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हर माटी में बसते गांधी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में चाहे चंपारण हो या चेन्नई - किसी भी शहर में महात्मा गांधी के नाम वाली किसी सड़क का होना, या वहाँ गांधीजी की मूर्ति का होना एक सामान्य सी बात है. लेकिन गांधी का नाम इतना बड़ा है कि भारत ही नहीं, दुनिया भर में गांधी की मूर्तियाँ, तस्वीरें, पेंटिंग्स, ग्रैफ़िटि या भित्तियाँ देखी जा सकती हैं. और दुनिया भर में फैली गांधी की ऐसी ही स्मृतियों को एक साथ संजोने का प्रयास किया गया है एक पुस्तक में जिसका शीर्षक है - महात्मा गांधी- इमेजेज़ ऐंड आइडियाज़ फ़ॉर नॉन वॉयलेंस. इसमें अमरीका, अर्जेंटीना, निकारागुआ, लंदन (ब्रिटेन), फ़िलीपींस, ब्लैक वैली (आयरलैंड), रोम, ग्रेनाडा (स्पेन), वेस्ट बैंक जैसी अनेक जगहों पर गांधी की उपस्थिति को संजोया गया है. इस विशेष संकलन का विमोचन महात्मा गांधी की 138वीं जयंती पर लंदन स्थित इंडिया हाउस यानि भारतीय उच्चायोग में किया गया. गांधीवाद और विश्व महात्मा गांधी की विश्वव्याप्त स्मृतियों को संजोने का बीड़ा उठाया लंदन में बसे भारतीय पत्रकार विजय राणा ने और उनके अनुसार पुस्तक ये दिखाती है कि गांधीजी की तस्वीरें और विचार कैसे पूरी दुनिया में शांति, अहिंसा और सर्वधर्म समभाव को आगे बढ़ा रहे हैं. विजय राणा ने बताया कि इस पुस्तक में संकलित 75 तस्वीरों को जुटाने में तीन साल लगे और दुनिया के अलग-अलग देशों से ऐसे कई फ़ोटोग्राफ़रों ने उन्हें तस्वीरें भेजीं जो पेशेवर फ़ोटोग्राफ़र नहीं थे लेकिन जिनकी गांधी के विचारों में आस्था थी. विजय राणा ने बताया,"दुनिया के हर बड़े शहर के मध्य में गांधी की मूर्ति है, हर बड़े शहर में दीवारों पर ग्राफ़िटी बनानेवाले कलाकारों का सबसे लोकप्रिय विषय गांधी है. अमरीका में इराक़ य़ुद्ध विरोधी प्रदर्शनों में गांधी की तस्वीरें हमेशा आगे रहती हैं". "मैंने देखा कि आज दुनिया मे जितने भी देश हैं, लोग हैं, जो शांति में, अहिंसा में, सर्वधर्म समभाव में, सामाजिक न्याय में विश्वास रखते हैं, गांधी उनकी प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं और इसी बात को मैं इस पुस्तक के माध्यम से सामने लाना चाह रहा था". गांधी और चे गुएवेरा संकलन में शिकागों में एक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथ में लिए गए एक ऐसे पोस्टर की भी तस्वीर है जिसमें गांधी और चे गुएवेरा की तस्वीरें साथ हैं.
यानी एक महानायक ऐसा जिसने बिना खड़्ग-बिना ढाल इतिहास को बदला तो एक ऐसा जिसने रक्तरंजित क्रांति को बदलाव का हथियार बनाया. बिल्कुल विपरीत विचारधाराओं वाले नायकों को एक साथ खड़ा करने की कोशिश करनेवाले इस चित्र के बारे में विजय राणा कहते हैं,"हो सकता है कि गांधी होते तो वे भी चे गुएवेरा के पास खड़े होकर असहज महसूस करते, लेकिन लोगों की भावना देखिए, उनके लिए गांधी और गुएवेरा दोनों क्रांतिकारी थे, दोनों ने साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी थी". सोवियत संघ और गांधी समकालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गांधीवाद के प्रभाव के असर का एक उदाहरण देते हुए लंदन में भारत के उप-उच्चायुक्त अशोक मुखर्जी ने 1991 में सोवियत संघ के विघटन के समय का एक उदाहरण गिनाया. उस समय मॉस्को में नियुक्त मुखर्जी ने बताया कि सोवियत संघ के टूटने के बाद सबसे अधिक चिंता इस बात को लेकर थी कि विघटित देश आपस में कैसे समन्वय रखेंगे. उन्होंने कहा कि तब मध्य एशिया के कुछ चिंतकों ने कहा कि जैसे भारत की स्वाधीनता के समय गांधी ने भाईचारे का सिद्धांत अपनाया था, वही रास्ता चुनना चाहिए. अशोक मुखर्जी ने कहा,"आज 15 वर्ष के बाद अगर आप देखें, तो एक छोटे देश को छोड़कर सभी पूर्व सोवियत राष्ट्रों का सविकास बड़े ही अहिंसक और सहयोगपूर्ण तरीक़े से हुआ ". वेबसाइट एनआरआई डॉटकॉम द्रारा प्रकाशित किया गया गांधी के चित्रों पर आधारित ये संग्रह ऐसे लोगों को निश्चित रूप से एक सुखद अहसास दिला सकता है जो चाहे किसी भी देश में बसते हों, चाहे कोई भी भाषा बोलते हों, लेकिन एक शब्द का मतलब जो ज़रूर जानते हैं – केवल एक शब्द - गांधी. |
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