नज़रिया: ज्वॉइंट सेक्रेटरी का चयन UPSC से ही हो

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- Author, योगेंद्र नारायण
- पदनाम, रिटायर्ड आइएएस
केंद्र सरकार ने सोमवार को एक अख़बार में विज्ञप्ति जारी करके कई मंत्रालयों में ज्वॉइंट सेक्रेटरी पदों के लिए आम लोगों से आवेदन भेजने की बात कही है.
सरकार का यह कदम बहुत अच्छा है क्योंकि इससे सरकारी दायरे के बाहर मौजूद प्रतिभा को सरकार के काम करने के तौर-तरीकों को समझने का मौका मिलेगा.
इसके साथ ही उन्हें अपने अनुभव के क्षेत्र में काम करने का मौका भी मिलेगा. सरकारी तंत्र में ज्वॉइंट सेक्रेटरी के स्तर पर फ़ैसले लिए जाते हैं.
अब तक जो भी फ़ैसले लिए जाते थे, वे बंद कमरों में फ़ील्ड में काम कर रहे सरकारी अधिकारियों द्वारा दिए गए इनपुट के आधार पर होते थे.
अब ये जो दस विभाग चुने गए हैं जिनमें कृषि, वित्तीय सेवाएं, शिपिंग, वाणिज्य शामिल हैं. इन विभागों में जब विशेषज्ञता रखने वाले लोग आएंगे जिन्हें संबंधित क्षेत्रों की समस्याओं का पूरा ज्ञान होगा तो वे रणनीतिक फ़ैसले ले पाएंगे और उन्हें ये भी महसूस होगा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए वो जो सोचते हैं, उसे कार्यान्वित कर पाएंगे.
बाहर से प्रतिभा तलाश करने की ज़रूरत
देश के नौकरशाहों को इस कदम का स्वागत करना चाहिए.
हमारा उद्देश्य ये है कि भारत को विकास के रास्ते पर ले जाया जाए, उसे गति दी जाए. इस कोशिश में अगर हमें ऐसे लोग मिल सकते हैं जो इस उद्देश्य को पूरा कर सकते हैं तो ये राष्ट्र के हित में है.

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ऐसे में जो भी राष्ट्र हित में है वो सिविल सेवा के हित में भी होगा.
अगर कोई ये सोचता है कि जो आईएएस के रूप में चुनकर आए हैं, बस उन्हें ही ऐसे पदों पर रखा जाए तो ये मेरी राय में ठीक नहीं है. ऐसा बंद माहौल नहीं होना चाहिए.
प्रतिस्पर्धा से आता है सुधार
इस कदम का एक प्रभाव ये भी होगा कि जब दूसरे लोग बाहर से आएंगे तो एक प्रतिस्पर्धा भी पैदा होगी.
ऐसे में हमारे लोकसेवक जो ज्वॉइंट सेक्रेटरी के रूप में काम कर रहे हैं, वो भी ये सोचेंगे कि हमें भी विशेषज्ञता हासिल करनी चाहिए और अपने कार्यक्षेत्र में आगे की पढ़ाई करनी चाहिए.
इस तरह अंदर वालों और बाहर से आए लोगों के बीच एक तरह की प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिलेगी और इससे हमेशा सुधार ही होता है.
लोकसेवकों के बीच खिंचाव की आशंका
अगर इस कदम की वजह से लोकसेवकों के बीच खिंचाव पैदा होता है तो उसका सामना करना पड़ेगा. क्योंकि हमें सिविल सेवा हित में नहीं देश हित में सोचना चाहिए और हमें अपने पास सबसे बेहतरीन प्रतिभा रखनी चाहिए.

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जब लोग आईएएस में भी चयनित होते हैं तो यूपीएससी विज्ञापन जारी करता है, परीक्षा लेता है और सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को मौका देता है. इसी तरह अगर हम बाहरी प्रतिभा का फ़ायदा उठा सकें, तो बेहतर होगा.
यूपीएससी के द्वारा हो चयन
हालांकि मैं ये चाहूंगा कि संवैधानिक संस्था यूपीएससी के पास इस प्रक्रिया में अंतिम रूप से चयन करने का अधिकार हो.
क्योंकि अगर सरकार लोगों का चुनाव करेगी तो इससे उनकी आलोचना होगी कि वो अपने लोगों को भरना चाहती है.
ऐसे में लैटरल एंट्री की सुविधा रखी जानी चाहिए लेकिन चयन यूपीएससी के जरिए करना चाहिए.
इससे पहले ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें सरकार ने बाहर से लोगों को सरकार में शामिल किया है.
ऐसे उदाहरणों में मोंटेक सिंह अहलूवालिया और नंदन नीलकेणी हैं जिन्होंने अच्छा काम किया है.
ये एक सराहनीय कदम है जिसमें इन लोगों को तीन या पांच साल के लिए लिया जाना चाहिए.
अगर ये लोग अच्छा काम करते हैं तो दूसरे मंत्रालयों में भी इस तरह लोगों को लाया जाना चाहिए.

(बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल के साथ बातचीत पर आधारित)
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