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तस्लीमा की किताब पर सरकारी रोक
पश्चिम बंगाल की सरकार ने विवादास्पद बांग्ला लेखिका तस्लीमा नसरीन की नई किताब 'द्विखंडिता' पर प्रतिबंध लगा दिया है. राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने पुलिस को आदेश दिया है कि वे किताब की सभी प्रतियाँ अपने कब्ज़े में ले ले. मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्होंने इस किताब को पढ़ा है और उन्हें इसकी बिक्री रोकने की ज़रूरत महसूस हुई. इस उपन्यास को लेकर बांग्लादेश में भी भारी विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि इस पर इस्लाम की तौहीन करने के आरोप लग रहे हैं. तस्लीमा नसरीन के साथ विवाद शुरू से ही जुड़े रहे हैं. उनके उपन्यास 'लज्जा' और उनके नारीवादी लेखों को लेकर भी बांग्लादेश में ख़ासा बवाल रहा है. हंगामा इतना बढ़ा कि तस्लीमा नसरीन को बांग्लादेश छोड़कर स्वीडन में शरण लेनी पड़ी और इन दिनों वे अमरीका में रहती हैं. कोलकाता में रहने वाली इस किताब की प्रकाशक शिबानी मुखर्जी ने बीबीसी को बताया कि पुलिस उनके घर आई और उनसे तस्लीमा नसरीन के बारे में पूछताछ की गई. विवाद की शुरूआत तब हुई जब पश्चिम बंगाल के कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने मुख्यमंत्री से इस किताब पर पाबंदी लगाने की माँग की. मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि किताब में इस्लाम की तौहीन की गई है. कोलकाता हाइकोर्ट ने इस किताब की बिक्री पर पहले ही रोक लगा दी है क्योंकि पश्चिम बंगाल के एक कवि सैयद हशमत जलाल ने तस्लीमा नसरीन के ख़िलाफ़ मानहानि का दावा किया है. हशमत जलाल का कहना है कि इस किताब में उनके बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं जो कि पूरी तरह से ग़लत हैं. हशमत जलाल ने मानहानि के लिए 11 करोड़ रूपए का दावा किया है, इस मामले की अभी सुनवाई होनी है. |
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