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मंगलवार, 17 अप्रैल, 2007 को 04:53 GMT तक के समाचार
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लंदन के मंच पर गांधी का सत्याग्रह

सत्याग्रह ओपेरा
दक्षिण अफ़्रीका में महात्मा गांधी के संघर्ष की कहानी कही गई है सत्याग्रह ओपेरा में
बेहद महँगी टिकटों के बावजूद खचाखच भरा लंदन का प्रख्यात कोलिसियम थिएटर..मंच पर दिखता है..दक्षिण अफ़्रीका का पीटरमारित्ज़बर्ग रेलवे स्टेशन..टाई-सूट पहने 24 साल का एक युवक प्लेटफ़ार्म पर औंधे मुँह गिरा है..सूटकेस बिखरा पड़ा है..

ये युवक है - गांधी - वो महानायक जिसने बिना गोली-तीर-तलवार के ताक़त की परिभाषा को बदल दिया..उसके अस्त्र थे..अहिंसा..सत्याग्रह..

इंग्लिश नेशनल ओपेरा की प्रस्तुति सत्याग्रह एक साधारण मानव के महामानव बनने की कहानी है.

दक्षिण अफ़्रीका में गांधी के संघर्ष पर आधारित इस ओपेरा को तैयार किया है जाने-माने अमरीकी संगीतकार फ़िलिप ग्लास ने.

ग्लास ने ऐसे तो कई ओपेरा बनाए, हॉलीवुड की कई फ़िल्मों में संगीत दिया, ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नामांकन की दौड़ तक भी पहुँचे, लेकिन तीन महान हस्तियों पर बनाए उनके ओपेरा ख़ासे चर्चित रहे.

विज्ञान पर केंद्रित उनके ओपेरा के नायक थे वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन, धर्म पर आधारित ओपेरा के नायक थे मिस्र के फ़राओ या शासक अख़नातेन और राजनीति पर आधारित ओपेरा के नायक बने महात्मा गांधी.

रचना

 भारत में ही मुझे गांधी के सत्याग्रह के बारे में कुछ करने का ख़याल आया और मैं उन लोगों से मिला जो गांधी को समझते थे
फ़िलिप ग्लास, संगीतकार

सत्याग्रह ओपेरा को रचा गया 70 के दशक के उत्तरार्ध में.पहली हार इसे प्रस्तुत किया गया हॉलैंड के रोटरडम शहर में 1980 में.

गांधी के सत्याग्रह पर ओपेरा बनाने का ख़याल फ़िलिप ग्लास के मन में आया प्रख्यात भारतीय संगीतकार पंडित रविशंकर के साथ काम करते समय.

ग्लास कहते हैं,"मैं 60 के दशक में पंडित रविशंकर के साथ काम करता था, हम भारतीय संगीत के लय में ताल की व्यवस्था को समझ रहे थे. भारत में ही मुझे गांधी के सत्याग्रह के बारे में कुछ करने का ख़याल आया और मैं उन लोगों से मिला जो गांधी को समझते थे."

"मैं गांधी के पुस्तकालय में गया और वहाँ मुझे पता लगा कि गांधी असल में क्या थे.मैं जब छोटा था तो उनके बारे में सुनता था, फिर जब उनकी हत्या हुई तो भी मुझे उनके बारे में पता चला, लेकिन गांधी को समझा मैंने तब जब 60 के दशक के अंत में मैं कई बार भारत गया."

भूत-भविष्य-वर्तमान

सत्याग्रह ओपेरा
सत्याग्रह में लियो टोलस्टॉय, रवींद्रनाथ टैगोर और मार्टिन लूथर किंग जूनियर दिखते हैं

सत्याग्रह ओपेरा में तीन ऐक्ट या अंक हैं.पहले में महान रूसी साहित्यकार लियो टॉलस्टॉय, दूसरे में गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर और तीसरे में अमरीका में काले लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़नेवाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर दिखते हैं.

पहला हिस्सा सत्याग्रह को अतीत, दूसरा वर्तमान और तीसरा भविष्य से जोड़कर दिखाता है.

