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रामलीला को लेकर दिल्ली में हो रहा है महाभारत
भारत की राजधानी दिल्ली में जहाँ लगभग 500 रामलीलाएँ हो रही हैं, वहीं जाने-माने रामलीला मैदान में दो आयोजन समितियों के बीच महाभारत चल रहा है. दिल्ली में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण रामलीला समितियों की इस महाभारत ने भी राजनीतिक रंग ले लिया है. दोनों समितियों के समर्थकों में प्रमुख राजनीतिक दल काँग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कुछ कार्यकर्ता भी हैं. एक ओर इन समितियों के सदस्य मंच पर राम, लक्ष्मण और दशरथ की भूमिकाएँ निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे आरोप-प्रत्यारोप और धरना-जुलूस में भी भाग ले रहे हैं.
'लव-कुश रामलीला समिति' कई साल से लालकिला मैदान में रामलीला करती आई है. इस साल लालकिला मैदान को संवारने के काम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लगा हुआ है इसलिए लव-कुश समिति वहाँ रामलीला नहीं कर सकती. एक म्यान में दो तलवारें विवाद तब शुरु हुआ जब लव-कुश रामलीला समिति को भी रामलीला मैदान में मंचन की अनुमति दे दी गई. वहाँ कई साल से रामलीला करती आई 'रामलीला समिति' ने इसका विरोध किया. पूर्व काँग्रेस सांसद जयप्रकाश अग्रवाल रामलीला समिति को सही मानते हैं.
वे आरोप लगाते हैं, "लव-कुश रामलीला समिति में सभी लोग भारतीय जनता पार्टी के समर्थक हैं और रामलीला के नाम पर राजनीति कर रहे हैं." लव-कुश रामलीला समिति के कलाकारों के हाल ही में दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना दिया और काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिलकर उनकी पार्टी के लोगों के 'ग़लत रवैए' की शिकायत की. उन्होंने आरोप लगाया, "लव-कुश समिति अपने मकसद के लिए रामचंद्र जी की भूमिका निभा रहे कलाकार को सड़कों पर उतारकर पुलिस से गिरफ़्तार करवा रही है." उनका कहना था कि एक ओर तो अयोध्या में राममंदिर की बात हो रही है और दूसरी ओर रामलीलाओं को उजाड़ा जा रहा है. चुनावी मुद्दा? दूसरी ओर, लव-कुश समिति के सचिव अर्जुन कुमार इन आरोपों का खंडन करते हैं.
वे कहते हैं, "रामलीला को चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है. काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को खुश करने के लिए और पार्टी टिकट पाने के लिए जयप्रकाश अग्रवाल गंदी राजनीति कर रहे हैं." अर्जुन कुमार ने कहा कि आपस में बैठकर मामला सुलझ सकता है लेकिन धर्म के नाम पर राजनीति की जा रही है. ऐसा लगता है कि विवाद दो रामलीला समितियों के बीच नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की लड़ाई बनता जा रहा है. लेकिन रामलीला का आनंद उठाने वाले आम लोग क्या कहते हैं? दरियागंज निवासी भूषण कुमार कहते हैं, "आम आदमी को इस राजनीति से कोई वास्ता नहीं. हम तो पहले भी आते थे अब भी आते हैं. इधर देखें या उधर, रामकथा तो एक ही है." |
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