|
परिणीता के बाद एक लंबी लाइन है | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'परिणीता' से चर्चा में आई विद्या बालन ने फ़िल्मकार विधुविनोद चोपड़ा को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी अगली फ़िल्म के लिए उन्हें झटपट साइन कर लिया. 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' की अगली कड़ी के रूप में बनने वाली इस फ़िल्म के अलावा विद्या विधु की एक और फ़िल्म 'एकलव्य' की भी हीरोइन होंगी. इस फ़िल्म में एक बार फिर सैफ़ अली ख़ान उनके हीरो हैं और साथ ही अमिताभ बच्चन भी एक अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं. हिंदी फ़िल्मों के अलावा विद्या दक्षिण की दो फ़िल्मों में भी क़िस्मत आज़मा रही हैं. इसके अलावा वह ऋतोपर्णो घोष की अगली बांग्ला फ़िल्म की भी हीरोइन हैं. और बस इतना ही नहीं, हिंदी की 'लंडन समर' में भी दर्शक उन्हें ही मुख्य भूमिका में देखेंगे. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * अनुपम का एक और सशक्त रोल हाल ही में रिलीज़ हुई फ़िल्म 'मैंने गाँधी को नहीं मारा' में एक बार फिर अनुपम खेर ने अपने 'सारांश' के रोल की याद ताज़ा करा दी.
इस तरह की भूमिकाएँ किसी भी अच्छे अभिनेता का स्वप्न होती हैं जिसमें उन्हें कुछ अलग ही कर दिखाने का मौक़ा मिले और इस फ़िल्म ने अनुपम को इस बात का भरपूर अवसर दिया. फ़िल्म में अनुपम एक ऐसे मानसिक रोगी की भूमिका निभा रहे हैं जिसे हर कोई अपना दुश्मन नज़र आता है और जिसके दिमाग़ में यह बैठ गया है कि वह महात्मा गाँधी का हत्यारा है. अनुपम के अभिनय के कमाल के साथ यहाँ उर्मिला माटोंडकर की बात करना भी ज़रूरी है जिन्होंने अनुपम खेर की बेटी का रोल अदा किया है. उर्मिला ने 'भूत' और 'एक हसीना थी' जैसी फ़िल्मों के बाद एक बार फिर साबित कर दिया है कि एक ख़ास तरह की भूमिकाएँ निभाने में उन्हें पूरी महारत हासिल है. फ़िल्म का निर्देशन कई बार पुरस्कार जीत चुके जाहनू बरुआ ने किया है और संजय चौहान ने इसकी पटकथा लिखी है. फ़िल्म में वहीदा रहमान, प्रेम चोपड़ा और बोमन ईरानी अन्य प्रमुख किरदार निभा रहे हैं. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आपको पाकिस्तानी अभिनेत्री मीरा याद हैं?
कुछ हिंदी फ़िल्मों में उनके गर्मागर्म दृश्यों को लेकर पाकिस्तानी मीडिया ने काफ़ी हायतौबा मचाई थी और मीरा को अपने देश में भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. अब उन्हीं मीरा ने एक नया बयान दे कर सबको तो चौंका दिया है लेकिन समझा जा रहा है कि पाकिस्तान के सांस्कृतिक मंत्रालय को यह एक सुखद आश्चर्य महसूस हुआ है. मीरा का कहना है कि भारतीय फ़िल्मों को पाकिस्तान में प्रदर्शित किए जाने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि वे पाकिस्तान की संस्कृति के विरुद्ध हैं. मीरा का कहना है कि एक समय ऐसा था जब वह स्वंय को भारत-पाकिस्तान मैत्री का दूत कहा करती थीं लेकिन अब ऐसा नहीं है. आपको याद होगा कि मीरा की नई हिंदी फ़िल्म 'कसक' अभी हाल ही में रिलीज़ हुई है. इससे पहले वह एक और हिंदी फ़िल्म में काम कर चुकी हैं. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||