BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 16 जुलाई, 2005 को 12:05 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
जनता पार्टी कैसे टूटी
जनता पार्टी कैसे टूटी
उदयन शर्मा ने जनता पार्टी के दौर की तस्वीर पेश की है
भारतीय राजनीति में आपातकाल और जनता पार्टी का दौर इतिहास का एक महत्वपूर्ण समय रहा है.
वरिष्ठ पत्रकार उदयन शर्मा ने इस दौर के चश्मदीद गवाह रहे हैं. उनके निधन के बाद उनकी स्मृति में गठित ट्रस्ट ने उस दौर के उनके लेखों को प्रकाशित किया है.

इस पखवाड़े प्रस्तुत है राजनारायण की गतिविधियों के बारे में लिखे उनके लेख के अंश:

भारतीय राजनीति में राजनारायण की भूमिका कुछ-कुछ सड़क पर तमाशा दिखाने वाले उस बाबा के जैसी है जो कीलों के बिस्तर पर लेट जाता है और उसका करतब देखने के लिए लोग उसके इर्द-गिर्द खड़े हो जाते हैं.

यह राजनारायण ही हो सकते हैं जो रायबरेली में अपनी ऐतिहासिक जीत का श्रेय न तो उस क्षेत्र के लोगों को देते हैं न स्वयं को बल्कि आगरा के सवाई बाबा को देते हैं.

यह राजनारायण ही हैं जो प्रसाद के रूप में प्राप्त गेंदे के फूलों की पूरी माला को ही चबा जा सकते हैं.

मार्च 28 से लेकर जून के अंत तक, जिस दौरान यह लेख लिखा गया, कोई न कोई मजेदार घटना देखने को मिलती रही.

पहली अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्री ने लोकसभा को बताया कि “परिवार नियोजन” काफी कुख्यात हो चुका है और सरकार इस नाम को बदलने पर गंभीरता से विचार कर रही है.

उन्होंने दुनिया को यह भी बताया कि वह नियोजन परिवार के पक्ष में हैं लेकिन वह अनिवार्य नसबंदी के विरुद्ध हैं.

राजनारायण ने कहा कि श्रीमती गांधी की सरकार ने परिवारों को नष्ट करने की कोशिश की थी, और परिवारों ने कांग्रेस को सत्ता से हटा दिया.

छह अप्रैल को मंत्री महोदय ने लोकसभा में अपने विरुद्ध पहले विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का सामना किया.

महाराष्ट्र के एक सांसद ने जो जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी पीडब्ल्यूपी के थे, शिकायत की कि मंत्री महोदय ने अपने मंत्रालय के बारे में एक नीतिगत वक्तव्य सदन से बाहर दिया है जबकि लोकसभा चल रही है.

सात अप्रैल को राजनारायण ने घोषणा की कि वह जल्दी ही अपने नए रूप में दिखाई देंगे.

वह अपनी दाढ़ी मुंड़वाने के लिए विंध्याचल रवाना हो रहे थे. एक स्थानीय कार्यक्रम में बोलते हुए उसी शाम उन्होंने कहा कि मार्च के चुनावों से पहले उन्होंने कसम खाई थी कि वे तभी दाढ़ी मुड़ाएंगे जब इंदिरा गाँधी का शासन समाप्त हो जाएगा.

यह बात उन्होंने दिल्ली के चाँदनी चौक में खचाखच भरे टाउन हाल में कही. उन्हें पाँच बजे विंध्याचल के लिए गाड़ी पकड़नी थी.

राजनारायण ने अपने भाषण की शुरुआत इस कथन से की “दुर्भाग्य से मंत्री हो जाने के लिए मैं क्षमायाचना करता हूँ.”

आठ अप्रैल को संसद के वरिष्ठतम सदस्य भूपेश गुप्ता ने अपना यह आग्रह प्रकट किया कि जनता सरकार को अपने मंत्रियों के लिए एक आचार संहिता बनानी चाहिए.

श्री गुप्ता के अनुसार एक विदेशी मेहमान, इंडोनेशिया के विदेश मंत्री आदम मलिक को अपमान झेलना पड़ा था.

बातचीत के दौरान जब हमारे विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने श्री मलिक को कॉफी का प्याला पेश किया तो मेजबान प्रतिनिधिमंडल के सदस्य राजनारायण ने इसमें रुकावट पैदा की.

यह अशिष्टता थी और इससे हमारे देश की अच्छी छवि नहीं उभरती थी.

ग्यारह अप्रैल को कॉफी के प्याले में आया हुआ तूफान अब तक उमड़ रहा था. राजनारायण से कहा गया कि वे श्री मलिक के साथ बैठक के दौरान निर्गुटता के बारे में की गई अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दें.

