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तस्लीमा ने भारत की नागरिकता मांगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन अब भारत की नागरिकता चाहती हैं. उन्होंने भारत सरकार से नागरिकता प्रदान करने के लिए आवेदन किया है. भारतीय गृह मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की कि उसे तस्लीमा नसरीन का एक पत्र मिला है जिसमें उन्होंने स्थाई रूप से रहने की अनुमति मांगी है. बीबीसी से बातचीत में तस्लीमा ने कहा कि उन्हे पश्चिम बंगाल से लगाव है और वे इसे अपना घर बनाना चाहती हैं. तस्लीमा इस वक्त अस्थाई रूप से कोलकाता में रह रही हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों से वे अपने देश बंग्लादेश के बजाए भारत अथवा यूरोप में रह रही हैं. विवाद तस्लीमा नसरीन के साथ विवाद शुरू से ही जुड़े रहे हैं. डॉक्टर से लेखिका बनीं तसलीमा नसरीन को बांग्लादेश की अग्रणी नारीवादी लेखिकाओं में गिना जाता है. तस्लीमा 1993 में अपनी पहली और सबसे विवादास्पद पुस्तक 'लज्जा' के कारण सुर्खियों में आईं थीं. इस्लामी कट्टरवादियों ने तस्लीमा पर ईश निंदा का आरोप लगाकर उनके ख़िलाफ़ मौत का फ़तवा जारी कर दिया था. मौत के फ़तवे से बचने के लिए तसलीमा को अपना देश छोड़ना पड़ा था और वे काफ़ी अर्से तक स्वीडन में रहीं. इसके बाद 1999 में प्रकाशित उनकी किताब 'माई गर्लहुड' पर भी बांग्लादेश में प्रतिबंध लगा दिया गया. उनके नारीवादी लेखों को लेकर भी बांग्लादेश में ख़ासा बवाल रहा है. |
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