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कोलकाता पर बनी डॉक्यूमेंट्री को ऑस्कर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस वर्ष ऑस्कर पुरस्कारों में कोलकाता के रेड लाइट इलाक़े पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री 'बॉर्न इंटू ब्रॉथेल्स' को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार मिला. मगर शॉर्ट फ़िल्म वर्ग में भारतीय युवा अश्विन कुमार की बहुचर्चित फ़िल्म 'द लिटिल टेररिस्ट' पिछड़ गई. 'बॉर्न इंटू ब्रॉथेल्स' के निर्माता और निर्देशक हैं ज़ाना ब्रिस्की और रॉस कॉफ़मैन. पुरस्कार स्वीकार करते हुए ज़ाना ब्रिस्की ने कहा,"हम बच्चों का आभार प्रकट करते हैं. वे हमें कोलकाता में अभी देख रहे हैं". ब्रिस्की एक प्रेस फ़ोटोग्राफ़र हैं और वे वेश्यावृत्ति पर एक फ़िल्म बनाने के उद्देश्य से कोलकाता गई थीं.
वहाँ काम करते हुए उनकी कई वेश्याओं के बच्चों से दोस्ती हुई और ब्रिस्की ने उन्हें अपना कैमरा देकर अपनी ज़िंदगी की तस्वीरें उतारने को कहा. और बच्चों ने जो तस्वीरें लीं वे उनकी कठिन ज़िंदगी की एक बिल्कुल अलग और हैरतअंगेज़ तस्वीर पेश करते हैं. लिटिल टेररिस्ट 'लिटिल टेररिस्ट' ऑस्कर पुरस्कारों में नामांकित एकमात्र भारतीय फ़िल्म थी मगर उसे पुरस्कार नहीं मिल सका. ये फ़िल्म एक बच्चे के माध्यम से भारत और पाकिस्तान की सरहद और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाती है. अश्विन कुमार की इस फ़िल्म को पीछे छोड़ा ब्रिटेन के निर्देशक आंद्रे आर्नल्ड की फ़िल्म 'वास्प' ने. 'वास्प' एक युवा माँ की कहानी है जो अपने चार बच्चों को कहीं रखने की जगह नहीं पाकर उनको एक पब के बाहर छोड़कर अपने दोस्त से मिलने जाती है. |
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