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भारतीय मूल के फ़िल्मकार ऑस्कर में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत से संबंध रखनेवाली चार फ़िल्में इस साल ऑस्कर पुरस्कार की दौड़ में शामिल हैं. ये फ़िल्में हैं अश्विन कुमार की ‘लिटल टेररिस्ट’, कोलकाता के सोनागाछी इलाक़े में फ़िल्माई गई ‘बोर्न इन्टु ब्रॉथल्स’, मनोज नाइट श्यामलन की ‘द विलेज’ और दक्षिण अफ़्रीका के जाने-माने निर्माता अनंत सिंह की ‘येस्टरडे’. ‘लिटिल टेररिस्ट’ कहानी है दस-वर्षीय पाकिस्तानी लड़के जमाल की, जो एक दिन अपनी क्रिकेट बॉल का पीछा करते-करते भारत की सीमा में घुस आता है. भारतीय सिपाही इस ‘टेररिस्ट’ या आतंकवादी को पकड़ने की कोशिश करते हैं, तो उसे एक हिंदू शिक्षक सहारा देता है. पंद्रह मिनट की यह फ़िल्म राजस्थान में फ़िल्माई गई है. निर्देशक अश्विन कहते हैं, “इस फ़िल्म के ज़रिए मैं लोगों के सामने अपनी प्रतिभा रखना चाहता था और एक फ़ीचर फ़िल्म के लिए पैसा इकठ्ठा करना चाहता था. ऑस्कर के लिए शॉर्टलिस्ट होने से मेरा सपना साकार हो गया है.” अश्विन से पहले इसी श्रेणी में विधु विनोद चोपड़ा की फ़िल्म ‘एन एनकांउटर विद फ़ेसेस’ भी मनोनीत हुई थी. चोपड़ा ऑस्कर तो नहीं जीत पाए लेकिन ‘परिंदा’, ‘मिशन कश्मीर’ और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ जैसी फ़िल्मों ने उन्हें हिंदी फ़िल्म उद्योग में एक बड़ा नाम बना दिया है. सोनागाछी के बच्चे कोलकाता के सोनागाछी इलाक़े में अपना जिस्म बेचने पर मजबूर औरतों की कहानी बताने की तो कई कोशिशें हुई हैं, लेकिन उनके बच्चों के बारे में लोगों को कम ही पता है. ये बच्चे हर दिन अपने आसपास जिस्म का व्यापार देखते हैं और इनमें से कुछ ही इस दलदल से निकल पाते हैं. ज़ाना ब्रिस्की और रॉस कॉफ़मेन की फ़िल्म ‘बॉर्न इंटू ब्रॉथल्स’ ऐसे ही कुछ बच्चों की कहानी बताने की कोशिश है.
ब्रिस्की कहती हैं, “सोनागाछी के बच्चों ने सबसे पहले मुझे अपनी दोस्त माना. उन्हें ये तो नहीं पता था कि मैं वहाँ क्या कर रही हूँ लेकिन वो मुझसे और मेरे कैमरे से बड़े प्रभावित थे.” पेशे से फ़ोटोग्राफ़र ब्रिस्की ने इन बच्चों को कैमरा इस्तेमाल करने और तस्वीरें उतारने का प्रशिक्षण दिया. शायद तब उन्होंने सोचा नहीं था कि प्रशिक्षण का ये सिलसिला ढाई साल तक चलेगा. उनका कहना है, “अचानक मुझे लगा कि इस पूरे सिलसिले को कैमरे में क़ैद करने की ज़रूरत है. मैने एक वीडियो कैमरा उठाया और इन बच्चों को घर पर, सड़कों में खेलते हुए और फ़ोटो खींचते हुए रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया.” नतीजा है ‘बॉर्न इंटू ब्रॉथल्स’ जो सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में ‘सुपरसाइज़ मी’ और ‘द स्टोरी ऑफ़ द वीपिंग कैमल’ से भिड़ रही है. भारतीय मूल भारतीय मूल के मनोज नाइट श्यामलन की फ़िल्म ‘द विलेज’ को उसके संगीत के लिए मनोनीत किया गया है. ‘द विलेज’ एक ऐसे गांव की कहानी है जिसमें रहने वाले गांव की सीमा नहीं पार करते. उन्हें लगता है कि गांव के आसपास के जंगलों में खूंखार और डरावने जीव रहते हैं. एक दिन गांव का एक युवक इस धारणा को चुनौती देता है और इसका असर सभी की जिंदगी पर पड़ता है. दक्षिण अफ़्रीका के अनंत सिंह की फ़िल्म ‘येस्टरडे’ उसी श्रेणी में है जिसमें पिछले साल आशुतोष गोवारिकर की ‘लगान’ थी. सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्म की श्रेणी में पहुँची यह फ़िल्म ऑस्कर में आनेवाली पहली दक्षिण अफ़्रीकी फ़िल्म है. भारतीय मूल के अनंत की आनेवाली फ़िल्मों में से एक है नेलसन मंडेला की जीवनी ‘लॉन्ग वॉक टू फ़्रीडम’ पर आधारित फ़िल्म. ऑस्कर समारोह 27 फ़रवरी को हॉलीवुड के कोडेक थिएटर में आयोजित होगा. |
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