ग्राउंड रिपोर्टः लाहौल स्पीति की भीषण बर्फबारी में छह दिन फंसे पर्यटकों की आपबीती

हिमाचल में आपदा

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    • Author, अश्विनी शर्मा
    • पदनाम, लाहौल स्पीति से, बीबीसी हिंदी के लिए

लाहौल स्पीति में चार फ़ीट मोटी बर्फ़ की मोटी चादरों के बीच छह दिन बिताने होंगे, इसकी कल्पना उसने कभी नहीं की थी.

गुजरात के वडोदरा की शैली की आंखें उस वक़्त भर आईं, जब वो उन इलाक़ों से निकल कर कुल्लू के धालपुर पहुंचीं. उनके साथ उनका पांच साल का बेटा अंश भी था.

वो काफी थकी दिख रही थीं और चेहरा उदासी में डूबा था. ज़मीन पर आने के तुरंत बाद उन्हें नजदीक के अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया.

डॉक्टरों की जांच के बाद उन्हें अपने परिवार को इस बारे मे सूचना देने को कहा गया कि वो उस इलाक़े से सुरक्षित लौट आई हैं.

यह उनके लिए ज़िंदगी को महसूस करने जैसा वक़्त था.

शैली उन 21 पर्यटकों में शामिल थीं, जिन्हें हेलिकॉप्टर की मदद से वहां से निकाला गया था. हिमाचल प्रदेश में अप्रत्याशित बर्फबारी के कारण लाहौल स्पीति इलाक़ा बर्फ़ की चादरों से ढक गया है.

लाहौल स्पीति

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अचानक हुई बर्फ़बारी में फंसे पर्यटक

उन इलाक़ों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है.

अचानक हुई बर्फ़बारी के चलते शैली को एक छोटे गेस्ट हाउस में अपने 11 साथियों के साथ छह दिन गुजारने पड़े थे. उनके समूह में तीन बच्चे भी शामिल थे.

वो बताती हैं कि 22 सितंबर की शाम क़रीब चार बजे अचानक बर्फ़बारी शुरू हुई और सभी बीच रास्ते में ही फंस गए.

इसके बाद उनलोगों का संपर्क बाकी दुनिया से टूट गया और भगवान से प्रार्थना के अलावा उन्हें कुछ और दिख नहीं रहा था.

पहली बार लाहौल स्पीति घूमने गईं शैली कहती हैं, "गेस्ट हाउस में जगह नहीं थी. वहां 40 पर्यटक पहले से थे. वहां के केयरटेकर राज कुमार से हमलोगों ने अपील की और वो हमलोगों को शरण देने के लिए राजी हो गए."

"अगर हमारे साथ तीन बच्चे नहीं होते तो अनुभव और बुरा हो सकता था. राज कुमार ने एक बेहतर इंसान की तरह बर्ताव किया. उन्होंने खाना बनाने में भी हमलोगों की मदद की. ये छह दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं थे. हमलोग खुशकिस्मत थे कि हम सुरक्षित और ज़िंदा बच गए. मैं भारतीय वायु सेना के पायलटों को सलाम करती हूं, जिन्होंने हमे वहां से निकाला. हमलोगों ने अपने बच्चों को उन्हें दिखाया था और मदद की अपील की थी."

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भगवान ही एक सहारा

दीक्षा भी उसी पर्यटक समूह का हिस्सा थीं, जिसमें शैली शामिल थी.

वो उन पलों को याद करते हुए कहती हैं, "गेस्ट हाउस में टॉयलेट नहीं था. पीने को पानी तक नहीं था. हमलोग बर्फ़ को पिघला कर खाना बनाया करते थे और उसी से अपनी प्यास बुझाते थे. वहां सेनिटरी नैपकिन तक नहीं था. कुछ महिलाओं को इसके बगैर ही अपनी परेशानी झेलनी पड़ी. हमारे साथ पश्चिम बंगाल से एक महिला थी. वो कुछ ज़्यादा पेरशानी में थी."

वो कहती हैं, "हमलोग वहां किसी तरह गुजारा कर रहे थे. बर्फ़ से खेलते हुए बच्चों को देख कर हमलोगों की परेशानी कम हो जाती थी. बच्चों ने बर्फ़ के खिलौने बनाए थे."

इस बुरे वक़्त में शैली को हिम्मत दे रही थी हनुमान की छोटी मूर्ति, जो उनके पास थी. "हमलोग हर सुबह और शाम उनकी पूजा किया करते थे और ज़िंदगी की दुआ मांगते थे."

बर्फ़ वाले इलाक़े में फंसे सैंकड़ों पर्यटकों को निकालने के लिए भारतीय सेना ने पांच हेलीकॉप्टर, एक मिग विमान, दो चीता और दो अन्य विमान तैनात किए गए थे.

लाहौल स्पीति में भारतीयों के साथ-साथ 18 विदेशी पर्यटक भी फंसे थे. बुधवार को 70 पर्यटकों को वहां से निकाला गया था. तीन अन्य बच्चे और एक विदेशी पर्यटक को भी वहां से निकाला गया था.

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बच्चों, महिलाओं और बुज़ुर्ग को प्राथमिकता

देश के लगभग सभी हिस्सों, बिहार, असम, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों से आए इन पर्यटकों की रोमांचक यात्रा एक बुरे सपने में तब्दील हो गई थी.

कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर यूनुस का कहना है कि रोहतांग पास में बड़ी संख्या में पर्यटक फंसे हैं और उन सभी को हेलिकॉप्टर से वहां से निकालना संभव नहीं है.

यही कारण है कि बच्चों, बुज़ुर्गों, बीमार और महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है.

