जब कुलसुम की मौत पर एकजुट हुई भारत-पाक की सेना

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- Author, मानसी दाश, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
- पदनाम, मिर्ज़ा औरंगजेब जर्राल, मुज़फ्फराबाद, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से
जम्मू-कश्मीर में अब भी ऐसे कई परिवार हैं जो भारत और पाकिस्तान के बीच बंटे हुए हैं और उनके लिए अपने परिवार के लोगों से मिलना दूसरे देश जाने जैसा होता है.
भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में फ़िलहाल तनाव है और लगता है कि सीमा पर भी तनाव ही होगा. लेकिन तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है.
70 साल की कुलसुम बीबी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में अपने परिवार के साथ रहती थीं. 25 जून को वो भारत प्रशासित कश्मीर के पुंछ इलाके के मेंढर में रहने वाले अपने भाई के परिवार में एक शादी में शामिल होने आईं थीं.
30 जून की सुबह दिल का दौरा पड़ने से कुलसुम बीबी की मौत हो गई. अब उनके भाई के परिवार के सामने ये सवाल था कि उनके शव को पाकिस्तान में उनके परिवार के पास कैसे पहुंचाया जाए.
इसके बाद मानवीय आधार पर भारतीय सेना और स्थानीय पुलिस ने एक ही दिन में पूरी कागज़ी कार्यवाही निपटाते हुए रविवार को शव पाकिस्तान में उनके परिवार के सुपुर्द कर एक नई मिसाल पेश की.

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प्रशासन ने मदद की तो जल्दी शव मिला
आमतौर पर इस तरह के मामलों में कागज़ी कार्यवाही पूरी करने में ही दो दिन या फिर उससे अधिक का वक्त लग जाता है.
कुलसुम बीबी के भाई मोहम्मद सादिक हुसैन ख़ान जो भारत प्रशासित कश्मीर में रहते हैं, उन्होंने बताया, "यहां जो डीजी साहब थे वो हमारे गांव के हैं तो हमने उनको अपनी बहन की मौत की जानकारी दी, उन्होंने कहा कि वो सुरक्षा बलों यानी आर्मी और स्थानीय प्रशासन को इसके बारे में ख़बर कर देंगे. उन्होंने काफी मदद की जिसकी वजह से हमें कोई मुश्किल नहीं आई."
वहीं पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाले कुलसुम बीबी के पति और परिजनों को इस बात की तसल्ली है कि उन्हें शव के लिए कई दिनों तक इंतज़ार नहीं करना पड़ा.
कुलसुम बीबी के बेटे बासित ने बताया, "दोनों तरफ से अच्छी प्रतिक्रिया थी. ये हमारी खुशकिस्मती थी कि वहां के अफ़सरान (अफ़सर) और प्रशासन के बहुत अच्छा इंतज़ाम किया. इधर से भी हमें काफी मदद मिली."

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हालांकि इस दौरान कुलसुम बीबी के बेटे बासित ने एक मुश्किल की तरफ भी ध्यान दिलाया.
उन्होंने कहा, "मुझे सीधे भारत प्रशासित कश्मीर से फ़ोन नहीं आया. पहले फ़ोन सऊदी अरब गय़ा और वहां से मुझे फ़ोन आया फिर मैंने उस तरफ सीधे कॉल किया तो पूरी घटना का पता चला. हमारी तरफ से तो भारत में फ़ोन लगता है लेकिन उधर से ये सहूलित नहीं है."
बासित कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ के अधिकारियों ने मिलकर काम किया और उन्हें इस मामले में ज़्यादा परेशान होने से बचा लिया.
दोनों पक्षों ने गंभीरता से लिया मामला
इधर भारत प्रशासित कश्मीर के पुंछ सेक्टर के स्थानीय पुलिस अधिकारी रियाज़ तांत्रे कहते हैं कि ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन की भूमिका अहम होती है. वो बताते हैं, "हमने कुल मिलाकर 10-11 घंटे में ही पूरा मामला निपटा दिया. मैंने उम्मीद नहीं की थी कि ये मामला इतनी जल्द हल किया जाएगा."

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"स्थानीय प्रशासन और सुरक्षाबल तुरंत हरकत में आए और उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और अपने मुख्य़ालय से संपर्क किया. साथ ही उन्होंने दूसरी तरफ से भी संपर्क किया. पाकिस्तान की तरफ भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया और शाम तक हमें ख़बर मिल गई. इसके बाद रविवार को शव उनके परिवार को सौंप दिया गया."
वो कहते हैं कि उनके लिए समस्या थी कि शव को शवगृह में रखना होता और शायद कुछ वक़्त लगता लेकिन खुशी की बात है कि मामला जल्द निपट गया.
पाकिस्तान में बीबीसी के सहयोगी मिर्ज़ा औरंगजेब जर्राल ने इस घटना में पाकिस्तान की तरफ से प्रशासन और सेना की प्रतिक्रिया के बारे में बताया "मेरी बात यहां अंसार याकूब, डिस्ट्रिक्ट कमीशनर रावलाकोट से हुई है और उनका कहना है कि पाकिस्तान की सीमा पर मौजूद सेना से उन्होंने संपर्क किया था जिन्होंने भारतीय सेना से संपर्क साधा था."
"इसके बाद भारतीय सेना की मौजूदगी में भारतीय प्रशासन ने कुलसुम बीबी का शव पाकिस्तान प्रशासन को सौंप दिया. इस तरह के मामलों में कम से कम दो दिन तक इंतज़ार करना होता है लेकिन इस मामले में अच्छा हुआ और जल्द मामला निपटा लिया गया."

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इस पूरे घटनाक्रम में जो बात सामने आई वो ये कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों के हालात जो भी हों, सीमा के दोनों तरफ रहने वाले लोग अपनी ज़िंदगी में अमन चाहते हैं.
कुलसुम बीबी के भाई मोहम्मद सादिक हुसैन ख़ान कहते हैं, "दोनों देशों के लोग अमन चाहते हैं. दोनों देशों के बीत बातचीत होनी चाहिए और शांति बहाल होनी चाहिए. इसी से दोनों मुल्कों में भी शांति होगी."
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