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शुक्रवार, 29 जुलाई, 2005 को 16:02 GMT तक के समाचार
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टूटीफूटी बांग्ला बोलेंगी महिमा
महिमा चौधरी
हिंदी फ़िल्मों के सितारों का अगला पड़ाव या तो हॉलीवुड होता है और या फिर बंगाल.

हॉलीवुड उन्हें पैसा और शोहरत दोनों दिलाता है तो बंगाली फ़िल्मों में उनके अंदर का कलाकार बाहर लाया जाता है और उनकी अभिनय क्षमता पूरी तरह खुलती है.

महिमा चौधरी को भी शायद ऐसे ही कुछ बदलाव की ज़रूरत थी और उन्होंने बांग्ला फ़िल्मकार कौशिक गांगुली की अगली फ़िल्म 'सर' साइन कर ली.

फ़िल्म में महिमा के हीरो हैं प्रसन्नजीत चटर्जी.

'सर' में महिमा एक ऐसी युवती का रोल कर रही हैं जो बंगाली नहीं है और इसीलिए उन्हें टूटीफूटी बांग्ला बोलने को कहा गया है.

यह और बात है कि महिमा के बचपन का एक बड़ा हिस्सा दार्जिलिंग के एक स्कूल में गुज़रा है और वह फ़र्राटे से बांग्ला बोलती हैं.

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नंबर वन की दौड़ से अभी पीछे

आफ़ताब शिवदसानी उन अभिनेताओं में से है जिन्हें दूसरी पंक्ति का कलाकार माना जा सकता है.

आफ़ताब शिवदासानी

लेकिन उनकी अभिनय क्षमता से प्रभावित लोगों का कहना है कि आफ़ताब को बस एक ऐसी फ़िल्म की दरकार है जो उन्हें निखरने का और ख़ुद को साबित करने का मौक़ा दे दे.

आने वाली फ़िल्म 'जाने होगा क्या' शायद ऐसी ही एक फ़िल्म साबित हो.

फ़िल्म एक विज्ञान थ्रिलर है जिसमें आफ़ताब एक वैज्ञानिक हैं जो अपनी ही तरह का एक क्लोन तैयार करता है और फिर दुनिया को नष्ट करने की योजना बनाता है.

फ़िल्म की दो हीरोइनें हैं बिपाशा बसु और प्रीति झांगियानी.

फ़िल्म के निर्माता आलोक श्रीवास्तव कुछ दिन पहले एक मुक़दमे के चक्कर में फंस चुके हैं लेकिन समझा जा रहा है कि फ़िल्म समय पर ही रिलीज़ हो जाएगी.

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उम्मीद नहीं थी!

सैफ़ अली ख़ान 'हमतुम' के बाद अब तक तारीफ़ों के आदी हो चुके हैं और साथ ही पुरस्कारों के भी.

हमतुम

लेकिन राष्ट्रीय पुरस्कार उनकी उम्मीदों से कहीं परे था.

सैफ़ का कहना है, "वैसे तो हर सम्मान ख़ुशी देता है लेकिन यह तो मेरी अपेक्षाओं से कहीं बढ़ कर है. इसकी तो मुझे उम्मीद ही नहीं थी".

सैफ़ को सबसे ज़्यादा ख़ुशी इस बात की है कि उन्होंने एक अच्छे अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान बना ली है और आज उनके माता-पिता को उन पर नाज़ है.

उनकी हाल की कई फ़िल्में दर्शकों ने हाथोंहाथ लीं और 'परिणीता' को तो दर्शकों और समीक्षकों दोनों का प्यार मिला.

सैफ़ भी अपनी इस फ़िल्म से बहुत संतुष्ट हैं. वह कहते हैं, "शायद ऐसा पहली बार है कि इस चरित्र को मैंने बिलकुल अपने जैसा पाया".

66क का एक और कमाल
करण जौहर की नई फ़िल्म 'कभी अलविदा न कहना' में कई बड़े सितारे हैं.
66'मेरी पहचान बदली है'
मल्लिका शेरावत का दावा है कि दर्शक उन्हें गंभीरता से लेने लगे हैं.
66करीना चाइना टाउन में
करीना कपूर सुभाष घई की यादें के बाद अब 36, चाइना टाउन की हीरोइन हैं.
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