राज्यसभा सदस्य भूपेश गुप्ता और अमजदअली का आग्रह था कि राजनारायण सदन को कॉफी के प्याले और निर्गुटता दोनों के बारे में ही बताएं.

राजनारायण ने कहा कि कॉफी के प्याले की घटना एकदम निराधार है. मगर निर्गुट आंदोलन के बारे में समाचार पत्रों ने उनके विचारों को सही तरीके से छापा है.

उन्होंने कहा कि गुट निरपेक्षता वस्तुतः एक नकारात्मक दर्शन है और इस बात पर जोर दिया कि उन्हें अपने विचार प्रकट करने का अधिकार है.

राजनारायण ब्रह्मचर्य और संयमपूर्ण जीवन की खुलकर वकालत करते थे. उनका कहना था कि ये गुण निश्चित रूप से अच्छे परिणाम देंगे, शायद वह यह संकेत देना चाहते थे कि “लूप” के मामले में कोई न कोई छेद अवश्य रहेगा जबकि ब्रह्मचर्य का पालन करने से गर्भाधान की कोई संभावना ही नहीं रहेगी.

राजनारायण एक अच्छे बिंदु की ओर इशारा करते रहते थे कि अधिकतर महान व्यक्तियों के परिवार छोटे थे.

शायद मंत्री महोदय कहना चाहते थे कि इन महान व्यक्तियों ने अपना समय बच्चे पैदा करने में नहीं बल्कि लिखने-पढ़ने और गणित आदि में लगाया.

मंत्री जी ने लोगों का आह्वान किया कि वे अगर बिना बच्चे के रह सकते हैं तो बच्चे पैदा न करें और दो या तीन से ज़्यादा तो किसी भी सूरत में पैदा न करें.

गांवों पर ध्यान

उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं से आग्रह किया कि वे अपने आपको ग्रामीण प्रधान बनाएं और केवल धन कमाने पर ही जोर न दें.

बीस अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए योजना तैयार की.

इसका योजना व्यय 86 करोड़ रुपए दर्शाया गया था और कहा गया था कि इस योजना से चिकित्सक एक ग्रामीण के दरवाज़े तक पहुंचेगा और 1984-85 तक देश में प्रति 5 हज़ार लोगों पर एक चिकित्सक होगा.

इस योजना के पीछे स्पष्टतः चीन का नंगे पॉव डॉक्टर वाला आदर्श काम कर रहा था और युवा चिकित्सकों से कहा गया था, कि वे अपने प्रशिक्षण के दौरान 200 रुपए प्रतिमाह के भत्ते पर अपने प्रशिक्षण की शुरुआत गाँवों से करें.

अट्ठाईस अप्रैल को राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक बुलाई गई. उन्हें संबोधित करते हुए राजनारायण ने कहा कि चिकित्सकों को कम से कम दो वर्ष गाँवों में बिताने चाहिए.

30 अप्रैल को राजनारायण ने बड़े ही कौशल से बीएलडी के उस सम्मेलन को संभाला जिसमें पार्टी आधिकारिक तौर पर जनता पार्टी में अपने विलय का निर्णय लेने वाली थी.

साथ ही पृष्ठभूमि में चौधरी चरण सिंह द्वारा नामित किसी व्यक्ति को जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाने की उनकी मुहिम भी जोरों से चल रही थी.

लेकिन अगले दिन चंद्रशेखर के अध्यक्ष बन जाने से यह तय हो गया कि राजनारायण की नियति अपने इस प्रयास में सफल होने की नहीं थी.

14 मई का दिन जनता पार्टी के लिए एक संकट का दिन था क्योंकि चौधरी चरण सिंह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए नामित उम्मीदवारों की सूची के पर्यवेक्षक पद से इस्तीफा दे दिया था.

राजनारायण ने यह इस्तीफ़ा चंद्रशेखर से वापस ले लिया और फिर प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की.

उन्होंने उत्सुक प्रेस को बताया कि चौधरी चरण सिंह ने पार्टी की एकता के लिए इस्तीफा दिया था और अब पार्टी एकता के लिए ही इस्तीफ़ा वापस ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी की एकता को कोई खतरा नहीं है.

पंद्रह मई को राजनारायण के घर पर हजारों लोग जुटे हुए थे. ये सबके सब या तो ख़ुद अपने लिए टिकट चाहने वाले थे या फिर हरियाणा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन को अपनी पसंद के अनुसार प्रभावित करना चाहते थे.

