|
एक मुलाक़ात काजोल के साथ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं. बीबीसी एक मुलाक़ात में इस हफ्ते हमारी ख़ास मेहमान ऐसी हस्ती हैं जो किसी परिचय की मोहताज़ नहीं. जी हां, हमारी मेहमान हैं सुपर एक्ट्रेस, काजोल. आपका स्वागत है काजोल. सबसे पहले ये बताइए कि जब आपकी तारीफ़ होती है कि आप बेस्ट हैं, बेजोड़ अभिनेत्री हैं और कहाँ चली गईं, जल्दी-जल्दी पर्दे पर क्यों नज़र नहीं आती... तो कैसा लगता है? ये मेरी खुशकिस्मती है, अच्छा लगता है जब लोग आपके काम को सराहते हैं, आपको पसंद करते हैं. मैं कोशिश करती हूँ कि जहाँ तक हो सके, लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर सकूं. ये बताइए कि आप इतनी सफल अदाकारा रहीं, तो कैसा लगता है अपना ये सफ़र. मुझे लगता है कि मैं भाग्यशाली रही हूँ, मेरा सिनेमाई सफ़र बड़ा ही शानदार और सुकून भरा रहा. हालांकि कुछ मुश्किलें भी आईं लेकिन वो इतनी बड़ी नहीं रहीं कि आसानी से पार नहीं किया जा सके. मुझे संतुष्टि है कि लोगों को मेरा काम पसंद आया. मेरी ज़्यादातर फ़िल्में भी चलीं. इस मामले में खुद को भाग्यशाली मानती हूँ. आपसे पहले आपकी माँ तनूजा, आपकी मौसी नूतन और नानी शोभना समर्थ भी बेहतरीन अदाकारा रहीं हैं. उस माहौल का क्या असर पड़ा आपके ऊपर. सच कहूँ तो वास्तविकता ये है कि उन सभी का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ा इसका कारण ये रहा कि मैं अपनी माँ की फ़िल्में ज़्यादा देखती नहीं थी. पर्दे पर उन्हें रोता देखकर मुझे बहुत रोना आता था. यही कारण रहा कि नूतन मौसी की फ़िल्में नहीं देखीं. और एक सच्चाई ये भी है कि फ़िल्मों की बजाए मुझे क़िताबें पढ़ना पसंद रहा है. ये तो बड़ी ही अजीब बात लगती है. अच्छा तो फिर कौन-सी ऐसी किताब पढ़ी जिससे ये मन हुआ कि फ़िल्मों में एक्ट्रेस बनना है. बात तो अजीब है, लेकिन सच्चाई ये है कि कुछ सोचा ही नहीं था कि किस क्षेत्र में करियर बनाना है. कभी ये सोचा भी नहीं था कि एक्ट्रेस बनना है. मुझे जब फ़िल्म का पहला ऑफ़र आया था तो मैं सिर्फ़ 16 साल की थी. उस वक्त मैंनें काम के बारे में सोचा भी नहीं था. लेकिन ऑफ़र मिलने पर सोचा कि चलो काम करते हैं, मजा आएगा. उस वक्त मैं अपने मेकअप आर्टिस्ट, मिकी और जाने माने फ़ोटोग्राफ़र गौतम राजाध्यक्ष के साथ काम कर रही थी. गौतम जी ने ही ‘बेखुदी’ नाम की फ़िल्म लिखी थी. उन दोनों ने एक तरह से मुझे गोद ले लिया था और नाम बदल दिया था. वो मेरे पिता और दादा के समान थे. इसके बाद फ़िल्मों के ऑफ़र आने शुरू हो गए थे. जैसे आप अपनी मम्मी और मौसी की फ़िल्में नहीं देखती थीं तो क्या और भी फ़िल्में नहीं देखती थीं. सच मानिए मैं ज़्यादा फ़िल्में नहीं देखती थी. सिर्फ़ अमिताभ बच्चन जी की कुछ फ़िल्में ही देखी थीं. कुल मिलाकर 10-11 फ़िल्में ही देखी होंगीं तब तक. बीबीसी एक मुलाक़ात का सफ़र आगे बढ़ाते हैं. अपनी पसंद का एक गाना बताएं. कोई नया या पुराना. मेरा फ़ेवरेट गाना इस समय फ़िल्म ‘यू मी और हम’ का टाइटिल सॉंग है. ये मेरे दिल को छू जाता है. लगता है कि 20 साल बाद भी मैं यही गाना सुनती रही होंगी. विशाल जी ने इस गाने को गाया है इसे सुनकर बस रोना आ जाता है.
