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बुधवार, 22 जून, 2005 को 16:38 GMT तक के समाचार
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आत्मकथा लिख रहे हैं शाहरुख खान

शाहरुख खान
भारतीय युवतियों में ख़ासे लोकप्रिय हैं शाहरुख खान
बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान का कहना है कि किसी को भी अतीत में नहीं फंसना चाहिए और न ही बहुत आगे की सोचनी चाहिए.

साठ से भी अधिक फ़िल्मों में काम कर चुके चालीस वर्षीय शाहरुख खान आजकल अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं और लिखने का काम होता है व्यस्त शूटिंग शेड्यूलों के बीच मिलने वाले ब्रेक में.

लेकिन शाहरुख कहते हैं कि उनकी जीवनी पढ़ने वालों को किसी बहुत सुंदर और ज़बर्दस्त लेखनी की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए.

बीबीसी से बातचीत में शाहरुख ने कहा "मैं कोई बहुत बड़ा लेखक नहीं हूं. बस अपने अनुभव लिख रहा हूं."

शाहरुख कहते हैं कि लोगों को एक "प्यारी सी किताब" मिल सकती है जिसमें फ़िल्मी दुनिया में उनके अनुभवों का लेखा जोखा होगा.

 मैंने बस पीछे मुड़कर उन चीज़ों को देखने की कोशिश की है कि मैंने क्या किया है. जो इसे पढ़ेंगे उन्हें जीवन के बारे में मेरे विचार पता चलेंगे.
शाहरुख खान

वो कहते हैं "मैं बहुत पढ़ता हूं और मैंने बस पीछे मुड़कर उन चीज़ों को देखने की कोशिश की है कि मैंने क्या किया है. जो इसे पढ़ेंगे उन्हें जीवन के बारे में मेरे विचार पता चलेंगे."

जीवनी का आइडिया

शाहरुख खान
अमोल पालेकर की फ़िल्म पहेली में शाहरुख
लेकिन शाहरुख खान को आत्मकथा लिखने का ख्याल कहां से आया. इस बारे में वो कहते हैं कि 1998 में जब डुप्लीकेट फ़िल्म बन रही थी तो महेश भट्ट ने उन्हें ये सलाह दी थी.

सात साल के बाद कुछ अध्याय लिख चुके शाहरुख कहते हैं कि अब वो यह किताब प्रकाशित कराना चाहेंगे.

वो कहते हैं, "किसी फ़िल्म की तरह इसकी भी शुरुआत है, इंटरवल है और एंड है. मुंबई पहुंचने से लेकर फ़िल्मोद्योग में मिली सफलता और बच्चे होना सबकुछ इसमें रहेगा."

शाहरुख के शब्दों में यह उन घटनाओं का ब्यौरा होगा जिसने उनके जीवन पर प्रभाव डाला है और किस तरह उन्हें बदला भी है.

लेखन की प्रक्रिया

शाहरुख बताते हैं कि जब लिखने बैठे तो यादों का रेला सा आ गया. वो कहते हैं, "मैंने सालों से इन सबके बारे में सोचा भी नहीं था."

शाहरुख की आधिकारिक जीवनी मुंबई में रह रही जानी मानी फ़िल्म पत्रकार अनुपमा चोपड़ा लिख रही है.

विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभा चुके शाहरुख कहते हैं कि अब वो अपनी भूमिकाओं के बारे में बिल्कुल यथार्थवादी रवैया अपना रहे हैं.

उनका कहना है, "आपके पास असल में कितने विकल्प हैं. ये एक प्रोफेशनल काम है. मैं इंतज़ार नहीं कर सकता कि महान फ़िल्में बने और उसमें मुझे मौक़ा दिया जाए. कई बार ख़राब परिस्थितियों में अच्छी फ़िल्म बन जाती है."

अपने चाहने वालों और शाहरुख सलाह देते हैं, "मैं कभी अतीत में फंसता नहीं. आगे बढ़ता हूं. भविष्य के बारे में ज़्यादा नहीं सोचता. सपने भी नहीं देखता. अगर दिन में सपने दिखते हैं तो बस अपनी अगली फ़िल्म के, उससे अधिक नहीं."

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