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बढ़ रहा है रिमिक्स गानों का बाज़ार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले कुछ वर्षों से परंपरा विकसित हुई है कि नए गानों में समय बर्बाद करने से अच्छा है कि किसी पुराने गाने को एक नया रूप देकर, एक नई रफ़्तार के साथ पेश कर दिया जाए. और अब तो नए गाने के साथ उसका रिमिक्स भी बाज़ार में आने लगा है यानी गाना आता है और साथ में रिमिक्स भी. हालांकि ये विवाद अभी ख़त्म नहीं हुआ कि रिमिक्स ठीक है या नहीं लेकिन नई पीढ़ी को इसकी चिंता भी नहीं. सन् 1994-95 के आसपास बाली सागू ने रिमिक्स बनाकर श्रोताओं के सामने परोसने का जोख़िम उठाया था और उनका जोख़िम लेना काम आया. कुछ नया सुनने वाले श्रोताओं ने इसे खूब सराहा और हाथों-हाथ लिया. श्रोताओं के बीच अपार सफलता का ताज पहन चुका रिमिक्स गाना आज हर श्रोता के साथ-साथ संगीत कंपनियों की पहली पसंद बन गई है. किसी नए संगीतकार के साथ जोख़िम लेकर कोई संगीत बाज़ार में उतारने के बजाय पुराने गानों को तोड़-मरोड़कर और एक तेज़-तर्रार रूप देकर पेश करने का मानो एक रिवाज़-सा बन गया है. पुराने गाने को जब युवा पीढ़ी लगभग भूल चुकी थी, ऐसे में रिमिक्स गानों के ज़रिए कुछ पुरानी यादें ज़रूर ताज़ा हो गई. शायद रिमिक्स के लोकप्रिय होने का यह भी एक बहुत बड़ा कारण है. आधुनिक दौर पहले जब रिमिक्स गाने सुनते थे तो वह किसी पुरानी फ़िल्म का मशहूर गाना होता था लेकिन आज नई फ़िल्म के ही किसी गाने का नया रूप सुनने के लिए आपको ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि अब फ़िल्म रिलीज़ होने के साथ ही ओरिजनल गाने के साथ रिमिक्स गाना भी सुनने को मिलने लगा है. फिल्म 'ज़हर' का गाना 'वो लम्हें...' ने ऐसी धूम मचाई कि फिर हर निर्माता अपनी फ़िल्म में एक रिमिक्स ज़रूर चाहने लगा. इससे फ़िल्म के साथ ही उस गाने का जादू भी श्रोताओं-दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है. साथ ही इनका मुनाफ़ा भी दोगुना हो जाता है. एक सर्वे के मुताबिक़ फ़िल्म 'आशिक बनाया आपने' के टाइटल गाने के रिमिक्स ने आजतक सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा कमाया है. वर्ष भर में जहां क़रीब 900 से ज्यादा फ़िल्में प्रदर्शित होती हैं वहीं कुछ ही फ़िल्में बॉक्सऑफिस पर अपना जलवा बिखेर पाती हैं. ऐसे में एक प्रश्न बार-बार दिमाग में जरूर उठता है कि बॉक्सऑफिस पर फ्लॉप हुई फ़िल्मों के निर्माता इतनी तेज़ रफ़्तार से फ़िल्में कैसे बनाते हैं. रिमिक्स की धुन वजह साफ़ है. गानों की सीडी, कैसेट, वीडियो और टिकट खिड़कियों के अलावा अब मोबाइल रिंगटोन, वीडियो क्लिप जैसे सैटेलाइट अधिकार ने फिल्म इंडस्ट्री में पैसे कमाने के नए मार्ग खोले हैं. इसी क्रम में आगे थोड़ी और भरपाई करने के लिए एक और धारा जुड़ गई है जो उसी फ़िल्म के किसी गाने के रिमिक्स के रूप में यथार्थ हुई है. गीतकार समीर कहते हैं, "रिमिक्स युवाओं को ज़्यादा आकर्षित करते हैं इसीलिए इसका ट्रेंड ज़्यादा बढ़ गया है." किसी गाने की धुन तेज़ कर दी जाती है तो किसी में धीमी, बस यही तो है रिमिक्स.
एक ही फ़िल्म में ओरिजनल के साथ रिमिक्स गाने का कारण पूछने पर समीर कहते हैं, "निर्माताओं को फ़िल्म के किसी गाने को लेकर अगर ऐसा लगता है कि बाहर जाने के बाद इसका रिमिक्स आ सकता है तो वे पहले ही डीजे को बुलाकर उस गाने का रिमिक्स बनाने को कह देते हैं." रिमिक्स के भविष्य पर समीर कहते हैं, "भविष्य तो काफ़ी अच्छा है और यह कभी न ख़त्म होने वाला सिलसिला है. वह दिन दूर नहीं जब हर गाना रिमिक्स टाइप का ही होगा." चिंता संगीत आधारित टीवी शो, इंडियन आयडल-टू में अपनी एक ख़ास जगह बना चुके रवि त्रिपाठी इस पर गहरा अफ़सोस जताते हुए कहते हैं, "इस तरह से संगीत की हालत दिनोंदिन ख़राब हो रही है. कई नए संगीतकारों को यह शॉर्टकट जल्दी प्रसिद्ध बना सकता है लेकिन लंबे समय के लिए यह नुकसानदेह साबित हो सकता है." जाने-माने संगीतकार रवींद्र जैन भी इन रिमिक्स गानों के काफ़ी ख़िलाफ़ नज़र आए. जैन कहते हैं, "इससे हमारी संस्कृति ख़राब हो रही है और ये सब यूं ही लंबे समय तक चलता रहा तो असली संगीत लुप्त होने में ज़्यादा देर नहीं लगेगी." उन्होंने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा, "कुछ समय के लिए अगर कोई गाना चल जाता है तो इसका यह कतई मतलब नहीं कि हम ओरिजनल गानों के साथ छेड़छाड़ का सिलसिला चालू रखें. हम लोगों के साथ-साथ संगीत का भविष्य भी अधर में है." ये सवाल अभी बचा हुआ है कि रिमिक्स संगीत के कारण भर बिक रहा है या साथ में आने वाले उत्तेजक नृत्यों के कारण भी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'रीमिक्स के नाम पर भद्दा मज़ाक'30 सितंबर, 2005 | मनोरंजन दुनिया का बेहतरीन संगीतकार कौन?29 जनवरी, 2006 | मनोरंजन 'प्रयोग हों लेकिन शास्त्रीय शुद्धता के साथ'23 जनवरी, 2006 | मनोरंजन 'जिसे सुनकर लोग रो पड़ें वो है संगीत'27 नवंबर, 2005 | मनोरंजन क्या चार चाँद लगा पाएँगे चार संगीतकार?14 नवंबर, 2005 | मनोरंजन 'बाज़ार चलाता है मेरी दुनिया'20 सितंबर, 2005 | मनोरंजन 'शास्त्रीय संगीत में शॉर्टकट नहीं होता'06 जून, 2005 | मनोरंजन 'फ़्यूज़न संगीत में कोई बुराई नहीं'26 मई, 2005 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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