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ऐसी हार-जीत हमने बहुत देखी है: शरद यादव
जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेता शरद यादव ने हाल ही में मेजर गोगोई को आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत के हाथों हाल ही में सम्मानित होने पर टिप्पणी की है.
मेजर गोगोई ने कुछ दिनों पहले एक कश्मीरी को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया था जिसे लेकर कश्मीर और कश्मीर के बाहर काफी विरोध हुआ था.
इस मामले में मेजर गोगोई के खिलाफ सेना की जांच चल रही है लेकिन जांच की रिपोर्ट आने से पहले उन्हें यह सम्मान दिया गया है.
इस पर शरद यादव का कहना है कि पहले जांच पूरी होनी चाहिए थी फिर किसी तरह की बात होनी चाहिए थी.
कश्मीर और बीजेपी सरकार के तीन साल पूरे होने पर शरद यादव ने बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद से फेसबुक लाइव में तफ़सील से बात की है.
शरद यादव कश्मीर की हालत पर कहते हैं, "कश्मीर में हालत इतनी गंभीर हो गई है कि हाल ही में हुए चुनाव में दो फ़ीसदी ही मतदान हुए है. यह देश भर के लिए चिंता की बात है. ऐसा देश में पहले कभी नहीं हुआ. हम लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं. सर्वदलीय बैठक से लेकर संसद तक में उठा रहे हैं."
मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने और उनके वायदों पर शरद यादव का कहना है कि उन्होंने कुछ भी पूरा नहीं किया है.
मोदी सरकार के तीन साल
शरद यादव का कहना है, "किसानों को उन्होंने उनके लागत से डेढ़ गुणा ज्यादा देने की बात कही थी लेकिन अदालत में सरकार मुकर गई कि वो नहीं दे सकती है. हर दिन 30-32 किसानों की हत्या हो रही है. मोदी ने कहा था कि हर साल वो दो करोड़ रोजगार देंगे. इसका मायने यह हुआ कि पांच साल में दस करोड़ रोजगार और करीब पचास करोड़ लोगों की ज़िंदगी बदलेगी. उस हिसाब से अभी छह करोड़ रोजगार होने चाहिए थे. रोजगार और किसानों के सवाल देश के सवाल है."
उन्होंने आगे कहा, "काले धन के बारे में भी बहुत वादे किए गए थे. लेकिन उन्होंने नोटबंदी की और बैठ गए. उस नोटबंदी से कितना कालाधन मिला, यह भी नहीं बता रहे हैं. बाहर से कालाधन लाने की बात कही थी. क्या किया उसका? गंगा साफ करने को कहा था. उसका क्या हुआ? "
इन मुद्दों का लेकिन चुनावी जीत-हार पर असर नहीं पड़ने को लेकर वो कहते हैं कि ऐसी जीत-हार उन्होंने बहुत देखी है.
विपक्ष की चुनौती
शरद यादव कहा, "ऐसी जीत-हार हमने ज़िंदगी में बहुत देखी है. राजीव गांधी से बड़ी जीत तो नहीं है ना ये. लेकिन वो पांच साल पूरे नहीं कर पाए थे. सच को उजागर करना हमारा काम है. जनता में कब तक यह सच पहुंचता, कैसे पहुंचता है, यह देखेंगे और तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी. हमारी कोशिश यह सच जनता तक 2019 के चुनाव तक पहुंच जाए."
वीपी सिंह ने राजीव गांधी के सरकार को चुनौती दी थी. उस वक़्त शरद यादव उनके मजबूत समर्थकों में से थे. लेकिन आज विपक्ष के पास वीपी सिंह की तरह का कोई शख़्सियत है जो नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सकें?
शरद यादव इस सवाल पर कहते हैं, "इस देश में एक आम सहमती इस बात पर कि जो मर गए वो बड़े थे और ज़िंदा रहने पर कुछ नहीं. इस देश में मुर्दागीरी का खेल चलता. जो मर गए उनकी तारीफ और जो ज़िंदा है उनका कुछ नहीं. कौन कहता है कि विकल्प नहीं है. इन सब बातों का कोई मायने नहीं है. कभी विकल्प की कोई कमी नहीं रहती. किसी ने उस वक्त कल्पना की थी कि बीजेपी, लेफ्ट और समाजवादी पार्टियां एक साथ आ जाएंगी. लेकिन आख़िरकार आई ना."
सामाजिक न्याय की लड़ाई
वो कहते हैं कि अंतर्विरोध रहता है लेकिन ये अंतर्विरोध पहले भी सुलझा लिए गए है और अब भी सुलझा लिए जाएंगे.
शरद यादव बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि जब से ये सरकार आई है तब से सारे दलितों के मन में यह है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है. अगर नहीं होता दिल्ली में बिना बुलाए दलितों की इतनी बड़ी संख्या कैसे आ जाती है.
सामाजिक न्याय की लड़ाई को बीजेपी के हथियाने की बात पर वो कहते हैं, "सामाजिक विषमता की लड़ाई सबसे लंबी लड़ाई है. बुद्ध से लेकर पेरियार तक, नारायण गुरु से लेकर महात्मा फुले, कबीर, साहू महराज, गुरू नानक, आंबेडकर और लोहिया तक सबने इस लड़ाई को लड़ा है. यह कभी खत्म नहीं होती. हां इस लड़ाई की उपलब्धि जिस संपूर्णता के साथ होनी चाहिए थी, वो नहीं हो पाई है."
वो मानते हैं, "उत्तर भारत में सामाजिक न्याय की लड़ाई जो परवान चढ़ी थी, वो अब नीचे आ गई है. लेकिन यह ऊपर-नीचे लगा रहता है. सामाजिक न्याय की लड़ाई को व्यक्ति विशेष से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. यह समाज की धरोहर है. समाज इसे चलाता है. इस लड़ाई का फ़ैसला आना अभी बाकी है. आने वाले वक़्त में इसका फ़ैसला जरूर आएगा."
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