'जल्लीकट्टू पर फैसला वापस हुआ, पद्मावत पर क्यों नहीं'

सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने फ़िल्म पद्मावत मामले में राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका ख़ारिज कर दी है. दोनों राज्यों ने फ़िल्म पद्मावत पर रोक हटाने के आदेश में संशोधन की मांग की थी.

कोर्ट ने कहा है कि हिंसक तत्वों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है. राज्य सरकारों को कानून व्यवस्था संभालनी होगी. इस आदेश के बाद अब सभी राज्यों में फ़िल्म का प्रदर्शन हो सकेगा.

फ़िल्म पद्मावत अब अपनी तय तारीख 25 जनवरी को देश और विदेशों में हिंदी सहित तमिल और तेलुगू में रिलीज़ होगी.

संजय लीला भंसाली निर्देशित इस फिल्म का विरोध कर रहे करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कालवी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई है.

पद्मावत

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इमेज कैप्शन, लोकेंद्र सिंह कालवी

महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर पहुंचे लोकेंद्र सिंह कालवी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "बापू हमें ताकत दें. उन्होंने अंग्रेजों की सत्ता का विरोध किया था. मैं वर्तमान सरकार की तुलना अंग्रेजों के शासन से नहीं कर रहा हूं. मैं ये बातें गांधी जी के परिप्रेक्ष्य में कह रहा हूं कि उन्होंने उस राज्य को भी उखाड़ फेंका था जहां सूर्यास्त नहीं होता था."

वो आगे कहते हैं, "ये हमारी सरकार है. हमारी बात कैसे नहीं सुनेगी? जनता के दबाव में सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर अपना फ़ैसला वापस लिया था, पद्मावत पर क्यों नहीं?"

लोकेंद्र सिंह कालवी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी फ़िल्म के प्रदर्शन के ख़िलाफ़ हैं. उनका कहना है कि जनता फ़िल्म का प्रदर्शन नहीं चाहती है.

उन्होंने दावा किया कि राजस्थान और गुजरात में मल्टीप्लेक्स के मालिक उनके समर्थन में हैं और उन्होंने वादा किया है कि वे इस फ़िल्म का प्रदर्शन अपने सिनेमाघरों में नहीं करेंगे.

पद्मावत

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इमेज कैप्शन, फ़िल्म के विरोध में गुजरात में बसों को आग के हवाले कर दिया गया

कई शहरों में हिंसा

फ़िल्म पद्मावत का विरोध अब हिंसात्मक रूप धारण करने लगा है. सोमवार को गुरुग्राम के एक सिनेमा हॉल में करणी सेना ने जमकर तोड़फोड़ की.

वहीं, रविवार को नोएडा में डीएनडी टॉल प्लाजा पर विरोध जताते हुए तोड़फोड़ की. इस दौरान कुछ लोगों की पिटाई भी की गई. मामले में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि 200 लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज किया गया है.

गुजरात के मेहसाणा में भी फ़िल्म के विरोध में बसों में आग लगा दी गई थी. उधर, राजस्थान के भीलवाड़ा में सोमवार को एक युवक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर पेट्रोल की बोतल लेकर चढ़ गया था और फ़िल्म के बैन होने तक नहीं उतरने की बात कह रहा था. वो आत्मदाह की भी धमकी दे रहा था.

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विरोध क्यों?

फिल्म का विरोध पिछले साल जनवरी के महीने में शुरू हुआ था. करणी सेना के सदस्यों ने फिल्म की शूटिंग के दौरान राजस्थान में तोड़फोड़ की थी. घटना के दौरान संजय लीला भंसाली हिंसा के शिकार होना पड़ा था.

तब से विरोध का दौर जारी है. बीते साल हुए राज्य चुनावों के कारण इसकी रिलीज की तिथियां बदली गई. विरोध इतना बड़ गया कि फिल्म का नाम पद्मावती से पद्मावत किया गया.

पहले मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा की सरकार ने फिल्म पद्मावत के प्रदर्शन पर बैन लगाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बीते गुरुवार को हटा दिया था.

पद्मावत का सारा विवाद रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के प्रसंगों को लेकर है.

राजस्थान के करणी सेना सहित कुछ और संगठनों का आरोप है कि भंसाली खिलजी के साथ रानी पद्मावती के प्रेम संबंधों पर फिल्म बनाकर राजपूतों की भावना को चोट पहुंचा रहे हैं.

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