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शुक्रवार, 20 अप्रैल, 2007 को 08:25 GMT तक के समाचार
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ताक़तवर कौन?
चित्रांकनः हरीश परगनिहा
चित्रांकनः हरीश परगनिहा

लोककथा

सर्दियों का मौसम था. चारों तरफ पहाड़ों पर बर्फ़ ही बर्फ़ जमी हुई थी. एक छोटा सा पहाड़ी लड़का पहाड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था. चिकनी बर्फ़ की वजह से वह बार-बार फिसल कर नीचे गिर रहा था.

उसने बर्फ़ से पूछा, ‘‘बर्फ़, बर्फ़! बोलो ताक़तवर कौन?’’

बर्फ़ बोली, ‘‘मैं ताक़तवर हूँ. मैंने तुम्हें फिसला कर नीचे गिरा दिया.’’

लड़का हँसने लगा और कहने लगा, ‘‘अच्छा अगर तुम सचमुच ताक़तवर हो तो सूरज तुम्हें पिघला क्यों देता है?’’

बर्फ़ बोली ‘‘यह बात सही है. तो फिर सूरज ताक़तवर हुआ न कि मैं.’’

लड़का सूरज को देखकर बोला, ‘‘सूरज-सूरज बोलो ताक़तवर कौन?’’

सूरज ने जवाब दिया, ‘‘मैं ही ताक़तवर हूँ. मैं बर्फ़ को पिघला देता हूँ. बोलो सच है या नहीं.’’

छोटा लड़का हँसकर बोला, ‘‘अच्छा अगर तुम इतने ही ताक़तवर हो तो बादलों के सामने तुम इतने मजबूर क्यों हो जो तुम्हें अपने अंदर छुपा लेते हैं.’’

सूरज ने जवाब दिया, ‘‘हाँ ठीक है इस तरह भी बादल ताक़तवर हुए न कि मैं.’’

छोटे लड़के ने बादलों को देखकर पूछा, ‘‘बादल-बादल! ताक़तवर कौन है?’’

बादल ने जवाब दिया, ‘‘मैं ताक़तवर हूँ. मैं सूरज को ढक लेता हूँ. है न सही बात.’’

लड़के ने फिर पूछा, ‘‘अगर तुम इतने ही ताक़तवर हो तो हवा तुम्हें उड़ाकर क्यों ले जाती है?’’

बादल ने जवाब दिया, ‘‘ठीक है. इस तरह हवा ताक़तवर है.’’

छोटे लड़के ने हवा से पूछा, ‘‘हवा-हवा! ताक़तवर कौन?’’

चित्रांकनः हरीश परगनिहा
चित्रांकनः हरीश परगनिहा

हवा ने जवाब दिया, ‘‘मैं ताक़तवर हूँ. मैं बादलों को उड़ा ले जाती हूँ. है न सही.’’

लड़का बोला, ‘‘अगर तुम इतनी ही ताक़तवर हो तो पहाड़ तुम्हें रुख़ मोड़ने पर क्यों मजबूर कर देते हैं.’’

हवा हंसकर बोली, ‘‘फिर तो पहाड़ ही ताक़तवर हुआ न.’’

लड़के ने पहाड़ की तरफ मुँह करके पूछा, ‘‘पहाड़-पहाड़! ताक़तवर कौन?’’

पहाड़ ने जवाब दिया, ‘‘वह तो मैं ही हूँ, जो आँधी का रुख भी बदल देता हूँ. सही है न.’’

लड़के ने पहाड़ से फिर पूछा, ‘‘अच्छा अगर तुम इतने ही ताक़तवर हो तो फिर जंगली जानवर तुम्हारे ऊपर किस तरह उछलते कूदते रहते हैं.’’

पहाड़ ने जवाब दिया, ‘‘फिर तो जंगली जानवर ताक़तवर हुए. न कि मैं.’’

लड़के ने एक जंगली जानवर को पुकार कर कहा, ‘‘जानवर-जानवर! ताक़तवर कौन.’’

जानवर बोला, ‘‘देखो मैं पहाड़ों पर उछलता-फिरता हूँ और पहाड़ मुझे नहीं रोक सकता तो मैं ही ताक़तवर हूँ.’’

लड़के ने पूछा, ‘‘अच्छा अगर तुम इतने ही ताक़तवर हो तो फिर शिकारी तुम्हें कैसे मार डालते हैं.’’

जंगली जानवर ने जवाब दिया ‘‘हाँ यह तो सही है कि शिकारी ज़्यादा ताक़तवर होते हैं.’’

छोटे लड़के ने ज़ोर से ताली बजाई और बोला, ‘‘अच्छा इसका मतलब यह है कि सारी दुनिया में सबसे ज़्यादा ताक़तवर इंसान हैं. मेरी तरह.’’

यह कहकर लड़का ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर की ओर चला गया.

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संकलन
रख़्शंदा रूही
94-सी, पॉकेट ए,
डीडीए प्लैटस, सुखदेव विहार,
नई दिल्ली - 110025

चित्रांकन - हेम ज्योतिकाहमहुँ मेला देखे जाबै
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चित्राकंन-हेम ज्योतिकातारीख़ी सनद
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चश्मा
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