राजनारायण ने वादा किया कि जो हाल ही तक कांग्रेस के साथ रहे हैं उन्हें टिकट नहीं दिए जाएंगे.

स्वास्थ्य

उसी दिन बच्चों की पत्रिका “पराग ” का ताजा अंक बाज़ार में आया जिसमें राजनारायण का साक्षात्कार छपा था.

मंत्री महोदय ने बच्चों को अच्छे स्वास्थ्य के महत्व के बारे में बताया था. उन्होंने बच्चों से कहा कि एक समय स्कूलों में भीगा चना बंटता था, जो एक अच्छा काम था.

वह इस परंपरा को फिर से शुरू करने की सोच रहे हैं. बच्चों को ऐसी आदतें डालनी चाहिए जिससे कि उनकी मेधा प्रखर हो.

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उन्हें वर्णमाला से पहले हनुमान चालीसा रटाया गया था. इसीलिए वह शक्ति और चरित्र के इतने बड़े पुजारी हैं.

हनुमान उनके आदर्श हैं. उनके घर का माहौल पवित्र और धार्मिक था, इसीलिए उनका शरीर इतना मजबूत बना. हनुमान में उनकी आस्था इतनी ज़्यादा थी कि वह कभी-कभी स्कूल छोड़कर मंदिर चले जाया करते थे और बिना रामायण का पाठ किए हुए पानी ग्रहण नहीं करते थे.

घर में उन्हें सुबह 4 बजे ही जगा दिया जाता था और कसरत के लिए अखाड़े में भेज दिया जाया करता था.

मंत्री महोदय ने कहा कि अगर अखाड़े का उनका अभ्यास जारी रहता तो वह एक बहुत बड़े पहलवान बन सकते थे.

उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा उन्हें हमेशा से ही प्रिय रहा. उन्हें खेलकूद तो पसंद थे लेकिन संगीत, फ़िल्म, साहित्य और सिगरेट के प्रति उनमें कोई रुचि नहीं रही.

तेईस मई को राजनारायण ने बंबई में पत्रकारों से कहा कि रायबरेली में उनकी जीत ईश्वर की मर्जी से हुई.

जब यह पूछा गया कि राजनारायण की सफलता का मतलब क्या है तो उन्होंने साफ़ कहा कि यह नारायण का राज है.

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें स्वास्थ्य मंत्री क्यों बनाया तो उनका जवाब था, “देश का स्वास्थ्य खराब है और मैं एक स्वस्थ व्यक्ति हूँ, यही कारण है कि यह जिम्मेदारी मेरे ऊपर डाली गई है. ”

हड़कंप

इसके बाद 23, 24 और 25 जून लोकसभा में लगातार तीन दिन तक हड़कंप की स्थिति बनाए रखकर राजनारायण ने एक अलग किस्म का रिकॉर्ड कायम किया.

शुरुआत 23 जून को तब हुई जब एक कांग्रेस सदस्य द्वारा अंग्रेजी में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर उन्होंने हिंदी में देना शुरू किया.

विपक्ष का कहना था कि क्योंकि प्रश्न अंग्रेजी में है इसलिए उसका उत्तर भी अंग्रेजी में होना चाहिए. मंत्री जी ने महसूस किया कि जो प्रश्न उठाया गया है वह बहुत ही गंभीर प्रश्न है और इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा.

अपनी बात जारी रखते हुए अंग्रेजी विरासत को लेकर उन्होंने कुछ ऐसी टिप्पणियाँ कीं जिन्हें अध्यक्ष को कार्यवाही से निकालना पड़ा.

मगर सदन तब तक शांत नहीं हुआ जब तक कि प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अपने मंत्री की ओर से स्वयं क्षमायाचना न कर ली.
-----------------------------------------------------------------

पुस्तक - जनता पार्टी कैसे टूटी
लेखक - उदयन शर्मा
प्रकाशक - उदयन शर्मा फाउंडेशन ट्रस्ट, जी-12, सेक्टर-27, नोएडा, यूपी
मूल्य - 250 रुपए

66पखवाड़े की किताब
इस पखवाड़े जयनंदन का उपन्यास 'सल्तनत को सुनो गाँव वालो'
66पखवाड़े की किताब
इस बार नासिरा शर्मा की 'कुइयाँजान' जिसमें उन्होंने पानी को विषय बनाया है.
66पखवाड़े की किताब
एक नया कॉलम. इस बार पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की टिप्पणियों का एक अंश.
66तस्लीमा की नई किताब
बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन की नई किताब पर रोक लगी है.
66गाँधीजी और मीराबेन
सुधीर कक्कड़ की किताब कहती है कि दोनों के बीच गहरे रिश्ते थे.
इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>