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अमरीका में रामायण का अनोखा मंचन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत से हज़ारों मील दूर अमरीका में भी कभी-कभी भारतीय संस्कृति के कई नमूने देखने को मिल जाते हैं - उनमें से एक है रामलीला. भारत में तो दशहरे से पहले हर गली और मोहल्ले में रामलीला खेली जाती है लेकिन अमरीका में अगर रामलीला का मंचन किया जाए और वह भी आधुनिक साज़ो सामान के साथ तो वह एक अनोखा नज़ारा होता है. हाल में न्यूयॉर्क के लिंकन सेंटर में लोगों को मर्यादा पुरुषोत्तम राम के वनवास की कहानी का एक आधुनिक रूप देखने का मौक़ा मिला. जापानी, अमरीकी कलाकार रामायण को एक नृत्य नाटक के रूप में पेश करने वालों में सिर्फ़ भारतीय कलाकार ही नहीं बल्कि अमरीकी, जापानी और बांग्लदेशी कलाकार भी शामिल थे. मशहूर लिंकन सेंटर में आकेस्ट्रा का बैंड, जिसमे पियानो, गिटार, बांसुरी और तबला हारमोनियम सभी शामिल थे, अपनी धुनें बजा रहा था. और भरतनाट्यम के संगीत और नृत्य के मिश्रण के साथ सारे कलाकार एक अदभुत तालमेल का प्रदर्शन कर रहे थे. इन सबने रामायण का एक अनोखे अंदाज़ में मंचन किया. जैज़ संगीत रामलीला के इस आधुनिक प्रदर्शन में एक अमरीकी जैज़ संगीतकार जुलियन वेलार्ड ने संगीत भी दिया और रामायण पर आधारित अपनी कविता का भी पियानो बजाते हुए, नाटक के दौरान गायन किया. इस नए अनुभव के बारे में वेलार्ड का कहना था, "शुरू में तो मैं काफ़ी व्याकुल था क्योंकि मैं तो क्लबों में जैज़ और रॉक गाने का संगीतकार रहा हूँ." उनका कहना था, "जब मैने देखा कि किस तरह भरतनाट्यम के ज़रिए कहानी बताई जाती है मुझे लगा कि मैं भी तो इसी तरह अपने संगीत के ज़रिए कहानी बयान करता हूँ. फिर तालमेल बिठाने में मुशकिल नहीं हुई और ये एक सुखद अनुभव था." जापानी नृत्य का मिश्रण एक और विदेशी कलाकार जापान की कियोको काशीवागी भी रामायण के इस नाट्य नृत्य में शामिल हुईं. ये जापान का मशहूर अनीमे नृत्य करने में माहिर हैं. उन्होंने इस नाटक में रानी केकैई, रावण और हनुमान समेत कुल पांच पात्रों को एक अनोखे अंदाज़ में पेश किया. कियोको का कहना था, "मुझे तो बहुत मज़ा आया क्योंकि जापान में रामायण काफ़ी चर्चित है और मैं भी इसके बारे में जानती थी. खासकर भरतनाट्यम के साथ अनीमे नृत्य का मिश्रण करने का ये एक अनोखा अनुभव था." इस नृत्य-नाटक की निदेशिका सुधा सीतारामण ने सीता के चरित्र को बख़ूबी निभाया. उन्होने भरतनाट्यम जैसे शासत्रीय नृत्य का आर्केस्ट्रा की धुनों पर बेहद खूबसूरती के साथ प्रदर्शन किया. भारत में रहते हुए इस नृत्य को सीखने के बाद सुधा नृत्य पर पीएचडी करने अमरीका आ गई थीं. उनका कहना था,"मैं अमरीकी लोगों के सामने उन्ही की भाषा में रामायण का मंचन करना चाहती थी और अमरीकी संगीत पर भरतनाट्यम के ज़रिए इसका प्रदर्शन करना तो अदभुत अनुभव बन गया. इस पूरे नाट्य-नृत्य को तैयार करने में हमें दो साल लगे." इसमें उनका साथ दिया बांग्लदेशी मूल की हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार और गायिका मरीना अहमद आलम ने. मरीना ने पंडित जसराज से संगीत की शिक्षा पाई है. भरतनाट्यम के साथ आर्केस्ट्रा की धुनों का ख़्याल रखते हुए मरीना ने नाटक में हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन का भी बेहतरीन मिश्रण किया. क़रीब दो घंटे लंबे इस नाटक के दौरान स्टेज पर लगी एक स्क्रीन पर रामायण के दृश्यों से जुड़े फिल्माए गए चित्रों को भी दिखाया जा रहा था. साथ ही विभिन्न दृश्यों में विशेष लाईटिंग का भी इसतेमाल किया जा रहा था. इस नाटक को देखने आए लोगों में ज़्यादातर ग़ैर-भारतीय थे. उनकी रुचि का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि तीन दिन चलने वाले इस नाटक के सारे शोज़ के टिकेट पहले ही बिक चुके थे. इस नाटक का आयोजन न्यूयार्क स्थित एक भारतीय संस्था त्रिलोक फ़्यूजन ने किया. इस नाटक के प्रोड्यूसर आनंद कमलाकर कहते हैं,"अमरीका में इस तरह के नाटकों के ज़रिए विभिन्न देशों की कला, संस्कृति और प्रतिभाओं को एक छत के नीचे लाने का और विभिन्न कलाओं का मिश्रण कर नए अनुभव पाने का मौका मिलता है." |
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