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कौन है असल शाहरूख़ ख़ान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शाहरूख़ ख़ान एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जो विरोधाभासों से भरे दिखते हैं. एक ओर वे विनम्र हैं तो दूसरी ओर घमंडी. एक ओर वे सपनों के सौदागर हैं तो दूसरी ओर बिल्कुल यथार्थवादी. एक ओर ऐसा जो बिल्कुल पिघल जाए तो दूसरी ओर ऐसा जो बिल्कुल ही विश्वास से भरा हो. तो आख़िर कौन हैं असली शाहरूख़ ख़ान ? इस सवाल का जवाब ढूँढने के लिए स्वयं शाहरूख़ ख़ान सहायता करने आए हैं. उन्होंने लंदन स्थित एक फ़िल्मकार नसरीन मुन्नी कबीर को अपने जीवन पर दो वृत्तचित्र बनाने की अनुमति दी है. ये वृत्तचित्र अगले महीने से डीवीडी पर देखे जा सकेंगे. आत्मकथा क्या डीवीडी बिकेंगे? शाहरूख़ ख़ान अपनी परिचित मुस्कान के साथ कहते हैं,"शाहरूख़ ख़ान बिकता है". लेकिन अगर ये जवाब आपको थोड़ा अकड़ भरा लग रहा हो तो उनका अगला जवाब आपकी दुविधा दूर कर देगा. वे कहते हैं,"देखिए अमिताभ बच्चन तथा दिलीप कुमार जैसे कलाकारों से मेरी किसी तरह की तुलना ईशनिंदा के समान है". वृत्तचित्र के विषय में वे कहते हैं,"मैं व्यक्तित्व के तौर पर अलग हूँ, अभिनेता के तौर पर अलग और स्टार के तौर पर अलग". वे कहते हैं कि पिचले चार-पाँच वर्ष से वे अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं और इस वृत्तचित्र का उद्देश्य ये बताना था कि वे अपनी असल ज़िंदगी में भी उतने ही सरल हैं जितने कि वे वृत्तचित्र में दिखते हैं. शाहरूख़ कहते हैं,"मेरा जीवन बाहर से चमक-दमक भरा लगता होगा लेकिन पर्दे से अलग मैं भी एक साधारण व्यक्ति हूँ. मैं चाहता हूँ कि लोग जानें कि सिने अभिनेता भी मध्य वर्ग की तरह की ज़िंदगी जीते हैं". पुरस्कार
शाहरूख़ ख़ान ने अभिनय में अपना करियर तो अपने शहर दिल्ली में छोटे पर्दे से शुरू किया लेकिन फिर वो फ़िल्मों में छाए और पिछले 10 से भी अधिक वर्षों से शिखर पर हैं. उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में अपना स्थान तो बनाया ही है साथ ही अनेक पुरस्कार बटोरे हैं. उनके आलोचक तो उनपर आरोप लगाते हैं कि वे पुरस्कारों के भूखे हैं. इसपर शाहरूख़ कहते हैं कि हाँ उन्हें पुरस्कार पाना अच्छा लगता है. वे कहते हैं,"मैं अपने भीतर के उस बच्चे के समान हूँ जो रेस में उतरता है तो सबसे आगे रहना चाहता है, कूदता है तो सबसे ऊँचा कूदना चाहता है, यहाँ तक कि ये कहता है कि मेरे पापा तुम्हारे पापा से लंबे हैं". धर्म और परिवार किंग ख़ान के नाम से मशहूर शाहरूख़ ख़ान पर वृत्तचित्र बनाने में निर्माता नसरीन मुन्नी कबीर को 25 दिन लगे. वे कहती हैं,"आप जब उनके साथ हों तो समय ठहर जाता है. ये वृत्तचित्र उस व्यक्तित्व के लिए समर्पित हैं जो रचनाशील है, एक शानदार इंसान है और एक सचमुच का स्टार है". मुस्लिम परिवार में जन्मे शाहरूख़ ख़ान की पत्नी गौरी हिंदू हैं और उनके दोनों बच्चे दोनों ही धर्मों का पालन करते हैं. उनके घर में हिंदू देवी-देवता भी हैं और उनके बगल में कुरान भी. शाहरूख़ के माता-पिता का देहांत काफ़ी पहले हो गया था जब वे सफलता के शिखर से दूर थे. वे कहते हैं,"मैं उनकी कमी महसूस करता हूँ, ख़ासतौर से अब जबकि मैं सफल हूँ तो चाहता हूँ कि वे साथ होते". अपने माता-पिता से बेहद लगाव रखनेवाले शाहरूख़ कहते हैं कि अपने आपको दुःख से दूर करने के लिए वे सुबह उठते हैं, मेक-अप करते हैं और किसी और का रूप धर लेते हैं. उनसे जब पूछा गया कि वे तो बॉलीवुड पर राज करते हैं लेकिन उनपर कौन राज करता है, तो उनका जवाब था,"मेरे दो बच्चे, परिवार और मेरे दोस्त. वे जो भी कहते हैं मैं करता हूँ ". और उनके चाहनेवाले? शाहरूख़ कहते हैं,"वे मेरी पेशेवर ज़िंदगी के कर्ताधर्ता हैं". |
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