एक ख़ास चीज़ नोट की है आपमें, कि जब भी कुछ महत्वपूर्ण होता है तो आपको रोना आ जाता है. काफ़ी अहम है आपकी डिक्शनरी में ये रोना शब्द. नहीं हमेशा तो नहीं, लेकिन होता है कभी कभी कि कोई चीज़ बहुत अच्छी लगती है तो आंखों में आंसू आ जाते हैं. तो आपको किताबें पढ़ना पसंद रहा है. किस तरह की किताबें, जैसे हम बड़े हुए तो हार्डी ब्यायज़ जैसी किताबें आम रहीं आपके साथ क्या रहा. इनके अलावा कुछ और. मैं कभी बेहतर किताबें भर ही नहीं पढ़ती थी. इसमें कॉमिक्स से लेकर हर तरह की किताबें पढ़ती थी. जैसे मिल्स ऐण्ड बून्स, इतिहास की किताबें पढ़ती हूं. आज भी कॉमिक्स पढ़ती हूँ. और एक ख़ास बात ये कि कभी अपना ज्ञान बढ़ाने भर के लिए नहीं पढ़ती बल्कि पढ़ने को इंज्वाय करती हूँ. मैं बच्चों के लिए भी कुछ किताबें लिखने के बारे में सोच रही हूँ, और हो सकता है कि अगली बार आपके टॉक-शो में आऊं तो एक लेखिका के तौर पर आऊं. बच्चों के लिए लिखने की प्रेरणा क्या बच्चों से मिली. क्या ख़ुद के बच्चों से मिली ये प्रेरणा. मुझे बच्चों से बहुत प्यार है. मुझे लगता है कि इन्सान का सबसे बेहतर स्वरूप बच्चे होते हैं. और मुझे हर तरह के बच्चे, शैतान बच्चे भी बहुत पसंद हैं. आप किस तरह की बच्ची रहीं हैं... मैं बहुत शरारती थी. लेकिन मेरी माँ की सख़्त हिदायत थी कि जो भी कहना हो कहो लेकिन तमीज़ के दायरे में. आज भी मेरी मम्मी कहती हैं कि मैं भले ही बेहद शरारती रही थी लेकिन उतनी ही प्यारी थी. काजोल, मुझे एक चीज़ बताइए कि जैसा आपने अपने बारे में बताया, उससे लगता नही आप इतनी खूबसूरत होने के बावजूद ज्यादा सजने संवरने वाली लड़की रहीं. आपमें टॉम ब्वाय की इमेज नज़र आती रही है. सच बताऊं आपको जब भी कभी किसी समारोह में, या साधारणतौर पर देखते हैं तो लगता है कि आप सजने संवरने में ज्यादा यकीन नहीं रखतीं. ये सच है कि मुझे आजतक कभी तैयार होना पसंद नहीं रहा. हम रोजाना के जीवन में इतना ज़्यादा तैयार होते हैं कभी-कभी सजना संवरना बिल्कुल पसंद नहीं आता. लगता है कि लोगों से मिलें तो सादा और वास्तविक रहा जाए. आजकल मैं अपनी बेटी को देखती हूँ तो पांच साल की उम्र में ही उसमें सजने संवरने का बेहद क्रेज़ है. ये बात ज़रूर है कि मैंने अपनी मम्मी के जूते पहन-पहन कर बहुत देखे हैं. मैंनें कभी शीशे के सामने जाकर खुद को निहारा नहीं. हालांकि मेरी बहन को मेकअप बहुत पसंद रहा है.