BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 11 अप्रैल, 2007 को 18:32 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
दो देशों के बीच बँटे कलाकारों की प्रदर्शनी

कला
दोनों देशों के मुद्दों की झलक मिल रही है
न्यूयॉर्क में इन दिनों भारतीय मूल के चित्रकारों, मूर्तिकारों और फ़ोटोग्राफ़रों की एक प्रदर्शनी चल रही है, इस प्रदर्शनी के ज़रिए ये कलाकार नए देश में अपनी कला को आम लोगों तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं.

इस प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सारे कलाकार अब अमरीका में ही रहते हैं.

गिल्ड आर्ट नाम की गैलरी में लगाई गई इस प्रदर्शनी में 16 कलाकार शामिल हैं और दो देशों के बीच बँटे अपने जीवन को उन्होंने अपनी कला का विषय बनाया है.

इनमें से कुछ कलाकार तो एक अर्से से भारत से बाहर ही हैं तो कुछ अभी हाल में ही वतन छोड़ कर आए हैं लेकिन इन सब कलाकारों के काम में अमरीकी समाज के असर के साथ-साथ कहीं न कहीं भारत की झलक ज़रूर देखने को मिलती है.

 कला की अपनी ही दुनिया होती है और कला कई संस्कृतियों के मिलाप को भी बढ़ावा देती है इसलिए मैं तो बहुत खुश हूँ कि इस तरह की प्रदर्शनी हो रही है जिसमें मुझे भी अपनी कला को दर्शाने का मौका मिला है
एंटोनियो पुरी, कलाकार

अमरीकी समाज की आधुनिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कार भी इन कलाकृतियों में दिखते हैं. इन कलाकारों को अमरीका में रहते हुए अपनी पहचान कायम रखने की भी चिंता भी दिखती है.

प्रदर्शनी का आयोजन करने वाली संस्था इंडो-अमेरिकन आर्ट्स काउंसिल की निदेशक अरूण शिवदसानी कहती हैं, “इस प्रदर्शनी के ज़रिए भारतीय मूल के इन कलाकारों को मौजूदा समाज में रहते हुए अपनी विभिन्न भावनाओं का इज़हार करने में मदद मिलेगी. ये अपनी कला का विषय भारत औऱ अमरीका दोनों ही देशों के हालात को बनाते हैं.”

पहचान

हाल के वर्षों में अमरीका में कुछ मशहूर भारतीय चित्रकारों की पेंटिंग को सराहा जाने लगा है. अब भारतीय पेंटिंग का अमरीका भी बड़ा बाज़ार बन गया है और कुछ कलाकृतियाँ तो काफ़ी महँगे दामों में बिकी हैं.

पिछले तीस वर्षों से अमरीका में रह रहे विजय कुमार कहते हैं कि मौजूदा हालात में भारतीय मूल के कलाकारों को अमरीकी मुख्यधारा में मान्यता पाने के लिए काफ़ी जद्दोजहद करनी होगी.

प्रदर्शनी में 16 कलाकारों की कलाकृतियाँ हैं

लखनऊ से आकर अमरीका में बसे विजय कहते हैं, “भारतीय कला बाज़ार में बाज़ारवाद बहुत बढ़ गया है. जिस तरह भारतीय आधुनिक कला के बाज़ार में खरीदार, निवेशक और डीलर अपने धंधों को चमकाने में लगे हैं, भारत में तो कला के क्षेत्र में बाज़ार अपना हुनर दिखा रहा है लेकिन अमरीका में रहने वाले यह भारतीय मूल के कलाकार अपनी कला के ज़रिए ही अपनी कहानी बयान कर रहे हैं.”

एंटोनियो पुरी एक चित्रकार हैं जो भारत में अपनी पढ़ाई करके 17 साल की उम्र में ही अमरीका आ गए और अब पेन्सिलवेनिया में रहते हैं. वे बहुत खुश हैं कि उनकी पेंटिंग अमरीका में पहली बार किसी प्रदर्शनी में दिखाई जा रही है.

एंटोनियो कहते हैं, “देखिए, कला की अपनी ही दुनिया होती है और कला कई संस्कृतियों के मिलाप को भी बढ़ावा देती है इसलिए मैं तो बहुत खुश हूँ कि इस तरह की प्रदर्शनी हो रही है जिसमें मुझे भी अपनी कला को दर्शाने का मौका मिला है.”

भारत में जन्मे एंटोनियो पुरी के ज़्यादातर चित्र हिंदू और बौद्व धार्मिक कथाओं पर आधारित हैं, उनका कहना है कि वे इन्हीं कथाओं के साथ पले-बढ़े हैं और इन्हीं से उन्हें प्रेरणा भी मिली.

गुजरात से अमरीका आकर बसे विनोद दवे मानते हैं कि कलाकारों को अब थोड़ा मान मिल रहा है. वह बताते हैं कि शुरूआत में भारत में उनकी पेंटिंग 200 रूपए में बिकती थी. अब उनकी कलाकृतियां चार से पाँच लाख रूपए तक में बिक जाती हैं, लेकिन अब भी उन्हें दूसरों के मुकाबले कम पैसे मिल रहे हैं.

कलाकार यामिनी नायर भी इस प्रदर्शनी अपने चित्रों को दर्शा रही हैं. यामिनी कहती हैं कि उन्हें खुशी है कि उन्हे अपनी कला को प्रदर्शित करने का मौका मिल रहा है.

अनमोलएक छोटा कलाकार
12 वर्ष के अनमोल ने तीन एकल प्रदर्शनियाँ कर ली हैं.
प्रदीप राभाएक कलाकार उम्रक़ैदी
उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे प्रदीप राभा अब चित्रकार बन गए हैं.
अमरीका में भारतीय पेंटिंगकलाकृतियों की नक़ल
नक़ल का शक होने पर कुछ भारतीय कलाकृतियों को नीलामी से हटा लिया गया.
आदिवासी कलाकारबस्तर के शिल्पकार
बस्तर के आदिवासी कलाकारों के साथ एक दिन.
इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>