त्रिपुरा: क्या 'राजनीतिक संघर्ष' का निशाना बने पत्रकार शांतनु भौमिक

पत्रकार शांतनु भौमिक
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    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए, अगरतला से

त्रिपुरा में एक लोकल न्यूज चैनल 'दिन-रात' के लिए काम करने वाले पत्रकार शांतनु भौमिक की कथित तौर पर पीट पीट कर हत्या कर दी गई.

यह घटना बुधवार दोपहर की है. 28 साल के शांतनु पश्चिम त्रिपुरा के मानदाई में इंडिजनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफ़टी) और त्रिपुरा राजेर उपजाति गणमुक्ति परिषद (टीआरयूजीपी) के बीच हुए एक संघर्ष की घटना को कवर करने गए थे.

त्रिपुरा पुलिस महानिदेशक एके शुक्ला ने बीबीसी से कहा, "इस घटना से जुड़े दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. हालांकि अभी यह नहीं कह सकते कि दोनों लोग आईपीएफ़टी के कार्यकर्ता हैं."

शांतनु भौमिक का पार्थिव शरीर
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पुलिस की भूमिका पर सवाल

पुलिस महानिदेशक के अनुसार, जिस इलाके में यह घटना हुई है वहां स्थिति नियंत्रण में है. इस घटना के बाद राजधानी अगरतला और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवा को 24 घंटों के लिए बंद कर दिया गया है.

बृहस्पतिवार को करीब 11 बजे अगरतला शहर में शांतनु के शव के साथ मौन विरोध रैली में शामिल हुए अधिकतर पत्रकारों ने घटना स्थल पर मौजूद पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं.

पत्रकारों का आरोप था कि इस पूरी घटना में शांतनु "राजनीतिक संघर्ष" का निशाना बन गए. अलग राज्य की मांग कर रहे आईपीएफ़टी कथित तौर पर सतारूढ़ माकपा सरकार के ख़िलाफ़ रही है, जबकि गणमुक्ति परिषद त्रिपुरा सीपीएम का एक ट्राइबल विंग है.

शांतनु भौमिक का पार्थिव शरीर

शांतनु को बेहरमी से मारा गया

राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और राजनीतिक पार्टियां अभी से सक्रिय हो गई हैं.

अगरतला के वरिष्ठ पत्रकार एवं कॉरस्पॉन्डन्ट फोरम ऑफ अगरतला के सचिव जयंत भट्टाचार्य ने कहा, "आईपीएफ़टी अलग राज्य की मांग कर रही है और अगले साल प्रदेश में चुनाव हैं. ऐसे में शांतनु की हत्या से जुड़ी इस पूरी घटनी में राजनीति होने की पूरी संभावना है. शांतनु को जिस बेहरमी से मारा गया, इससे साफ समझ में आता है कि उसे निशाना बनाया गया है. क्योंकि घटना के समय पुलिस के जवान वहां मौजूद थे. बावजूद इसके हमला करने वाली भीड़ शांतनु को उठाकर ले गई और पुलिस को उसका शव बरामद करने में दो घंटे से अधिक समय लग गया."

शांतनु के साथ लंबे समय तक काम कर चुके तन्मय चक्रवर्ती ने कहा, "एक युवा पत्रकार के तौर पर शांतनु में काम करने को लेकर हमेशा जोश देखने को मिलता था. किसी भी घटना की जानकारी मिलते ही वह सबसे पहले कवर करने निकल पड़ते थे."

शांतनु भौमिक का पार्थिव शरीर

धारदार हथियारों से उसके सिर पर मारा

चक्रवर्ती ने कहा, "मानदाई इलाके में जहां शांतनु पर हमला किया गया दरअसल वहां अलग राज्य की मांग को लेकर अक्सर धरना प्रदर्शन और सड़क जाम होता रहता है. शांतनु का घर भी उसी इलाक़े के पास जिरानिया में है. लिहाजा बुधावार को जैसे ही उन्हें यह ख़बर मिली की आईपीएफ़टी और गणमुक्ति परिषद के लोगों के बीच हिंसक झड़प हुई. वो कवर करने के लिए वहां पहुंच गए."

तन्मय ने कहा, "प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पुलिस भी वहां मौजूद थी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठी चार्ज कर दिया. इस बीच भीड़ ने शांतनु पर हमला कर दिया. भीड़ में शामिल हमलावरों ने पहले डंडे से शांतनु के पैर पर मारना शुरू किया और जैसे ही वह जमीन पर गिरे कुछ लोगों ने धारदार हथियारों से उनके सिर पर वार कर दिया."

उन्होंने बताया, "इसके बाद हमला करने वाले लोग शांतनु को पकड़ कर पास के एक स्टेडियम के पीछे ले गए. वहीं उनकी मौत हो गई. बाद में पुलिस ने शांतनु का शव स्टेडियम के पीछे से बरामद किया."

एक पत्रकार के तौर पर शांतनु की हत्या त्रिपुरा जैसे राज्य में पहली घटना बताई जा रही है. ऐसे में यहां काम करने वाले पत्रकारों में भय का माहौल पैदा हो गया है.

सुतापा गुहा
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त्रिपुरा में पत्रकारों के लिए मुश्किल

अगरतला प्रेस क्लब में मौजूद 'हेडलाइन त्रिपुरा' में काम करने वाली सुतापा गुहा ने कहा, "जैसा माहौल बन रहा है उसमें हम जैसे पत्रकारों के लिए काम करना मुश्किल होता जा रहा है. हाल ही में मुझे फ़ेसबुक पर ट्रोल किया गया. कुछ लोगों ने चेतावनी दी कि मैं किसी पार्टी के पक्ष में लिख रही हूं. और अब शांतनु की हत्या कर दी गई. सही में मुझे डर लगने लगा है."

'दिन-रात' न्यूज चैनल के मुख्य संपादक समीर धर ने कहा, "शांतनु शुरु से हमारे चैनल में काम कर रहे थे और वह लगातार आईपीएफ़टी के कार्यक्रम कवर करते थे. उन्होंने ऐसे विरोध प्रदर्शन से जुड़े कई कार्यक्रम पहले लाइव कवर किए थे. यह उनकी स्थाई बीट थी. इसलिए मुझे लगता है कि लगातार इस इलाके से रिपोर्टिंग करने के कारण वो निशाने पर थे."

समीर कहते हैं कि उन्होंने राज्य सरकार से मुआवज़े की मांग की है. साथ ही हमलावरों को तत्काल गिरफ़्तार कर सज़ा दिलाने की मांग की है.

समीर धर
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सीबीआई जांच की मांग

शांतनु के पिता का कई साल पहले ही देहांत हो गया था. उसकी मां एक सरकारी कर्मचारी हैं और घर पर एक छोटी बहन है.

त्रिपुरा पत्रकार संघ ने घटना की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है.

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