लेकिन मुझे इस सबके बजाए किताबें ही पसंद थीं और दूसरा मैं अपनी गुड़िया के साथ खेलती थी, उसकी शादी कराती थी. तो आपकी बेटी जब ये ‘लड़कीपना’ करती है या सजती संवरती है तो अच्छा लगता होगा, क्योंकि आपने ऐसा नहीं किया. मैं जब भी अपनी बेटी की एक झलक देखती हूँ तो मुझे बेहद सुखद अनुभव होता है. उसे एक नज़र देख भर लेना दिल को ठंडक देता है. मैं भगवान की शुक्रगुज़ार हूँ कि मुझे इतनी प्यारी बेटी दी. इस विषय में एक आख़िरी सवाल कि क्या काजोल में अभी भी एक टॉमब्वाय मौजूद है. बिल्कुल, हमेशा. सब संभल के रहें और भले ही मैं एक औरत नज़र आती हूँ लेकिन सिर्फ़ इतना ही समझने की ग़लती किसी को नहीं करनी चाहिए. आपके हर इंटरव्यू में एक अलग चीज़ दिखती है कि एक जवाब बेहद समझदारी भरा तो अगला जवाब बिल्कुल अप्रत्याशित सा मिलता है. कैसे हो सकता है ये. लेकिन मेरा विश्वास है कि ये बिल्कुल मौलिक होगा. देखिये मैं दिल से हर चीज़ का जवाब देती हूँ. कोई बात कहने से डरती नहीं हूँ. तो काजोल खुद ये बताएँ कि वो आख़िर हैं कैसी. काजोल थोड़ी सी पागल है, थोड़ी अच्छी है, थोड़ी ख़राब है. लेकिन इसके बावज़ूद लगता है कि कुल मिलाकर काजोल एक शानदार व्यक्तिव है. ये बताइए कि अजय देवगन जी से पहली मुलाक़ात कब हुई. कब हुआ वो पहला क्रश. वास्तव में हमारे बीच ‘लव एट फ़र्स्ट साइट’ या पहली नज़र का प्यार जैसा कुछ नहीं हुआ. हम फ़िल्म हलचल की शूटिंग पर मिले थे. पहले दोस्त बने थे. लेकिन अजीब बात ये रही थी कि जब अजय से पहली बार मिली थी तो देखा कि अजय एक किनारे अकेले बैठना पसंद करते थे. ज़्यादा बातें नहीं करते थे. मुझे लगता था कि ऐसा भला कैसे हो सकता है कि कोई बात नहीं करे. आपको देखकर लगता है कि भई ये लड़की बोलना बंद क्यों नहीं करती. लेकिन अजय को देखकर लगता है कि आखिर उनकी क्या समस्या है जो बिल्कुल बोलना ही पसंद नहीं करते. तो क्या वास्तव में अजय ऐसे ही हैं. देखिये भले ही वो फिल्मों में या असल ज़िदग़ी में कम बोलने वाले नज़र आते हों लेकिन वो एक गहराई वाले आदमी हैं और जब बोलते हैं तो बड़े पते वाली बात बोलते हैं. अच्छा..(हंसते हुए) मुझे लगा कि जब बोलते हैं तो बड़ा ही पति की तरह बोलते होंगें. हां कभी-कभी पति की तरह भी बोलते हैं. लेकिन अपने परिवार वालों, दोस्तों और करीबियों से बड़े ही खुले हुए हैं. जबकि बाहर वालों के साथ उतना सहज महसूस नहीं करते. आप ये सवाल अगर मुझसे 10 साल पहले करते तो भले ही आपसे मैं सहमत होती लेकिन आज मैं कह सकती हूँ कि वो आम बातचीत में बहुत सहज हैं. उनकी थोड़ी-सी बात और करते हैं. क्या वो कभी पति की तरह व्यवहार करते हैं. क्या डांट लगाते हैं आपको. नहीं कभी नहीं. मुझे याद नहीं पड़ता कि कभी मुझ पर चिल्लाए हों. लेकिन अगर हमारे बीच कुछ झगड़े होते हैं तो जिसकी ग़लती होती है वो दूसरे को मना लेता है. सॉरी बोल देता है. लेकिन मुझे पता नहीं, पर मैं कह सकता हूँ कि आप को ही ज़्यादा बार सॉरी बोलना पड़ता होगा. क्यूँ लगता है आपको.....