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ऐसे खोजा महात्मा गांधी ने 'सत्याग्रह' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हम सत्याग्रह आंदोलन की 100वीं वर्षगांठ मना रहे हैं पर क्या हमें यह मालूम है कि गांधी जी ने इस 'सत्याग्रह' शब्द को अपने आंदोलन की संज्ञा के तौर पर कैसे चुना. आइए जानते हैं, महात्मा गांधी की डायरी से इस शब्द को चुनने की कहानी, गांधी जी की ही कलम से- "हम में से किसी को भी ज्ञात नहीं था कि हम अपने आंदोलन को क्या नाम दें. मैंने तब इसके लिए अंग्रेज़ी नाम 'पैसिव रेजिस्टेंस' का प्रयोग किया परन्तु यह मुझे ठीक से पता नहीं था कि 'पैसिव रेजिस्टेंस' का क्या प्रभाव पड़ेगा. मैं केवल यह जानता था कि एक नए सिद्धांत ने जन्म लिया है. संघर्ष जैसे-जैसे आगे बढ़ा, 'पैसिव रेजिस्टेंस' शब्द ने उलझन पैदा कर दी और लज्जाजनक लगने लगा कि इस महान संघर्ष को केवल एक अंग्रेज़ी नाम से जाना जाए और फिर उस विदेशी शब्द का समाज में प्रचलन कठिन लग रहा था. अतः हमारे संघर्ष के लिए सर्वश्रेष्ठ नाम सुझाने के लिए 'इंडियन ओपिनियन' में एक छोटे पुरस्कार की घोषणा की गई. हमें कई सुझाव मिले. तब तक हमारे संघर्ष के विषय में 'इंडियन ओपिनियन' में विस्तृत चर्चा हो चुकी थी और पुरस्कार के प्रतियोगियों के समक्ष अपनी राय बनाने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध हो चुकी थी. श्री मगनलाल गांधी एक प्रतियोगी थे और उन्होंने 'सदाग्रह' शब्द सुझाया जिसका अर्थ था- अच्छे कार्य के लिये दृढ़ता. मुझे यह शब्द पसंद आया परन्तु यह मेरे परिकल्पित समग्र भाव की अभिव्यक्ति नहीं करता था इसलिए मैंने इसे सुधार कर 'सत्याग्रह' कर दिया. 'सत्य' में प्रेम और 'आग्रह' निहित है और इसलिए शक्ति का पर्यायवाची है. अतः मैंने भारतीय आंदोलन को 'सत्याग्रह' कहना आरंभ कर दिया अर्थात् वह शक्ति जिसका उद्भव सत्य और प्रेम से या अहिंसा से होता है. 'पैसिव रेजिस्टेंस' तब बंद कर दिया गया. यहाँ तक कि अंग्रेजी लेखन में भी 'सत्याग्रह' अथवा समकक्ष शब्द का प्रयोग किया जाने लगा.सत्याग्रह शब्द ही हमारे आन्दोलन की भावना को व्यक्त करने लगा और इसका नाम बन गया." मोहनदास करमचंद गांधी, दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह पर (साभार- गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, दिल्ली) | इससे जुड़ी ख़बरें 'सत्याग्रह' को हुए सौ साल पूरे11 सितंबर, 2006 | पत्रिका सत्याग्रह की सार्थकता पर विचार11 सितंबर, 2006 | पत्रिका अंतरराष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार शबाना को 09 सितंबर, 2006 | पत्रिका गांधी-नायडू के पत्र व्यवहार पर नाटक 17 अगस्त, 2005 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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