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सरदार की भूमिका में सैफ़... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नील नितिन मुकेश ने भारत की मल्टीप्लेक्सों की निंदा करते हुए कहा है कि कलाकार मेहनत करके फ़िल्में बनाते हैं और मल्टीप्लेक्स उन्हें चलाते नहीं हैं. 'आ देखें ज़रा' के हीरो ने ये भी कहा कि दर्शकों को निराश होने की ज़रुरत नहीं है क्योंकि वो लोग फ़िल्म को सिंग्ल स्क्रीन सिनेमा घरों में देख सकते हैं. भारत के बड़े मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों की श्रृंखला ने इरोस के निर्माण में बनी इस फ़िल्म को शुक्रवार को रिलीज़ नहीं किया क्योंकि मल्टीप्लेक्स के मालिकों और निर्माताओं के बीच आमदनी बाँटने को लेकर झगड़ा चल रहा है. मल्टीप्लेक्स के मालिक चाहते थे कि इरोस निर्माताओं की एकता को तोड़ कर उनकी बात मान जाए जो कि इरोस को मंज़ूर नहीं था. नतीजा ये हुआ कि मल्टीप्लेक्स के मालिकों ने आ देखे ज़रा को अपने मल्टीप्लेक्स में रिलीज़ नहीं किया. नील नितिन मुकेश की बात सुन कर हँसी आई क्योंकि जिस ने भी ये फ़िल्म देखी है उनका यही कहना है कि नील ने नींद में काम किया है, उनकी ज़रा सी भी मेहनत नज़र नहीं आती है. **************************************************** अक्षय और करीना की कैमिस्ट्री
साजिद नाडियावाला की आने वाली फ़िल्म, कमबख़्त इश्क का पहला ट्रेलर देख कर ये कहा जा सकता है कि दर्शक इसे देखने के लिए बेताब हो जाने वाले हैं. डेढ़ मिनट का प्रोमो है लेकिन देखने वालों को कम से कम तीन-चार बार हँसी ज़रुर आती है. इससे पहले अक्षय और करीना कपूर की कोई फ़िल्म नहीं चली है पर इस फ़िल्म के ट्रेलर से लगता है कि दोनों की कैमिस्ट्री में बहुत ज़्यादा सुधार आया है. **************************************************** सैफ़ के सिर पगड़ी
सैफ़ अली ख़ान की पहली निर्मित फ़िल्म लव आज कल, की ट्रेड में बड़ी तारीफ़ हो रही है. जब वी मेट के निर्देशक इम्तियाज़ अली ने इस फ़िल्म में कुछ नया सोचा है. है तो ये प्रेम कहानी ही लेकिन उस कहानी में एक नया एंग्ल ज़रुर है. इस फ़िल्म में सैफ़ कुछ समय के लिए सरदार बनते हैं. दरअसल ये दो दौर की कहानी है. एक दौर में सैफ़ की सरदारों वाली पगड़ी होती है. सैफ़ अपने करियर में पहली बार सरदार बने हैं. **************************************************** कुछ गड़बड़ है
करण जौहर के बैनर तले बन रही फ़िल्म की हाल ही में फ़िलाडेलफ़िया में शूटिंग ख़त्म हुई. इसे रेंसिल डिसिल्वा निर्देशित कर रहे हैं जिन्होंने रंग दे बसंती लिखी थी. फ़िलाडेलफ़िया से ख़बर ये है कि करण जौहर को काफ़ी लोगों के पैसे चुकाने बाकी हैं. ये मत समझिए कि करण ने कोई गड़बड़ घोटला किया है. गड़बड़ी हुई ज़रूर है लेकिन ये काम है वहाँ के लाइन प्रोड्यूसर का. लाइन प्रोड्यूसर ने इतने झमेले किए हैं कि करण को उन्हें सलटाने में नाक में दम हो जाने वाला है. ऊपर से बदनामी हुई वह अलग. खाया पिया कुछ नहीं, ग्लास तोड़ा आठ आना वाली बात. **************************************************** लोगों को डराएँगे अपूर्व
अपूर्व लखिया ने ज़बरदस्त एक्शन वाली फ़िल्मों के बाद एक हॉरर फ़िल्म की कहानी लिखी है. शूटआउट एट लोखंडवाला और मिशन इस्तांबूल के बाद अब अपूर्व ने दर्शकों को डराने की ठान ली है. वैसे शूट आउट एट लोखंडवाला ने औसत धंधा किया और मिशन इस्तांबूल तो बुरी तरह से पिट गई. यानी कि भयानक क्लेकशन से वितरकों को डराने के बाद अब अपूर्व भी चले दर्शकों को डराने. **************************************************** पत्रकारिता का पाठ
सुभाष घई ने फ़िल्म इंस्टीट्यूट के बाद अब पत्रकारिता इंस्टीट्यूट खोलने की सोच ली है. उनकी 'विस्लिंग वुड्स इंटरनेशनल' में एक्टिंग के अलावा फ़िल्म निर्माण, निर्देशन, फ़िल्म लेखन, संपादन वगैरह का कोर्स है. अब उनका दिमाग़ चला है एक पत्रकारिता का संस्थान खोलने की ओर. ये भी ठीक है, उनकी फ़िल्म इंस्टीट्यूट से निकले विद्यार्थी फ़िल्में बनाएँगे और पत्रकारिता संस्थान से पास हुए छात्र फ़िल्मों का रिव्यू लिखेंगे. |
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