'अगर पुलिस चुस्त होती तो नाव नहीं डूबती'

बिहार में नाव हादसे में मृत लोगों के परिवारों में मातम का माहौल है

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    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

शनिवार शाम पटना में हुए नाव हादसे में मरनेवालों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है.

पटना के सरकारी अस्पताल पीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉक्टर दीपक टंडन के मुताबिक़ इनमें से एक को छोड़ बाकी सभी मृतकों की पहचान कर ली गई है. मृतकों में 14 मर्द, तीन औरतें और सात बच्चे शामिल हैं.

नाव हादसे की जगह

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हादसे के चश्मदीद से लेकर इस घटना में सुरक्षित बच निकलने वाले सभी लोगों का यह कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण ही दुघर्टनाग्रस्त नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार हो गए थे, जिसके कारण यह डूब गई.

ऐसे ही कुछ लोगों ने बीबीसी से ये बातें साझा कीं:

मिथिलेश महतो

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पटना के गोलकपुर में रहने वाले मिथिलेश महतो के अनुसार, "शाम होने के कारण लोग वापस लौटने की हड़बड़ी में थे. जैसे ही नाव किनारे लगी उस पर करीब सौ आदमी चढ़ गए. हालांकि नाव वाले ने लोगों को चढ़ने से मना भी किया, लेकिन लोग नहीं माने. नाव पुरानी और खस्ताहाल थी. ऐसी नाव पर ज्यादा लोगों को चढ़ने से रोकने के लिए वहां पुलिस मौजूद नहीं थी. खुलने के बाद करीब बीस से पच्चीस फुट आगे बढ़ते ही नाव आगे से डूबने लगी. मैंने कूदकर अपनी जान बचाई और फिर डूब रहे दूसरे दो लोगों को भी बचाया."

दयानंद महतो

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दयानंद महतो कहते हैं, "मेरे समधी के चार रिश्तेदार इस हादसे में मारे गए हैं. उनकी एक बहू, दो पोती और एक नतिनी इस दुर्घटना के शिकार हुए हैं. मेरी आखों के सामने नाव डूब गई. नाव डैमेज थी. प्रशासन के इंतजाम में भी कमी थी. अगर वहां पुलिस मौजूद होती तो नाव पर ज्यादा लोग सवार नहीं होते. पुलिस की डांट या फिर उसकी कड़ाई से नाव पर क्षमता से अधिक लोगों को सवार होने से रोका जा सकता था."

वीरू साह

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पटना के महेंद्रू के वीरू साह ने बताया, "मेरा भाई ठेला चलाकर अपना घर-बार चलाता था. उसके चार छोटे-छोटे बच्चे हैं. हादसे में जो बच कर निकले उन्होंने बताया कि नाव टूटी-फूटी हुई थी. नाव वाले को भी ऐसी नाव नहीं चलानी चाहिए थी. साथ ही प्रशासन को पुरानी नाव चलाने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए थी."

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