(हँसते हुए),आपको नहीं लगता कि मैं एक अच्छी पत्नी हूँ. तो क्या अजय साहब ज़्यादा सॉरी बोलते होंगे. नहीं, दोनों ही अपनी-अपनी गलती को स्वीकार कर लेते हैं. कभी-कभी गलती नहीं होते हुए भी सॉरी बोलना अच्छा होता है क्योंकि परिस्थिति ऐसी होती है. क्या बात है. सच कहूँ बिल्कुल दिल से. आप दोनों की जोड़ी बेहद शानदार है. मेरी कामना है कि ये जोड़ी हमेशा बनी रहे. अब बात करते हैं ऑन स्क्रीन जोड़ी की. शाहरूख ख़ान के साथ आपकी जोड़ी इतनी हिट रही. क्या वो वास्तव में आपके पसंदीदा सह-कलाकार हैं. शाहरूख मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. मुझे उनके साथ करना बेहद पसंद है, बहुत मज़ा आता है. वो बेजोड़ कलाकार हैं. वो अपने काम को तीन सौ प्रतिशत बेहतर करते हैं.
लेकिन अगर शाहरूख और अजय देवगन की तुलना की जाए तो क्या नहीं लगता कि शाहरूख जहाँ एक खुशमिज़ाज व्यक्ति हैं तो वहीं अजय एक गहराई वाले व्यक्ति हैं. ये तो है कि शाहरूख, अजय की तुलना में ज्यादा खुले हुए और मनोरंजक हैं. मैं जो सवाल पूछने जा रहा हूँ, इस सवाल का आप इसका कूटनीतिक या सीधा सीधा जवाब दे सकती हैं. लेकिन जैसा मेरा अनुभव रहा है कि शाहरूख में काफी बदलाव आ गया है. तो क्या आपने उन्हें कभी इस बदलाव के बारे में कोई सलाह दी है. नहीं कभी नहीं, दोस्त होने के नाते मैंने किसी ऐसी सलाह देने की ज़रूरत नहीं समझी. मुझे लगता है कि वो काफ़ी मजाकिया किस्म के इंसान हैं. लेकिन मज़ाक-मज़ाक में कुछ कह भी जाते हैं. वो खुद पर हंस सकते हैं शायद इसीलिए उनको लगता होगा कि दूसरों का भी मज़ाक बनाया जा सकता है. ठीक बात है, चलिए शाहरूख ख़ान की बात छोड़िए लेकिन क्या कभी आपको ऐसा लगा कि अगर किसी का मज़ाक बनाया हो तो बाद में क्या लगा कि ऐसा उस समय क्यों किया. जी हाँ कभी कभी लगता है कि मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए, लेकिन सच बताऊँ कि उस समय जो उसका मज़ा होता है वो अच्छा लगता है. तो क्या फिर कभी ऐसा भी होता है कि ये महसूस हुआ हो कि कुछ ग़लत कह दिया और फिर फोन करके माफ़ी मांगी हो नहीं मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ. क्योकि अगर कोई मुझे अच्छी तरह जानता है तो वो उसका बुरा नहीं मानता. और फिर मैंने दिल से या किसी उद्देश्य से किसी के बारे में कभी बुरा नहीं कहा. लेकिन कभी ऐसा लगा कि नहीं, इसको तो सबक सिखाना ही है. काफी लगता है (हंसते हुए)....