मिलिए सांसद के पैर धोकर पीने वाले भीषण भक्त से

कन्हवारा गांव के पवन साह

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC

    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, कन्हवारा (गोड्डा) से, बीबीसी हिंदी के लिए

पवन साह के पास स्मार्टफ़ोन नहीं है. वह फ़ेसबुक पर भी नहीं हैं. फिर भी उन्हें पता है कि सांसद निशिकांत दुबे के पैर धोकर पानी पीने की उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं.

इस कारण वह मीडिया की सुर्ख़ियों में हैं. वे तस्वीरें उनके गांव के लोगों के स्मार्टफोन से घूमते हुए उनके घर के लोगों तक भी पहुंची हैं.

वह इसे 'भक्त' और 'भगवान' के बीच का मसला बताते हुए कहते हैं कि इसका उन्हें कोई मलाल नहीं है. उनके लिए वह पानी नहीं 'चरणामृत' है.

पवन साह अपने इस कृत्य को चाटुकारिता नहीं मानते. वे कहते हैं कि यह तो हमारी संस्कृति है. हम बड़े लोगों का आदर करते हैं और घर आए लोगों के पांव पखारने की परंपरा रही है.

"ऐसा तो केवट ने भगवान श्रीराम के लिए भी किया था. इस तरह के कई और उदाहरण भी हैं."

पवन साह ने बीबीसी से कहा, "देखिए, वह जो लाइट देख रहे हैं न, वह गोड्डा है और यह मेरा गांव. कितना नज़दीक है, लेकिन बीच में बहने वाली कझिया नदी के कारण हम लोग 6-7 किलोमीटर घूमकर गोड्डा जाते हैं."

"इसमें समय बर्बाद होता है. दिक्कत होती है, सो अलग. हम लोगों ने अपने सांसद से पंचायत भवन के सामने से गोड्डा के गुलज़ारबाग तक पुल बनवाने की मांग की थी. तभी मैंने प्रण किया था कि यह मांग पूरी होने के बाद मैं उनके पैर धोकर सार्वजनिक तौर पर पिऊंगा."

"उन्होंने हमारी मांग पूरी कर दी. वह (सांसद डॉक्टर निशिकांत दुबे) इसका शिलान्यास करने रविवार को मेरे गांव आए थे."

"यह उचित अवसर था, जब मैं अपनी भक्ति का प्रदर्शन कर सकता था. इसलिए मैंने भगवान मानकर उनका चरणामृत पी लिया. इस पर मुझे गर्व है."

कन्हवारा गांव के पवन साह

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC

इमेज कैप्शन, कन्हवारा गांव के पवन साह

क्या है मामला?

कन्हवारा, झारखंड के गोड्डा ज़िले का एक बड़ा गांव है. रविवार को स्थानीय भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस गांव से गोड्डा को जोड़ने के लिए कझिया नदी पर प्रस्तावित पुल का शिलान्यास किया.

इस मौके पर सैकड़ों लोगों के सामने भाजपा से जुड़े पवन साह ने पीतल की थाली में उनके पांव धोए और फिर उस पानी को पी लिया.

सांसद महोदय ने यह तस्वीर अपने फ़ेसबुक पर पोस्ट की और पूरी घटना का विवरण भी लिखा. इसके तुरंत बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया.

बात बढ़ती देख सांसद निशिकांत दुबे उस कार्यकर्ता के साथ सोमवार को गोड्डा में मीडिया से रूबरू हुए और बताया कि उन्होंने पवन को पैर की धोवन पीने से मना किया था.

लाइन
लाइन
कन्हवारा गांव के पवन साह, निशिकांत दुबे के साथ

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC

इमेज कैप्शन, कन्हवारा गांव के पवन साह (दाएं), निशिकांत दुबे के साथ

ख़ुदकुशी की धमकी?

सांसद निशिकांत दुबे ने बीबीसी से कहा, "मैंने उसे (पवन को) पांव पखारने और उस पानी को पीने से मना किया, लेकिन उसकी ज़िद के सामने झुक गया."

"उसने अपने हाथों में चाकू ले रखा था. उसने कहा कि अगर मैं उसे रोकूंगा तो वह आत्महत्या कर लेगा. इस कारण मैंने उसे वह पानी पीने दिया."

"सार्वजनिक जीवन में हम लोग कई दफ़ा कार्यकर्ताओं की ज़िद के आगे झुकते हैं. ऐसा हर नेता के साथ होता है. इसमें कोई नई बात नहीं है. मैंने उनका सम्मान रखने के लिए उन्हें ऐसा करने दिया."

पवन साह सांसद निशिकांत दुबे के पांव धोते हुए

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC

इमेज कैप्शन, पवन साह सांसद निशिकांत दुबे के पांव धोते हुए

ऐसी हरकतें करते रहे हैं पव

पवन साह के लिए यह कोई पहला मामला नहीं है, जब उन्होंने ऐसी हरकत की हो.

उन्होंने बताया कि अगर सांसद ने उन्हें पांव धोने के बाद उस पानी को पीने से मना किया होता तो वह ख़ुदकुशी कर लेते.

बकौल पवन, एक बार उनके दोस्त ने उनसे कहा कि क्या वह उसके लिए खाई में कूद जाएंगे. यह सुनते ही वह अपनी दोस्ती प्रमाणित करने के लिए खाई मे कूद गए. तब दोस्तों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया. उनके पांव पर वह निशान आज भी मौजूद है.

पवन साह ने बताया कि साल 2014 में भाजपा की जीत के बाद उन्होंने अपनी उंगली काटकर उसके ख़ून से तिलक लगाया था.

उंगली पर कटे का निशान दिखाते हुए वह कहते हैं कि वह अपनी बात प्रमाणित करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं.

लाइन
लाइन
मुखिया परमानंद साह

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC

इमेज कैप्शन, गांव के मुखिया परमानंद साह

'जुनूनी हैं पवन'

पवन साह की मानसिक स्थिति के बारे में कन्हवारा के मुखिया परमानंद साह ने बीबीसी को बताया, "पवन पागल नहीं हैं, जुनूनी हैं."

"हम लोगों ने पुल की मांग की थी. उसे सांसद ने पूरा कर दिया, इसलिए पवन ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ऐसा किया. गांव के लोग उनकी इज़्ज़त करते हैं."

पवन अपने घर में सबसे बड़े हैं. दसवीं तक की पढ़ाई करने के बाद घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के कारण उन्होंने किसानी शुरू कर दी और अब यही उनका पेशा है.

इसके साथ वह भाजपा से जुड़कर राजनीति भी करते हैं. उन्होंने पिछले साल मुखिया का चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें गिनती के वोट मिले थे.

लाइन

ये भी पढ़ें:

लाइन

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)