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गुरुवार, 24 फ़रवरी, 2005 को 15:11 GMT तक के समाचार
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फ़िल्मों पर क्रिकेट का हौवा

फ़िल्म बेवफ़ा में अक्षय कुमार और करीना कपूर
बेवफ़ा को पारिवारिक फ़िल्म बताया गया है
भारत - पाकिस्तान क्रिकेट सिरीज़ का असर बॉलीवुड पर साफ़ नज़र आ रहा और वितरकों में हड़बड़ी सी नज़र आ रही है.

क्रिकेट के लिए लोगों के जुनून और परीक्षाओं को देखते हुए शुक्रवार यानी 25 फरवरी को भारत में एक साथ आठ फ़िल्में रिलीज हुई है. इन आठ में पाँच हिंदी फ़िल्में हैं जबकि दो अंग्रेजी और एक भोजपुरी.

आमतौर पर ऐसा नहीं होता. आमतौर पर एक साथ इतनी फ़िल्में त्योहार या लंबी छुट्टियों जैसे ख़ास मौक़ों पर ही रिलीज़ होती हैं लेकिन इस वक़्त ऐसा कोई मौक़ा नहीं है.

एक साथ इतनी फ़िल्मों के प्रदर्शन के लिए क्रिकेट और परीक्षाओं को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

हिंदी फ़िल्मों में सबसे बड़ी फ़िल्म है – ‘बेवफ़ा’. ‘राजा हिंदुस्तानी’ वाले धर्मेश दर्शन की इस फ़िल्म में अनिल कपूर, अक्षय कुमार, मनोज वाजपेयी, सुष्मिता सेन, करीना कपूर और कबीर बेदी जैसे मंजे हुए कलाकार हैं.

लगातार फ्लॉप फ़िल्मों की मार झेल रहे बॉलीवुड को इस पारिवारिक फ़िल्म से काफी उम्मीदे हैं.

एक चुंबन को छोड़ दिया जाए तो समीक्षकों के मुताबिक इसे साफ़ सुथरी फ़िल्म की श्रेणी में रखा जा सकता है.

बेवफ़ा के अलावा ‘चांद सा रौशन चेहरा’ एक ऐसी फ़िल्म है जिसे मुंबई के फ़िल्म उद्योग में साफ़ सुथरी फ़िल्म कहा जा रहा है. नए चेहरों को लेकर बनाई गई ये फ़िल्म किशोर प्रेम की कहानी है.

इन दो फ़िल्मों के अलावा इस सप्ताह विवादित अंग्रेजी फ़िल्म ‘सिंस - क्राइम्स ऑफ पैशन’ भी परदे पर आ रही है. बोल्ड विषयों पर फ़िल्म बनाने के लिए चर्चित निर्देशक विनोद पांडे की ये फ़िल्म ईसाई संगठनो के ग़ुस्से का निशाना बनी है.

इसका प्रदर्शन रोकने की कोशिश भी जारी है. इस फ़िल्म में एक पादरी और कम उम्र की लड़की के बीच शारीरिक संबंधों को कहानी के केंद्र में रखा गया है. सिंस इस विवाद के साथ ही अपने 'गर्मागर्म' दृश्यों की वजह से भी चर्चा में है.

फ़न...

'गर्मागर्म' दृश्यों फ़िल्म, ‘फ़न - कैन बी डेंजरस समटाइम्स’ भी इसी शुक्रवार प्रदर्शित हो रही है.

फ़िल्म फ़न... का एक दृश्य
इस फ़िल्म को कॉमेडी बताया गया है

पतियों की अदलाबदली जैसे विषय पर केंद्रित इस फ़िल्म पर यूँ तो कॉमेडी का ठप्पा लगाया जा रहा है लेकिन ये फ़िल्म पायल रोहतगी और हिना रहमान जैसी हीरोइनों के 'कपड़े कम जिस्म ज्यादा' वाले प्रदर्शन और आर्यन वैद और सिद्धार्थ कोइराला के साथ उनके हॉट सीन के लिए ज़्यादा चर्चा में है.

अभिनेत्री मनीषा कोइराला के भाई सिद्धार्थ कोइराला इस फ़िल्म से अपनी फ़िल्मी पारी की शुरुआत कर रहे हैं.

फ़िल्म वितरण से जुड़े हरीश गाड़ोदिया कहते हैं कि एक साथ इतनी फ़िल्मों का प्रदर्शन ना तो इन फ़िल्मों के लिए अच्छा है और ना ही हाल के हफ्तों में प्रदर्शित दूसरे फ़िल्मों के लिए. इन पर विवाद और चर्चा इनके अलग-अलग प्रदर्शन से ज़्यादा भीड़ खींच सकते थे.

मुंबई में फ़िल्म वितरण के गढ़ नाज़ सिनेमा इलाक़े में बैठे दिग्गज कहते हैं कि अगर ये फ़िल्में अभी रिलीज नहीं हुई तो फिर इन्हें लंबा इंतजार करना होगा क्योंकि मार्च – अप्रैल में स्कूल कॉलेज के इम्तिहान शुरु हो रहे हैं और फिर भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिरीज तो और भी नज़दीक है.

चाँद सा रौशन चेहरा
फ़िल्म किशोर प्रेम कहानी है

चर्चित और विवादित फ़िल्मों के अलावा ‘निगेहबान – दि थर्ड आई’ एक रोमांटिक थ्रिलर है जिसे एक ठीकठाक फ़िल्म कालचक्र बनाने वाले दिलीव शंकर ने निर्देशित किया है जबकि ‘शोभायात्रा’ एक व्यंग्य है. इस कहानी में झाँसी की रानी, नेहरू, महात्मा गाँधी, सुभाष चंद्र बोस पात्र हैं.

ये फ़िल्म किसी तरह के विवाद मे नहीं है, यही इसकी ख़ासियत है जो फ़िल्म देखने पर ही पता चलेगा.

इनके अलावा अंग्रेजी फ़िल्म ‘उमर मुख्तार- लॉयन ऑफ दि डेज़र्ट’ भी काफ़ी लंबे इंतज़ार के बाद इस सप्ताह भारतीय दर्शकों को देखने मिलेगी तो भोजपुरी के नए क्रेज़ गायक मनोज तिवारी की ‘दारोगा बाबू आई लव यू’ भी.

ऐसे हालात में फ़िल्म निर्माताओं, वितरकों के साथ-साथ फ़िल्म प्रेमियों को भी इसका इंतज़ार है कि कौन सी फ़िल्म का बॉक्स ऑफ़िस कितना चमकता है.

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