गुजरातः घोड़ी पर चढ़ने के 'जुर्म' में दलित की हत्या

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- Author, भार्गव परीख
- पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए
गुजरात में एक दलित युवा की हत्या इसलिए कर दी गई है क्योंकि वो घोड़ी चढ़ता था.
भावनगर ज़िला के टींबा गांव के प्रदीप राठौर घोड़ी पर बैठकर घर से बाहर गए थे. वो 21 साल के थे.
घटना गुरुवार देर शाम की है. घर से बाहर जाने से पहले उन्हें अपने पिता को रात में साथ खाने को कहा था. देर शाम जब प्रदीप घर नहीं लौटे तो उनके पिता उन्हें ढूंढ़ते हुए गांव से बाहर गए.
गांव से कुछ दूर पर उन्हें अपने बेटे की लाश मिली. घोड़ी वहीं बंधी मिली. मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.

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प्रदीप का शव भावनगर के सर टी. अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाया गया, जहां उनके परिजनों ने शव को वापस ले जाने से इंकार कर दिया.
परिवार के घरवालों का कहना है कि जब तक सभी आरोपी गिरफ़्तार नहीं कर लिए जाते, वो अपने बेटे के शव को वापस नहीं ले जाएंगे.
उस शाम क्या हुआ था?
प्रदीप के पिता कालूभाई ने बीबीसी गुजराती को बताया कि प्रदीप ने दो महीने पहले घोड़ी ख़रीदी थी.
उन्होंने कहा, "बाहर के गांव वाले उन्हें घोड़ी चढ़ने से मना करते थे. वो उन्हें धमकाते भी थे."
"वो मुझसे कहता था कि वो घोड़ी बेच देगा पर मैंने मना कर दिया था. कल शाम वो घोड़ी चढ़कर खेत गया था. जाने से पहले उसने कहा था कि वो रात का खाना मेरे साथ खाएगा."
कालूभाई आगे बताते हैं कि जब वो नहीं लौटा था वे उसे ढूंढ़ने गए. टींबा गांव के कुछ दूरी पर प्रदीप की लाश मिली."

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टींबा गांव की आबादी क़रीब 300 है. पुलिस शिकायत में कालूभाई ने कहा है कि पीपराला गांव के लोग ने उन्हें आठ दिन पहले घोड़ी न चढ़ने की बात कही थी. वो उनका नाम नहीं जानते पर उस व्यक्ति ने घोड़ी को बेचने को कहा था. ऐसा नहीं करने पर हत्या की धमकी भी दी थी.
उमराया के पुलिस इंस्पेक्टर केजे तलपड़ा ने कहा है, "हमलोगों ने शिकायत दर्ज कर ली है और जांच की जा रही है. तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है. मामले की बेहतर जांच के लिए भावनगर क्राइम ब्रांच की मदद ली जाएगी."
गुजरात सरकार ने मामले में प्रतिक्रिया दी है. राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री ईश्वरभाई परमार ने कहा, "हमने भावनगर के एसपी और डीएम को घटना स्थल जाने को कहा है और मामले में रिपोर्ट की मांग की है. आरोपियों की गिरफ़्तारी जल्द की जाएगी."
दलित नेता अशोक गिल्लाधर का कहना है कि क्षेत्र में दलितों के प्रति अत्याचार बढ़े हैं. पहले भी दलितों की हत्या की गई है.
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