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'एकलव्य' पर फ़ेडरेशन से जवाब तलब | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्कर की सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्म श्रेणी के पुरस्कार के लिए भारत की ओर से 'एकलव्य' को चुने जाने का मामला अब अदालत में पहुँच चुका है. फ़िल्म 'धर्म' की निर्देशक भावना तलवार की ओर से 'एकलव्य' के चयन किए जाने को बम्बई हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. अदालत ने फ़िल्म फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया यानी एफ़एफ़आई और दूसरे पक्षकारों से जवाब तलब किया है. ग़ौरतलब है कि ऑस्कर के लिए भारत की ओर से आधिकारिक प्रविष्टि भेजने का काम फ़िल्म फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया करती है और इसका चयन एक निर्णायक मंडल करता है. भावना तलवार की ओर से शुक्रवार को अदालत में दायर याचिका में कहा गया, ''धर्म को समीक्षकों ने काफ़ी सराहा था और कई फ़िल्म समारोहों में इसका प्रदर्शन भी हुआ था.'' याचिका में यह भी कहा गया है कि विधु विनोद चोपड़ा की 'एकलव्य' न तो बॉक्स ऑफ़िस पर सफल रही थी और न ही समीक्षकों ने इसे सराहा था, फिर ऑस्कर के लिए इसे नामित क्यों किया गया. भावना तलवार ने निर्णायक मंडल के 11 सदस्यों में कुछ सदस्यों पर विधु विनोद चोपड़ा का क़रीबी होने का आरोप भी लगाया है. शनिवार को बम्बई हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार और न्यायमूर्ति धनंजय चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने भावना तलवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ''प्रथम दृष्टया 'एकलव्य' का चयन पक्षपातपूर्ण लगता है.'' अदालत ने फ़िल्म फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया और दूसरे पक्षकारों से इस मामले में 10 अक्तूबर तक जवाब दाख़िल करने को कहा है. |
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