ओपेरा के आरंभ में दिखाया जाता है कि गांधी की प्रेरणा और शक्ति का स्रोत क्या था.

गांधी के बारे में विशेष अध्ययन कर रहे बीबीसी हिंदी सेवा के पुराने सहयोगी विजय राणा कहते हैं,"ओपेरा के पहले दृश्य में दिखता है कि कृष्ण अर्जुन को गीता का उपदेश दे रहे हैं. अगले ही दृश्य में इतिहास की एक लंबी छलांग लगाकर ये ओपेरा दक्षिण अफ्रीका में टोलस्टॉय फ़ार्म पहुँच जाता है जहाँ गांधी अपने अनुयायियों को एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार कर रहे हैं".

विजय राणा कहते हैं,"फ़िलिप ग्लास ने कल्पना की इस उड़ान के सहारे ये दिखाया है कि जैसे कृष्ण ने युद्धभूमि में अर्जुन को युद्ध के लिए तैयार किया, वैसे ही गांधी ने गीता के सहारे अपने अनुयायियों को संघर्ष के लिए तैयार किया."

संस्कृत ओपेरा

गीता के श्लोकों पर आधारित सत्याग्रह ऐसा पहला ओपेरा है जिसमें संस्कृत भाषा का प्रयोग किया गया है.

हालाँकि गीता के श्लोक गाते कलाकारों की भाषा बिल्कुल समझ में नहीं आती और मंच पर नज़र आते अंग्रेज़ी अनुवाद से सहायता मिलती है.

इस बारे में विजय राणा कहते हैं,"संस्कृत के उच्चारण को लेकर छीछालेदर ज़रूर हुई है लेकिन यहाँ ये भी है कि हमें अंग्रेज़ों से शुद्ध संस्कृत के पाठ की उम्मीद भी नहीं थी".

गांधी की भूमिका निभानेवाले कलाकार एलन ओक ने बताया कि उन्हें संस्कृत याद करने में मुश्किल हुई क्योंकि ये उनकी अपनी भाषा नहीं थी, लेकिन इसके बाद भी छह महीने के कठिन श्रम के बाद वो इन श्लोकों को याद कर सके.

संदेश

फ़िलिप ग्लास
फ़िलिप ग्लास कहते हैं कि उन्होंने गांधी को 60 के दशक में अपनी भारत यात्राओं के समय समझा

सत्याग्रह की पहली प्रस्तुति 1980 में हुई थी. 27 साल बाद ये ओपेरा दोबारा प्रस्तुत किया जा रहा है. और फ़िलिप ग्लास को लगता है कि सत्याग्रह का संदेश आज के दौर में ख़ासा महत्वपूर्ण है.

ग्लास कहते हैं,"70 के दशक में मुझे लगता था दुनिया में हिंसा इतनी बढ़ गई है, हालाँकि तब मैं नहीं जानता था कि 30 साल बाद स्थिति बहुत अधिक ख़राब हो जाएगी. लेकिन तब सत्तर के दशक में हम सोचते थे कि इस बारे में बात-विचार करना चाहिए, हमें समाज में अहिंसा के बलबूते बदलाव लाना चाहिए..यही तो गांधी का संदेश था.यही तो सत्याग्रह का मतलब है - सत्य की शक्ति."

लंदन में केवल नौ प्रस्तुतियों के बाद सत्याग्रह अगले साल अमरीका में न्यूयॉर्क में प्रदर्शित किया जाएगा.

इस वर्ष भारत की स्वाधीनता की 60वीं वर्षगांठ है और अगले साल महात्मा गांधी की 60वीं पुण्यतिथि होगी.

ऐसे अवसर में सत्याग्रह का मंचन गांधी के लिए एक ईमानदार श्रद्धांजलि है और गांधी का अर्थ भूलते समय के लिए एक ईमानदार संदेश भी.

वो गांधी जिसने कहा था कि आँख के बदले आँख लेने से दुनिया अंधी हो जाएगी.

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