किसी विडंबना से कम नहीं कि जिसने मेरा बलात्कार किया उसकी इंडस्ट्री में 'संस्कारी अभिनेता' की छवि है. आलोक नाथ इस शो में दीपक सेठ की मुख्य भूमिका में थे.
विंता लिखती हैं, ''टीवी के नंबर वन शो 'तारा' की मैं प्रोड्यूसर थी. वो सीरियल की अभिनेत्री के पीछे पड़ा था, लेकिन उसे इस शख्स में कोई दिलचस्पी नहीं थी. वह शराबी था और बेहद बुरा इंसान था, लेकिन टीवी जगत का बड़ा सितारा होने के नाते उसकी ये हरकतें माफ़ थीं. अभिनेत्री ने हमसे शिकायत की तो हमने सोचा कि उसे निकाल देंगे. मुझे याद है उस दिन हमें आखिरी शॉट लेना था. हम उसे निकालने वाले थे और इस शूट के बाद उसे ये जानकारी देते. लेकिन वह शराब पीकर अपना टेक देने आया. जैसे ही कैमरा रोल हुआ उसने अभिनेत्री के साथ बदतमीज़ी की. अभिनेत्री ने उसे थप्पड़ मारा. हमने उसे तुरंत सेट से जाने को कहा और इस तरह वह शो से निकल गया.''
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''अपने साथ हुए हादसे का ज़िक्र करते हुए विंता कहती हैं, 'उसने मुझे अपने घर पार्टी में बुलाया. हम ग्रुप के साथ पार्टी करते थे इसलिए ये कुछ अलग नहीं था. पार्टी में मैने जो पिया उसमें कुछ मिलाया गया था. रात दो बजे मुझे अजीब सा महसूस हुआ और मैं उसके घर से निकल गई. किसी ने मुझे घर तक छोड़ने की बात नहीं कही लिहाजा मैं अकेले थी. मैं पैदल ही घर की तरफ निकल पड़ी. रास्ते में मुझे वो शख्स मिला. वह अपनी कार में था और मुझसे कार में बैठने के लिए कहा. उसने कहा कि वो मुझे घर ड्रॉप कर देगा. मैंने उस पर भरोसा किया और कार में बैठ गई. इसके बाद कुछ भी ठीक-ठीक याद नहीं.''
''मेरी आखिरी याद है कि उसने मेरे मुंह में जर्बदस्ती शराब डाली. जब मुझे होश आया तो मैं बेहद दर्द में थी. मेरा मेरे ही घर में रेप किया गया. ''
''मैंने अपने दोस्तों को बताया तो मुझे इसे भूलकर आगे बढ़ने की सलाह दी गई.''
''लगभग 20 साल बाद मैं बिल्कुल ठीक हूं. मैंने ये कहानी इसलिए साझा की क्योंकि मैं नहीं चाहती किसी लड़की को सच बयां करने से डर लगे.''
ट्विटर, फ़ेसबुक पर शेयर हो रहे #MeToo मूवमेंट के बीच किसी शख्स के कंसेंट यानी सहमति और उसकी जटिलताओं को लेकर एक नई बहस भी छिड़ गई है.

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पिछले हफ़्ते से जोर पकड़ने वाले #MeToo मूवमेंट ने सबसे ज़्यादा भारतीय मीडिया को झटका दिया है. मीडिया इंडस्ट्री की कई महिलाओं ने अपने साथ हुए उत्पीड़न के किस्से साझा किए और इतना ही नहीं कई महिलाओं ने उन शख़्स का नाम भी आगे किया जिन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया.
ये पहलीबार नहीं जब लड़कियों ने नाम लिया
चार अक्तूबर को सबसे पहले कॉमेडियन उत्सव चक्रवर्ती पर ट्विटर पर कई महिलाओं ने उत्पीड़न के आरोप लगाए. 33 वर्षीय उत्सव पर कई महिलाओं ने न्यूड्स मांगने और अपनी नंगी तस्वीरें भेजने का आरोप लगाया.
उत्सव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकर किया. उन्होंने कई ट्वीट करने अपनी बात रखी और सभी महिलाओं से माफ़ी मांगी. इसके बाद #MeToo मूवमेंट ने भारत में ज़ोर पकड़ा. इसके बाद एक के बाद एक कई उत्पीड़न की घटनाएं महिलाओं ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर और फ़ेसबुक पर साझा करनी शुरू की.
अगले तीन दिन के भीतर कई कॉमेडियन, रिपोटर्स, संपादक, लेखक, अभिनेता और फ़िल्मकारों का नाम सामने आया #MeToo के साथ. आरोपों के मुताबिक इन्होंने महिलाओं का उत्पीड़न किया था. इन महिलाओं ने ट्विटर पर लंबी सिरीज़, मैसेज के स्क्रीनशॉट साझा किए.
ये समझना होगा कि ये पहली बार नहीं है जब उत्पीड़न करने वाले के नाम को सार्वजनिक किया जा रहा हो. भारत में साल 2017 में एक लॉ की छात्रा ने एक ''क्राउड सोर्स '' लिस्ट फ़ेसबुक पर साझा की थी जिसमें 50 प्रोफ़ेसरों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था. इस लिस्ट में ज़्यादातर प्रोफ़ेसरों के नाम का जिक्र किया गया था.

