गुजरात में रिलीज़ हो पाएगी भंसाली की 'पद्मावत'?

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    • Author, रॉक्सी गागेदकर छारा
    • पदनाम, बीबीसी गुजराती संवाददाता, अहमदाबाद

संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'पद्मावत' को लेकर गुजरात में तनाव बढ़ता हुआ दिख रहा है.

पिछले दो दिनों से राज्य भर में 'पद्मावत' के मुद्दे पर हिंसा की घटनाएं हुई हैं.

सिनेमाघरों को नुक़सान पहुंचाया गया है, सड़कें जाम की गई हैं और इस विवादास्पद फ़िल्म की रिलीज़ के विरोध में सड़कों पर जुलूस निकाले गए हैं.

पद्मावत का विरोध

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अहमदाबाद शहर के निकोल इलाके में राजहंस सिनेमाहॉल में शनिवार को 'पद्मावत' का ट्रेलर दिखाया गया था.

इसके बाद बलवाइयों ने सिनेमाहॉल के बुकिंग ऑफ़िस को तहस-नहस कर दिया. निकोल की पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

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पुलिस सुरक्षा

निकोल थाने के पुलिस इंस्पेक्टर एनएन परघी ने बीबीसी की गुजराती सेवा को बताया, "अभी तक हमें नहीं मालूम है कि ये गुट करणी सेना के लोगों का था. हमने सिनेमाहॉल को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया करा दी है."

दूसरी तरफ़ गुजरात के पुलिस महानिदेशक प्रमोद कुमार का कहना है कि राज्य में अमन कायम रखने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए गए हैं.

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उन्होंने कहा, "हमने सभी ज़िलों के पुलिस सुपरिंटेंडेंट्स से बलवाइयों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है."

फ़िल्म रिलीज़ किए जाने के सवाल पर प्रमोद कुमार का कहना था, "ये सिनेमाहॉल वालों पर निर्भर करता है कि वो फ़िल्म रिलीज़ करना चाहते हैं या नहीं. अगर वे चाहते हैं तो हम उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराएंगे."

'पद्मावत' की रिलीज़ के मुद्देनज़र राज्य भर में 14 हज़ार अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

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सेंसर बोर्ड

इस बीच गुजरात सरकार राज्य में 'पद्मावत' की रिलीज़ को रोकने के लिए क़ानूनी रास्ते तलाश रही है.

गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा ने बीबीसी गुजराती सेवा को बताया, "फ़िल्म पर प्रतिबंध हटाने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फ़ैसले के ख़िलाफ़ हम क़ानून के जानकार लोगों से मशविरा कर रहे हैं."

सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद भी भाजपा शासित गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश ने अपने यहां 'पद्मावत' की रिलीज़ पर रोक लगा दी थी.

गृहमंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का आदर करते हैं, लेकिन हमें लगता है कि फ़िल्म की रिलीज़ से राज्य में क़ानून और व्यवस्था बिगड़ेगी. इसलिए हम क़ानूनी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. इस सिलसिले में हमने क़ानून के जानकारों से सलाह मांगी है."

सरकार ने भले ही सिनेमाघरों को अतिरिक्त पुलिस बलों की सुरक्षा मुहैया करा दी है, लेकिन राज्य से मल्टीप्लेक्स मालिकों ने 25 जनवरी को 'पद्मावत' रिलीज़ करने से अब इनक़ार कर दिया है.

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मल्टीप्लेक्स मालिक

राज्य के मल्टीप्लेक्स मालिकों के एसोसिएशन के अध्यक्ष मनुभाई पटेल कहते हैं कि वे अपने सिनेमाघरों में 'पद्मावत' रिलीज़ नहीं करेंगे.

मनुभाई पटेल अहमदाबाद शहर के धनाढ्य माने जाने वाले एसजी हाइवे इलाके में स्थित वाइड एंगल मल्टीप्लेक्स के मालिक हैं.

हालांकि उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में उनके एसोसिएशन ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया है, लेकिन गुजरात के मल्टीप्लेक्स मालिकों के बीच चर्चा के बाद ये तय हुआ है कि 'पद्मावत' गुजरात में रिलीज़ नहीं की जाएगी.

मनुभाई पटेल कहते हैं, "पुलिस की सुरक्षा सिनेमाहॉल के बाहर है. अगर वे लोग सिनेमाहॉल के भीतर दाखिल हो जाते हैं और थिएटर की प्रॉपर्टी को नुक़सान पहुंचाते हैं तो क्या होगा. इस स्थिति से निपट पाने का हमें भरोसा नहीं है."

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'पद्मावत' की रिलीज़

25 जनवरी को 'पद्मावत' देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ की जानी है. कथित राजपूत रानी पद्मावती के जीवन पर आधारित इस फ़िल्म को लेकर विवाद चल रहा है.

शनिवार से बलवाइयों ने गुजरात राज्य परिवहन सेवा की कम से कम आठ बसों को आग के हवाले कर दिया है. राज्य के कुछ राजमार्ग फ़िल्म के विरोध के नाम पर ब्लॉक किए गए हैं.

राजपूत करणी सेना ने और अधिक विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी दी है. राज्य के पुलिस थानों में इस सिलसिले में अभी तक कम से कम 15 मामले दर्ज किए गए हैं.

राजपूत करणी सेना के गुजरात सलाहकार मानवेंद्र सिंह गोहिल ने बीबीसी से कहा, "हमारे लोगों ने अहमदाबाद-वडोदरा हाइवे और अहमदाबाद-राजकोट हाइवे जाम कर दिया था. जब तक राज्य सरकार फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक नहीं लगाती हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे."

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सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी विरोध क्यों?

मानवेंद्र सिंह गोहिल चेतावनी देने के लहजे में कहते हैं कि अगर राज्य के सिनेमाघर 'पद्मावत' रिलीज़ करते हैं तो उन्हें नाराज़ भीड़ के नतीजों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

लेकिन मानवेंद्र सिंह गोहिल सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी अपना विरोध क्यों जारी रखे हुए हैं?

इस सवाल के जवाब में उनका कहना है, "हम इस फ़ैसले से खुश नहीं है. हम राज्य में इस फ़िल्म की रिलीज़ पर पूरी तरह से प्रतिबंध चाहते हैं."

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