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बिहार में चल रहा है 50 रुपये का रेडियो स्टेशन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के एक गाँव में चल रहा एफ़एम रेडियो स्टेशन भले ही अवैध हो, लेकिन उसे निश्चय ही भारत का पहला ग्रामीण रेडियो स्टेशन तो कहा ही जा सकता है. इस रेडियो स्टेशन को बनाने में 50 रुपये से भी कम की लागत आई है. यह सारा कारनामा है वैशाली ज़िले के मंसूरपुर गाँव के राघव महतो का. राघव ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं प्राप्त की है, लेकिन अपने रेडियो स्टेशन के कारण वह अपने इलाक़ में स्थानीय राजनीतिक नेताओं से भी ज़्यादा लोकप्रिय हो गए हैं. सुबह-सुबह जब राघव अपना रेडियो स्टेशन चालू करते हैं तो 20 किलोमीटर तक के दायरे में ग्रामीण अपने सस्ते रेडियो सेट पर उन्हें सुनने के लिए अपनी उत्सुकता छुपा नहीं पाते.
राघव के मित्र शंभु आत्मविश्वास भरे शब्दों में शुरु करते हैं- "सुप्रभात. राघव एफ़एम मंसूरपुर 1 पर आपका स्वागत है. अब आप अपने मनपसंद गीत सुनिए." शंभु के हाथ में है एक टूटी-फूटी माइक और उनके आसपास हैं फ़िल्मी गानों के टेप. मंसूरपुर का रेडियो स्टेशन राघव की दुकान प्रिया इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप से ही चलाया जाता है. दुकान उन्होंने 200 रुपये प्रति माह के किराये पर ले रखी है. शौक रेडियो से राघव का रिश्ता 1997 में शुरू हुआ, जब उन्होंने रेडियो मरम्मत की एक दुकान में काम करना शुरू किया. जब वह दुकानदार वहाँ से चला गया तो राघव ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपनी दुकान डाल ली. राघव कहते हैं कि उन्हें रेडियो स्टेशन चलाने का विचार 2003 में पहली बार आया था.
उन्होंने कहा, "हमें अपने विचार को अमली-जामा पहनाने में काफ़ी समय लग गया. हमने 50 रुपये की लागत पर एक निश्चित रेडियो फ़्रीक्वेंसी पर प्रसारण करने वाले ट्रांसमीटर के कलपुर्जे जुटा लिए." ट्रांसमीटर को एक बाँस के खंभे में टाँग कर पास के तिमंजिले अस्पताल के ऊपर लगा दिया गया है. वहाँ से तार खींच कर राघव की दुकान में रखे एक स्वनिर्मित स्टीरियो कैसेट प्लेयर से जोड़ा गया है. राघव को रेडियो चलाने से कोई आर्थिक लाभ नहीं होता. वो अपने शौक को पूरा करने के लिए रेडियो स्टेशन चला रहे हैं. अपनी दुकान से उन्हें दो हज़ार रुपये प्रति माह की आय हो जाती है. राघव को तो ये भी पता नहीं था कि एफ़एम रेडियो चलाने के लिए सरकारी लाइसेंस की ज़रूरत होती है. जब पहली बार उसे यह बात बताई गई तो उसने डर कर अपना रेडियो स्टेशन बंद कर दिया. लेकिन बाद में जनता की भारी माँग पर राघव ने फिर से रेडियो स्टेशन चालू कर दिया है. | इससे जुड़ी ख़बरें निजी एफ़एम पर ख़बरें अभी नहीं22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में एफ़एम रेडियो पर छापा22 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस लोगों के हाथ में ताक़त19 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना पाँच हज़ार रूपए में बना रेडियो स्टेशन23 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस छात्रों ने बनाया रेडियो सॉफ़्टवेयर11 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस तालेबान ने रेडियो प्रसारण शुरू किया19 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस दुबई में रेडियो पर शाहरूख़ और रानी24 मार्च, 2005 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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