भारी बर्फ़बारी और इलाक़े में बाढ़ के चलते मनाली का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है. यहां घूमने आए पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी दूसरे इलाक़ों से कट गए हैं.

डिप्टी कमिश्नर यूनुस कहते हैं, "जान-माल का कितना नुकसान हुआ है, ये बता पाना अभी मुश्किल है क्योंकि अभी हमलोगों की प्राथमिकता वहां फंसे लोगों को निकालने की है. यही कारण है कि ज़्यादा संख्या में हेलिकॉप्टर बचाव कार्य में लगाए गए हैं."

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रोहतांग टनल रदान

पंजाब के लुधियाना से घूमने आईं अमिता को बारालाचा ला से सुरक्षित निकाला गया. कुल्लू पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल वहां के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

वो अपने परिवार के साथ लेह से मनाली तक घूमने गई थीं. 12 से 14 क़रीबी रिश्तेदारों के साथ वो एक टेम्पो से घूम रही थी. 22 सितंबर को अचानक बर्फ़बारी के बाद वो बीच रास्ते में ही फंस गईं.

अस्पताल की बेड पर पड़ी अमिता याद करती हैं, "हमलोग ज़िंदगी की उम्मीद छोड़ चुके थे. न खाने को कुछ था और न ही मोबाइल नेटवर्क था, जिससे दूसरे से संपर्क साधा जा सके. टेम्पो के अंदर ही हमलोगों को छह रातें गुजारनी पड़ी. सब्र जवाब दे चुका था. हमलोग गाड़ी से निकल कर बाहर बर्फ़ पर पैदल चलने लगे. मुझे सांस लेने की परेशानी थी. अगर सेना नहीं पहुंचती तो मैं आज ज़िंदा नहीं होती."

अमिता के पास उनके पति राजकुमार बैठे थे. वो कहते हैं, "इन्हें दूसरी ज़िंदगी मिली है, पर दो बेटियों और दूसरे बच्चों को वहां से निकाला जाना बाकी है."

लाहौल स्पीति में फंसे पर्यटकों के लिए रोहतांग टनल वरदान साबित हुई. इस निर्माणाधीन टनल को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में मंजूरी मिली थी.

इस टनल के जरिए 300 से ज़्यादा पर्यटकों, आईआईटी रुड़की के 45 छात्रों को सुरक्षित मनाली पहुंचाया गया. यहां पहुंचने के बाद वो सभी वहां लौट गए, जहां से वे आए थे.

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अर्थव्यवस्था पर कितना असर

लाहौल स्पीति और लेह-लद्दाख में सड़कों के निर्माण और देख-रेख करने वाली सरकारी संस्थान सीमा सड़क संगठन के कर्नल एके अवस्थी ने बताया कि 250 से 300 लोगों को सुरंग के रास्ते से निकाला गया है.

"हेलिकॉप्टर की मदद से एक तय संख्या में ही लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकता है, इसलिए हमलोगों ने सुरंग के रास्ते का इस्तेमाल किया."

इस निर्माणाधीन सुरंग का बचा काम 2019 तक पूरा किया जाना है.

लाहौल स्पीति के विधायक और राज्य के कृषि मंत्री डॉक्टर राम लाल मारकंडा कहते हैं यह इलाक़ा सामान्य तौर पर नवंबर से मई तक बंद रहता है, लेकिन 1955 के बाद यह पहली दफ़ा है जब सितंबर में भारी बर्फ़बारी हुई है.

वो कहते हैं, "इलाक़े में सेब की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. किन्नौर के बाद लाहौल स्पीति बेहतर सेब के उत्पादन के लिए जाना जाता है. भारी बर्फ़बारी के कारण सेब की पूरी खेप बर्बाद हो गई है, जिसकी हाल ही में कटाई की गई थी."

ज़िले की अर्थव्यवस्था आलू और सेब की खेती पर टिकी है.

आलू के उत्पादन से सालाना दो लाख रुपये कमाने वाली शांति देवी अब मायूस हैं. बर्फ़बारी के चलते उनकी पूरी फसल खऱाब हो गई है.

वो कहती हैं, "हमलोगों ने हाल ही में आलू की कटाई की थी. लेकिन वो खेतों में ही थे, जो बर्फ़बारी के चलते अब पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं."

राज्य के कृषि मंत्री डॉक्टर राम लाल मारकंडा कहते हैं, "बचाव कार्यों के बाद फसलों से हुए नुकसान का पता लगाया जाएगा और उसकी भरपाई की कोशिश की जाएगी. हमने अपनी याद में ऐसा कभी नहीं देखा था कि हमारे लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा हो. फसल खऱाब हो जाएंगे, पर्यटन पूरी तरह से ठप पड़ जाएगा, इसकी उम्मीद नहीं थी."

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हिमाचल में आपदा

ब्यास नदी में आई बाढ़ अपने साथ कुल्लू के दो नेशनल हाइवे बहा कर ले गई है. इलाक़े के होटलों में फंसे पर्यटकों को वहां से निकाल लिया गया है.

नेशनल हाइवे से संपर्क टूट जाने से होटल व्यवसायी निराश हैं. अगले 19 अक्तूबर से यहां दशहरा पूजा शुरू होना है, जिसे देखने देश-विदेश से लोग आते हैं.

राहत और आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंद का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से कुल्लू और लाहौल स्पीति का जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है. सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है.

वो उम्मीद करती हैं कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी. वो कहती हैं, "हिमाचल आपदाओं से ग्रस्त है. हाल में हुए जलवायु परिवर्तनों से यह ख़तरे और बढ़े हैं. आपदाओं से निपटने के लिए कई स्तर पर काम किए जा रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही सबकुछ सामान्य होगा."

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