लेकिन मेरा मानना है कि मैं भला ऐसा क्यों करूँ, शायद ये मेरी फितरत नहीं है. चलिए अब बात करते हैं आप की फ़िल्मों की. ‘दिल वाले दुल्हनियाँ ले जाएंगे’ आपकी एक सुपर डुपर हिट फ़िल्म थी. तो क्या फ़िल्म साइन करने से पहले आपको लगा था कि ये फ़िल्म भारतीय सिनेमा जगत की इतनी बड़ी हिट होगी. नहीं ऐसा कोई एहसास नहीं था, चाहे आप आदित्य चोपड़ा, शाहरूख या करन जौहर से पूछ लीजिए. किसी को ये गुमान नहीं था कि वो फ़िल्म इतनी बड़ी हिट हो जाएगी. लेकिन इतना तय था कि मैं एक अच्छी फ़िल्म में काम करने जा रही हूँ. मुझे उसकी स्क्रिप्ट बेहद पसंद आई थी. काजोल अगर आप अपने सफ़र पर नज़र डालें तो वास्तव में बड़ा ही सफलतापूर्ण करियर रहा. अपनी शर्तों पर फ़िल्म में आईं, अपनी शर्तों पर बड़ी अभिनेत्री बनीं,और फिर सब कुछ सही समय पर हासिल होता चला गया. तो क्या ये मानें आपकी टाइमिंग शानदार है या फिर ये नेचुरल तरीके से होता चला गया. मैंनें हमेशा वही किया है जो मुझे लगा कि सही है. जितने भी निर्णय लिए हैं चाहें वो सही हों या ग़लत, वो सभी खुद लिए हैं. और उनकी ज़िम्मेदारी भी खुद ली है. मैंनें कभी वक्त देखकर कोई निर्णय नहीं लिया. मुझे नहीं लगता कि मैं कोई मास्टर ऑफ़ टाइमिंग हूँ. अगर मैं वक्त देखकर निर्णय लेती तो अभी तक मेरी शादी नहीं हुई होती, मेरी बेटी नहीं होती और इतनी कम फ़िल्में नहीं होती. इसका मतलब ज़्यादातर आपके निर्णय आप ख़ुद ही लेती हैं. बिल्कुल, मेरा मानना है कि इंसान को अपने निर्णय खुद लेने चाहिए. दस साल के बाद निर्णय लेने की क्षमता विकसित होने लगती है, लेकिन आगे बढ़कर खुद ज़िम्मेदारी संभालनी चाहिए. ये बताइये कि निर्णय आप दिल से लेती हैं या दिमाग़ से. दोनों से ही. लेकिन ज़्यादातर निर्णय अपने दिल से लेती हूँ. लेकिन पहले कोई चीज़ दिल में उतरनी चाहिए वरना चाहे कितनी भी अच्छी हो मुझे पसंद नहीं आती. लेकिन मान लीजिए कोई स्क्रिप्ट अच्छी नहीं लिखी है लेकिन मुझे लगता है कि इसमें क्षमता है तो मैं फिर दिमाग़ से काम लेती हूँ. एक सवाल आपसे ये ज़रूर पूछना चाहूँगा कि फ़िल्मों के मामले में दोस्ती कितनी मायने रखती है. जैसे करन जौहर या आदित्य चोपड़ा कोई फ़िल्म बनाएंगें तो काजोल उसमें काम करने से मना नहीं करेंगीं. लेकिन कोई और होगा तो फिर स्क्रिप्ट और कहानी के बारे में विचार करेंगीं. जी हाँ, दोस्ती तो मायने रखती है. मेरा मानना है कि दोस्ती बेहद अहम होती है, और अगर कभी मैंनें ना भी की है तो उसके बाद भी दोस्ती कायम रही है. ये बात भरोसे की है. अपको किस कलाकार के साथ काम करने में अच्छा लगता है. अपने फ़ेवरेट को-स्टार के बारे में बताइए. मुझे अपने सभी को-स्टार के साथ काम करने में बहुत ही अच्छा लगता है. इस मामले में मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूँ. आमिर ख़ान, सैफ़ अली ख़ान, अक्षय, शाहरूख, अनिल कपूर से लेकर जैकी श्राफ सभी के साथ काम कर चुकीं हूँ. उन सभी लोगों ने मुझे बहुत ही प्यार और सम्मान दिया है. बहुत ही अच्छा माहौल दिया है काम करने का. मैं उन सभी को प्यार करती हूँ इसलिए किसी एक का नाम नहीं ले सकती. एक बात बताएं, आप तो फ़िल्मी बैकग्राउंड से आती