एक घर में 11 लाशों पर बना हुआ है रहस्य

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, अमेठी से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
जब मैं उत्तर प्रदेश में अमेठी ज़िले से क़रीब 50 किलोमीटर दूर महोना पश्चिम गांव पहुँचा, तो जमालुद्दीन के घर पर ताला लगा था और पड़ोस में सन्नाटा था.
चार जनवरी की सुबह इसी घर में एक साथ 11 लाशें मिली थीं. जमालुद्दीन को छोड़कर मारे गए लोगों में दो साल की बच्ची समेत सभी महिलाएं थीं, जिनकी गर्दन काटी गईं थीं.
हालांकि दो छोटे लड़के और जमालुद्दीन की बीवी और बेटी बच गए थे. जमालुद्दीन की लाश घर की छत पर बने कमरे में लटकी मिली थी.
जमालुद्दीन के घर तक आते-आते मुझे सिर्फ़ अजान की आवाज़ सुनाई दी. पड़ोसी घरों में थे पर ख़ामोश. मैंने आवाज़ें दीं तो बाहर आए, पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं दिख रहा था.
जमालुद्दीन के घर से ही सटा घर है बुज़ुर्ग साफ़िया बेग़म का. जिनसे मैंने दरयाफ़्त किया तो बोलीं, "साहब हमें तो कुछ पता नहीं कि क्या हुआ? हम तो तब से ख़ुद ही डरे हुए हैं कि बच्चों को लेकर कहां जाएं."
जमालुद्दीन बैटरी का कारोबार करते थे और उनकी एक भाभी बच्चों को उर्दू का ट्यूशन पढ़ाती थीं.

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जमालुद्दीन कैसे इंसान थे? क्षेत्र पंचायत सदस्य डॉ. बिलाल अहमद ने मुझे बताया था कि जमालुद्दीन का पूरा परिवार बेहद मिलनसार था. जमालुद्दीन को कभी उन्होंने किसी से झगड़ते हुए या बुरा-भला कहते नहीं सुना था.
पड़ोसी भी इस बात की तस्दीक करते हैं. उनका कहना था कि जमालुद्दीन एक आम इंसान की तरह रहते थे और अपना परिवार चला रहे थे. वह रोज़ घर से निकलते और शाम को घर आ जाते. किसी को नहीं लगता था कि उनके मन में क्या चल रहा था.

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जमालुद्दीन के एक भाई की मौत हो चुकी है दूसरा कई साल से लापता है. इन दोनों के परिवार भी जमालुद्दीन के साथ रहते थे.
सबसे छोटे भाई अनीस 10 किलोमीटर दूर पैतृक गांव बहादुरपुर में रहते हैं. पुलिस ने उन्हीं की शिकायत पर अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ हत्या का केस दर्ज किया.
हालांकि पिछले एक साल से अनीस का जमालुद्दीन के घर से कोई संपर्क नहीं था. और इस वारदात के बाद अचानक वह परिवार के सभी बचे सदस्यों को अपने साथ लेकर चले गए.
अनीस बताते हैं, "जमाल भाई के पास से एक नोटबुक मिली है, जिसमें उन्होंने उन लोगों के बारे में लिखा है, जिनसे उनकी जान को ख़तरा था. हम पुलिस वालों से रोज़ यह बात कह रहे हैं लेकिन हमारी कोई सुन नहीं रहा है."
दरअसल, पुलिस को कुछ कागज हाथ लगे हैं. माना जा रहा है कि इनमें जमालुद्दीन ने बेतरतीब ढंग से पिछले एक-डेढ़ साल की गतिविधियों के बारे में कुछ लिखा है.

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हिंदी में लिखे इन काग़ज़ों के मुताबिक़ जमालुद्दीन का ज़मीन और पैसे के लेनदेन को लेकर कुछ लोगों से झगड़ा था. कुछ पन्नों में मुझे कई लोगों के नाम दिखे, लेनदेन का ज़िक्र मिला और ख़तरे के रूप में बार-बार एक शख़्स का नाम दिखा.
काग़ज़ के ये पुर्ज़े क्या इस हत्याकांड की पहेली सुलझा सकते हैं? पुलिस फ़िलहाल ऐसा नहीं मानती, हालांकि वह इसकी तहक़ीक़ात कर रही है.
जमालुद्दीन की पत्नी और बेटी इस हत्याकांड में बच गईं थीं, जो कहती हैं कि उन्हें दवा पिलाई गई थी और उसके बाद क्या हुआ उन्हें पता नहीं.
जमालुद्दीन के भाई इस हत्याकांड के पीछे दुश्मनी बताते हैं मगर पुलिस फ़िलहाल ख़ुदकुशी के एंगल से जांच कर रही है. पड़ोसी दुश्मनी की बात नहीं मानते.
अमेठी के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह के मुताबिक़, "जो जानकारी और सबूत मिले हैं, उनसे लगता है कि जमालुद्दीन ने पहले सभी महिलाओं को दवा पिलाई और फिर बेहोश होने के बाद सबकी गर्दन चाकू से काट दी. बाद में ख़ुद भी आत्महत्या कर ली."
मगर हत्यारे ने जमालुद्दीन की पत्नी और बेटी और दो लड़कों को क्यों छोड़ दिया? इसका जवाब फ़िलहाल पुलिस के पास नहीं.

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पुलिस कहती है कि इसके पीछे आर्थिक तंगी भी वजह हो सकती है हालांकि गांव के लोग इससे सहमत नहीं. क्षेत्र पंचायत सदस्य डॉ बिलाल कहते हैं कि जमालुद्दीन ने आर्थिक तंगी का भी कभी ज़िक्र नहीं किया था.
हालांकि स्थानीय पत्रकार सुरजीत यादव का मानना है कि, "मरने वालों में आठ लड़कियां थीं. हो सकता है उनकी ज़िम्मेदारी की बात सोचकर उन्हें मार दिया हो. क्योंकि जमालुद्दीन ही फ़िलहाल इन सबके अभिभावक भी थे और भरण-पोषण भी वही करते थे. उन्होंने सोचा होगा कि लड़के अपना जीवन-यापन कर लेंगे, पर लड़कियों के लिए ये मुश्किल होगा."
जमालुद्दीन के पड़ोसी आज भी दहशत में हैं. वो जब भी जमालुद्दीन के घर को देखते हैं तो उन्हें लगता है कि चार जनवरी की सुबह जैसे फिर साकार हो गई हो.
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