प्रेस रिव्यू: मुस्लिम लड़के के साथ होने पर पुलिस ने पीटा

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने एक लड़की को मुस्लिम लड़के के साथ दिखने पर बुरी तरह पीटा और गालियाँ दीं.
मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक महिला कॉन्स्टेबल लड़की को पीटते हुए उसे मुस्लिम पार्टनर चुनने के लिए भला-बुरा कह रही है.
वहीं, वैन चलाने वाले होमगार्ड पर पूरी घटना का वीडियो बनाने का आरोप है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों लड़की से पूछ रहे हैं वो मुसलमान लड़के के साथ क्यों आई है.
इसके बाद गार्ड उससे पूछता है, ''तुम्हें मुल्ला ज़्यादा पसंद आ रहा है? हिंदू लड़कों के रहते हुए?''
इसके बाद महिला कॉन्स्टेबल लड़की के गाल पर बार-बार थप्पड़ मारती है.
वो दोनों लड़की से बार-बार पूछ रहे हैं कि क्या उसे मुस्लिम लड़के को डेट करते हुए शर्म नहीं आती? वैन में दो अन्य पुलिसकर्मी भी सवार थे.
मामला तूल पकड़ने के बाद चारों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है और उनके ख़िलाफ़ विभागीय जाँच शुरू कर दी गई है.

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दलित छात्र के उत्पीड़न के आरोप में प्रोफ़ेसरों पर केस
उत्तर प्रदेश के गोरखुपर में दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के दो प्रोफ़ेसरों पर एससी/एसटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.
यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक दलित छात्र ने दोनों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था. ये ख़बरइंडियन एक्सप्रेस में छपी है.
छात्र ने चार दिन पहले ज़हर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया.
छात्र ने फ़ेसबुक पर एक वीडियो पर पोस्ट करके इसकी शिक़ायत की थी और कहा था कि ये प्रोफ़ेसर उसे रिसर्च नहीं करने दे रहे हैं.
छात्र ने दोनों पर उत्पी़ड़न और जातिवादी शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया था.
छात्र का कहना है कि जब उसने इसकी शिक़ायत विश्वविद्यालय प्रशासन की तो कुछ गुंडों ने उसे जान से मारने की कोशिश की.

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गे पुरुष नहीं कर पाएंगे रक्तदान
टाइम्स ऑफ़ इंडियाकी रिपोर्ट के मुताबिक़ महाराष्ट्र में अब रक्तदान करने वाले पुरुषों को अपने सेक्शुअल ऑरिएंटेशन और सेक्स लाइफ़ के बारे में बताना होगा.
उन्हें ये भी बताना होगा कि कहीं उनके एक से ज़्यादा सेक्शुअल पार्टनर तो नहीं हैं.
अख़बार लिखता है कि मुंबई के ब्लड बैंकों को हाल ही में नेशनल ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न काउंसिल से अपडेटेड गाइडलाइंस मिलीं जिनमें लिखा हुआ है कि गे और बाइसेक्शुअल पुरुष, सेक्स वर्कर महिलाएँ और ट्रांसजेंडर रक्तदान नहीं कर सकते.
इन्हें रक्तदान से रोकने के पीछे वजह ये बताई गई है कि इनमें एचाईएवी और हेपेटाइटिस का ख़तरा ज़्यादा होता है.

रेवाड़ी गैंगरेप: अभियुक्तों ने पहले भी किया था अपराध
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ हरियाणा के रेवाड़ी में 19 साल की छात्रा के साथ गैंगरेप करने वाले एक या इससे अभियुक्तों ने इससे पहले भी उसी क्राइम सीन पर दूसरी महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया था.
वो हर बार इसलिए बच जाते थे, क्योंकि बाकी पीड़िताएं या उनके परिजन अपराध के ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठा पाए.
इस बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि अभियुक्तों ने उसी जगह पर पहले भी चार महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया था.
पुलिस का दावा है कि उन्हें ये जानकारी पाँच संदिग्धों से पूछताछ के दौरान मिली है.

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सांसद और विधायक कर सकते हैं वकालत
जनसत्ता अख़बार में ख़बर है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सांसद और विधायक भी वकालत कर सकते हैं.
कोर्ट ने उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है, जिनमें पेशे से वक़ील सांसदों और विधायकों के वकालत करने पर रोक लगाने की माँग की गई थी.
ये जनहित याचिका बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी.
फ़ैसला सुनाने वाली तीन जजों (चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खनविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़) की बेंच ने कहा कि जन प्रतिनिधियों को वकालत करने से नहीं रोका जा सकता क्योंकि बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया उन्हें ऐसा करने से नहीं रोकता.

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