हैं तो आपके साथ इंडस्ट्री में ऐसा बर्ताव हुआ. लेकिन क्या सभी लोगों के साथ इतना सुखद होता है बालीवुड का अनुभव. मुझे लगता है कि आपकी इज़्ज़त आपके हाथ होती है. अगर आप बहुत बड़े आदमी हों लेकिन खुद अपनी इज़्ज़त नहीं करते तो कोई आपकी इज़्ज़त नहीं करेगा, वहीं अगर आप छोटे भी हों लेकिन खुद की इज्जत करते हैं तो सब आपकी इज़्ज़त करेंगें. मेरा मानना है कि अपनी छवि बनाना आपके हाथ में है. हालांकि ये सच है कि इंडस्ट्री में कास्टिंग काऊच जैसी चीजें हैं. लेकिन फिर भी खुद में भरोसा रखने वाले के सामने गलत लोगों की नहीं चलती. अपने जीवन का सबसे सुखद लम्हा बताइए. जब मेरी बेटी इस दुनिया में आई. आपको खाने में सबसे ज़्यादा क्या पसंद है. सच कहूँ तो मुझे खाना ज़्यादा पसंद नहीं लेकिन कलाकंद, और मीठी दही जैसी मीठी चीजें पसंद हैं. ...और छुट्टी मनाना कहां पसंद है. मुझे लगता है कि परिवारवालों, दोस्तों के साथ जहाँ भी जाओ वही सबसे बेहतर जगह हो जाती है. शुरू से एक सवाल दिमाग़ में आ रहा है कि आप अगर इतनी जल्दी वजन बढ़ा लेती हैं तो उतनी जल्दी कम भी कैसे कर लेती हैं. इतनी आसानी से कैसे हो जाता है. सच कहूँ तो मैं जल्दी-जल्दी न तो वजन बढ़ा पाती हूँ और न ही कम कर पाती हूँ. अपनी फिल्म ‘यू मीं और हम’ के बारे में बताइए. ये फ़िल्म एक लव स्टोरी है. ये फ़िल्म इसलिए बनाई है कि आज के दौर में जब तलाक़ की दर इतनी बढ़ गई है, ऐसे में कैसे शादीशुदा ज़िंदग़ी को इससे दूर रखा जाए. इसमें एक संदेश है कि कैसे इंसान ही एक समस्या को इतना बढ़ा देता है कि वो बड़ी बन जाती है लेकिन इसका उद्देश्य है कि पति-पत्नी की ग़लतफ़हमी दूर हो जाए और आखिर में वे एक दूसरे का हाथ पकड़कर बाहर निकलें. इतना तो सच है कि काजोल अगर कुछ बोलती हैं तो लगता है कि वास्तव में उसे निभा रही हैं. वाकई शानदार. मैं झूठ बोलने में यकीन नहीं रखती क्योंकि एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं. मैं जो कुछ समझती हूँ उसे उसी रूप में कहने में विश्वास रखती हूँ. |
इससे जुड़ी ख़बरें संघर्ष करके शिखर तक पहुँचे सोनू 25 नवंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस लता मंगेशकर के साथ 'एक मुलाक़ात'01 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस सुनिधि चौहान के साथ 'एक मुलाक़ात'13 अक्तूबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस अनिल कपूर के साथ 'एक मुलाक़ात' 29 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस गोविंदा के साथ 'एक मुलाक़ात'05 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस स्मृति ईरानी के साथ एक मुलाक़ात27 जनवरी, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस एक मुलाक़ात अभिनेता ओम पुरी के साथ06 अप्रैल, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||