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अब स्वदेस लेकर आए हैं आशुतोष | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लगान के बाद निर्देशक आशुतोष गोवारिकर एक और फ़िल्म लेकर आ रहे हैं – स्वदेस. लगान के ऑस्कर के लिए नामांकित होने और सुपरहिट होने के बाद स्वदेस से उम्मीदें काफ़ी बढ़ गई हैं. अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में काम कर रहा मोहन भार्गव भारत आता है और फिर वहीं गाँव में रहकर लोगों के साथ रम जाता है. फ़िल्म के निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा कि ये फ़िल्म ऐसे सब भारतीयों के लिए है जो विदेशों में ज़रूर जा बसे हैं लेकिन जिनका दिल आज भी बसा है भारत में, जो भारत के लिए कुछ करना चाहते हैं. आशुतोष कहते हैं, "कुछ लोग ऐसे होते हैं जो विदेश जाकर अपने देश को भूल जाते हैं, लेकिन अधिकतर भूलते नहीं हैं. ये लोग विदेश तो चले गए हैं लेकिन ये आज भी मानते हैं कि देश के लिए वो बहुत कुछ कर सकते हैं." और इस स्तर पर स्वदेस गाँव के लोगों को भी समर्पित है. लगान की कहानी थी अंग्रेज़ों और गाँव के लोगों की और स्वदेस में है अमरीका से भारत के गाँव लौटा भारतीय. शाहरुख़ क्यों लेकिन आशुतोष ने इस बार मोहन भार्गव की मुख्य भूमिका के लिए आमिर ख़ान की जगह शाहरुख़ ख़ान को लेना पसंद किया. क्यों? आशुतोष गोवारिकर कहते हैं, "शाहरुख़ ने अब तक अलग-अलग तरह के रोल किए हैं. जैसे बाज़ीगर में उन्होंने शिल्पा शेट्टी को छत से नीचे फेंक दिया. डर में उन्होंने एक अलग किरदार निभाया है." आशुतोष ने बताया कि कुछ उसी तरह का हीरो वे मोहन भार्गव की भूमिका के लिए ढूँढ रहे थे जिसमें लोग समझ ही न सकें कि ये हीरो आगे क्या कर सकता है. उन्होंने बताया कि आमिर की छवि लगान के बाद इतनी बड़ी हो गई है कि वो शायद मोहन भार्गव पर बहुत भारी पड़ जाते. इस फ़िल्म में पहली बार काम कर रहीं हैं मॉडल गायत्री जोशी जो फ़िल्म की हीरोइन हैं. आशुतोष का कहना है कि उनको पास या फ़ेल करने का काम दर्शकों का है. परीक्षा चूंकि लगान को देश-विदेश में बसे भारतीयों ही नहीं, दूसरे देशों के कई दर्शकों ने भी देखा था इसीलिए स्वेदस दुनिया भर में एक साथ रिलीज़ की जा रही है.
फ़िल्म के प्रचार-प्रसार से जुड़े अशोका होला ने बताया कि 226 प्रिंट के साथ पूरी दुनिया में ये फ़िल्म एक साथ रिलीज़ की जा रही है. होला ने बताया, "अमरीका और ब्रिटेन में तो कई भारतीय दर्शक हैं ही लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि इनके सहित दूसरे देशों में अन्य भाषाएँ बोलने वाले लोग भी फ़िल्म को देखें. इसीलिए जनवरी में फ़्राँसीसी और जर्मन भाषाओं के सब टाइटल के साथ फ़िल्म अलग से भी रिलीज़ की जाएगी." लगान ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नामांकित हुई थी – क्या आशुतोष को स्वदेस से भी यही उम्मीद है? आशुतोष कहते है, "नहीं, मैं अभी पुरस्कारों के बारे में नहीं सोच रहा हूँ. मेरी चिंता है कि दर्शकों को ये फ़िल्म पसंद आती है या नहीं. अगर दर्शक स्वदेस को पसंद करें और फिर पुरस्कार भी मिल जाए तो सोने पर सुहागा है. पर पहला ऑस्कर दर्शक देंगे.” देखें जनता के दरबार में स्वदेस कितना कमाल कर पाती है. |
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