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बुधवार, 14 जनवरी, 2009 को 15:48 GMT तक के समाचार
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फ़िल्म करियर लकी साबित हुआ: अक्षय

अक्षय

'इंसान ख़ुद को कितना भी तीस मार खां समझ ले लेकिन वो हमेशा ऐसे किसी इंसान से मिलता है जिसे देखकर आपको लगता है कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है'.

बकौल अक्षय कुमार ये फ़लसफ़ा उन्होंने चांदनी चौक टू चाइना में चीनी कलाकारों के साथ काम करने के बाद सीखा है.

पिछले साल अक्षय कुमार ने हैप्पी सिंह बनकर 'सिंह इज़ किंग' में लोगों को ऑस्ट्रेलिया की सैर करवाई थी. अब नए साल में वो लोगों को चांदनी चौक से चाइना तक की सैर करवाने जा रहे हैं. हॉलीवुड कंपनी वार्नर ब्रदर्स ने रोहन सिप्पी के साथ मिलकर ये फ़िल्म बनाई है.

पेश है बीबीसी से बातचीत के मुख्य अंश:

नए साल में आप लोगों को चांदनी चौक से चाइना तक की सैर करवा रहे हैं, लोग इस फ़िल्म को आपकी निजी ज़िंदगी से भी जोड़ कर देख रहे हैं.

मेरे लिए ये ऐसी फ़िल्म रही जिसमें मैं एक तरह से मैं अपना ही किरदार निभा रहा हूँ. जैसे कि मैं भी ज़ाती ज़िंदगी में कभी खानासामा था, वही रोल फ़िल्म में भी है. असल ज़िंदगी में मैं मार्शल आर्ट्स सीखने बैंकॉक गया था जबकि फ़िल्म में मैं चीन जाता हूँ. अगर आप अपनी ज़िंदगी की कहानी को ही पर्दे पर उतार रहे हों तो उसमें जितना मज़ा आता है, उसी मज़े में ये फ़िल्म की मैने.

चांदनी चौक.. में आपने चीन के बेहतरीन अभिनेताओं के साथ काम किया है. गॉर्डन लयू जैसे लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मशहूर हैं और किल बिल और द थर्टीसिक्सथ चैंबर ऑफ़ शाओलिन जैसे फ़िल्में कर चुके हैं. उनके साथ कैसा तालमेल रहा.

मैं समझता था कि मुझे मार्शल आर्ट्स में बहुत कुछ आता है लेकिन चीन के लोगों के साथ काम करके एहसास हुआ कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है. इससे एक बात तो साबित होती है कि इंसान ख़ुद को कितना भी तीस मार खां समझ ले लेकिन वो हमेशा ऐसे किसी इंसान से मिलता है जिसे देखकर लगता है कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है.

लोग मुझसे कहते हैं कि आप कॉमेडी फ़िल्में तो बहुत कर चुके, अब और क्या करेंगे.तो मैं यही कहता हूँ कि अभी कॉमेडी में भी काफ़ी कुछ ऐसा है जो मुझे सीखना है. एक्शन, रोमांस...सब कुछ में सीखना है अभी.

दिल्ली में आपने बचपन गुज़ारा है, घर-परिवार वहीं हैं. फ़िल्म की शूटिंग के दौरान कई पुरानी यादें भी ताज़ा हुई होंगी.. वहाँ की गलियाँ और पराठे.

वैसे तो चांदनी चौक में मेरा जाना हमेशा रहता है, हर तीन महीने पर मैं वहाँ जाता हूँ क्योंकि मेरा अपना घर वहाँ हैं, मेरी नानी रहती है. लेकिन ये ज़रूर है कि मैने वहाँ शूटिंग नहीं की थी. ये बहुत कमाल की चीज़ हुई कि मैं वहीं शूटिंग कर रहा था जहाँ मैं बचपन में जाकर पराठे खाया करता था, इमली के झाड़ पर जाकर चोरी करता था, फल की दुकान से फल चुराकर भाग जाया करता था. उसी जगह पर जाकर बतौर एक्टर जाकर काम करना कमाल का अनुभव था.

चांदनी चौक टू चाइना के साथ वार्नर ब्रदर्स का नाम जुड़ा है. इससे आपकी फ़िल्म या हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री को किस तरह का फ़ायदा मिलता नज़र आ रहा है?

मेरी फ़िल्म को ही नहीं बल्कि पूरे बॉलीवुड को फ़ायदा मिलेगा. जिस तरह से वार्नर ब्रदर्स ने बड़े पैमाने पर इस फ़िल्म को रिलीज़ किया है, उससे हमें बिज़नस में बहुत फ़ायदा होगा. ज़्यादा फ़ायदे का मतलब है कि हम बड़ी-बड़ी और फ़िल्में भी बना सकते हैं.

फ़िल्म शूटिंग के कारण साल भर में काफ़ी समय भारत से बाहर बिताते हैं, घर से दूर.कितना मुश्किल होता है.

शूटिंग के दौरान बाहर जाना ज़रूरत बन जाता है. लेकिन मैं ख़ुद को बहुत ख़ुशकिस्मत मानता है कि मैं अपने बच्चे और बीवी को भी साथ ले सकता हूँ. उस हिसाब से फ़िल्मों का काम मेरे लिए बहुत लकी साबित हुआ है.

बैंकॉक में शेफ़ से लेकर बॉलीवुड में सुपरस्टार तक का सफ़र, ख़ुश हैं इस मकाम से.

मैं जिस मकाम पर हूँ उससे बेहद ख़ुश हूँ. मैने इसे बहुत मेहनत करके पाया है, अपने फ़ैन्स की वजह से पाया है. लेकिन साथ ही साथ मुझे डर भी बहुत लगता है.

आपने जो ज़्यादातर किरदार निभाए हैं वो बहुत सीधे-सरल लोग हैं जो सड़क चलते आपको गली-मोहल्ले में मिल जाएँगे, कभी-कभी बेवकूफ़ाना हरकते भी करेंगे बजाय कि लार्जर दैन लाइफ़ छवि वाले किरदार.

मैं अपने आस-पास लोगों से अकसर यही बात सुनता है कि अरे बड़ा ही बेवकूफ़ लड़का है है या क्या बेवकूफ़ औरत है. हमें ज़्यादातर आस-पास ऐसे ही किरदार मिलते हैं. अब ज़रूर ऐसा होने लगा है कि कभी-कभी सुनता हूँ कि बड़ा समझदार व्यक्ति है. मैं तो वही किरदार निभाना चाहता हूँ कि जो सरल हो, आम इंसानों के जैसा हो.

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