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मीडिया जगत का MeToo
ये बात सही है कि देश में महिला पत्रकार ख़ुद के उत्पीड़न को लेकर इतनी मुखर कभी नहीं रहीं जितनी आज हैं. यही कारण है कि मीडिया जगत में इसका असर काफ़ी ज़्यादा देखने को मिल रहा है.
संपादकों और रिपोर्टरों पर लगने वाले इन आरोपों को न्यूज़ चैनल और अख़बारों ने प्रथमिकता दी जिसने मीडिया घरानों को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर किया. एक बड़े अख़बार ने अपने संपादक के खिलाफ़ जांच का आश्वासन दिया है. इस संपादक पर उनके साथ काम कर चुकी सात महिलाओं ने उनपर उत्पीड़न के आरोप लगाए. इसके साथ ही अख़बार ने संपादक को उनके पद से हटाने का फ़ैसला किया है.
पत्रकार संध्या मेनन ने दो संपादकों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया. इसके बाद कई लोगों की आपबीती साझा कि जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से संध्या को अपनी तकलीफ़ बताई.
महिलाओं को सुनने की शुरुआत
महिलाएं जिन आरोपों के साथ सामने आ रही हैं उनमें अभद्र व्यवहार, अश्लील मैसेज या सीधे तौर पर उत्पीड़न की बात की जा रही है. महिलाएं दूसरी महिलाओं से इस विषय को संजीदगी से लेते हुए इस मुहिम को हल्का ना बनाने की बात भी कर रही हैं. भारत में लोग महिलाओं की बात सुन रहे हैं. कई क़दम भी आरोपों पर उठाए जा रहे हैं. इसके साथ ही सहभागिता और ज़िम्मेदारी लेते हुए आगे बढ़कर माफ़ी मांगने की घटनाओं ने महिलाओं को बल दिया है.

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एआईबी ने उत्सव चक्रवर्ती के सभी वीडियो वापस लिए हैं. घटना की जानकारी पहले से होने पर सह-संस्थापक तन्मय भट्ट को पद से हटा दिया गया है. वीडियो स्ट्रीमिंग चैनल हॉटस्टार ने एआईबी के साथ अपना करार तोड़ दिया है.
डायरेक्टर विकास बहल के साथ उनकी अगली फिल्म सुपर-30 में काम कर रहे अभिनेता ऋतिक रोशन ने भी उन पर कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया है.
मीडिया में भी उत्पीड़न के आरोपों से घिरे संपादकों के खिलाफ़ कदम उठाए गए हैं.

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अब तक जब भी महिलाओं ने अपनी बात कही या कहने की हिम्मत जुटाई हमेशा सवाल उनसे ही पूछे गए. मसलन अब तक कहां थीं?, अगर इतनी परेशानी थी तो पुलिस के पास क्यों नहीं गई. इस बार उनसे सवाल के बजाय उनसे माफ़ी मांगी जा रही है. माफ़ी वो लोग मांग रहे हैं जिन्हें इन महिलाओं ने उम्मीद भरी नजरों हिम्मत पाने के लिए देखा, लेकिन इन लोगों ने वक्त रहते कोई क़दम नहीं उठाया.
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तन्मय भट्ट, कुणाल कामरा, गुरसिमरन खंबा, चेतन भगत सहित कई लोगों ने इन उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाओं से माफ़ी मांगी है. जो इन महिलाओं की हिम्मत बनता जा रहा है.
अब आगे क्या?
बीबीसी दिल्ली की पत्रकार गीता पांडे कहती हैं, ''इस तरह के मामलों की बाढ़ ही आ गई है. कितने लोग हैं इसके शिकार ये यकीनन अस्पष्ट है. ''
''कई लोग इसे भारतीय मीडिया का Metoo मूवमेंट बता रहे हैं. लेकिन क्या भारत में शुरू हुआ मी टू इतना प्रबल है जितना हॉलीवुड में ये रहा? हॉलीवुड में कई नाम सामने आए लेकिन अब उनमें से कुछ लोगों पर ही प्रतिबंध लगा. ''

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''मुद्दा ये है कि ये मुहिम कहां तक जाती है. जिन लोगों का नाम सामने आया है उन्हें इसका ख़मियाजा भुगतना पड़ता है या नहीं, ये सवाल है. Metoo मूवमेंट का भारत में शुरुआती वक़्त में कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा था. अब देखना होगा जब इसका प्रभाव पड़ रहा है तो ये कहां तक जाएगा.''
''ये भी देखना होगा कि जो लोग अपनी कहानियों के साथ सामने आए हैं उन्हें भविष्य में इसका नुकसान तो नहीं होगा. कई महिलाएं जो बोल रही हैं उन्हें धमकियां मिली हैं. उन्हें मानहानि के मुकदमे का नाम लेकर डराया जा रहा है. यही वजह है कि अब तक कई महिलाएं खुलकर नाम नहीं ले पा रही हैं.''
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