|
'बॉलीवुड की फ़िल्में वास्तविक नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
निर्देशक अनुराग कश्यप एक सफ़ल फ़िल्म लेखक रहे हैं और अब वे फ़िल्म निर्देशन करने लगे हैं. उनकी कहानियों से ही लगता है कि उनकी रुचियाँ दूसरी हैं. वे यह कहने में संकोच नहीं करते कि बॉलीवुड की फ़िल्में वास्तविकता नहीं दिखातीं और वे सच दिखाना चाहते हैं. उनकी नई फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' पर उसके रिलीज़ के केवल 12 घंटे पहले मुंबई हाईकोर्ट ने रोक लगा दी. इसी नाम के एक किताब पर आधारित ये फिल्म 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट की कहानी है. कश्यप की पहली फिल्म 'पाँच' भी चार साल से रिलीज़ होने का इंज़ार कर रही है. एक बेहतरीन फिल्म लेखक के रूप में जाने जानेवाले कश्यप ने 'सत्या' और 'कौन' जैसी हिट फिल्में लिखी हैं, जिनको कई फिल्म पुरस्कार भी मिले हैं. लेकिन बतौर निर्देशक उनकी एक भी फिल्म अब तक रिलीज़ नहीं हो पाई है. हर क़िस्म की किताबें और फिल्मों से भरे कमरे में, सिगरेट फूंकते हुए अनुराग कहते हैं, "ब्लैक फ्राइडे पर रोक से मुझे बहुत बड़ा धक्का लगा था. लेकिन फिर बहुत सारे लोगों ने मेरी हिम्मत बढ़ाई और फिल्म के साथ जुड़ गए." निर्देशक महेश भट्ट कहते हैं कि अनुराग कि फिल्में दूसरी फिल्मों से अलग होती है, सच होती है. वो कहते हैं- "ये शुरु की नाकामयाबियाँ अनुराग में और हिम्मत जगाएँगी, क्योंकि ऐसे जोश, हौसले और स्फूर्ति को रोका ही नहीं जा सकता." ब्लैक फ्राइडे को सेंसर बोर्ड में कोई परेशानी नहीं हुई थी लेकिन फिर बम ब्लास्ट के मामले में पकड़े गए अभियुक्तों ने उस पर केस दायर किया और अब फिल्म तब तक रिलीज़ नहीं हो सकती जब तक उच्च न्यायालय उस पर फैसला नहीं लेती. जुर्म में रुचि कश्यप को जुर्म की दुनिया में काफी रुचि है. वो कहते हैं कि रूसी लेखक दोस्तोवस्की किबातें पढ़ने के बाद ये रुचि शुरू हुई और ये उनकी फिल्मों में भी साफ झलकता है.
बतौर निर्देशक अनकी पहली फिल्म पाँच भी एक अपराध कथा थी जिसमें एक रॉक बैंड बनाने की चाह में पाँच दोस्त कत्ल तक कर बैठते हैं. इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यह कहकर सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था कि इसमें काफी हिंसा है, गाली गलौच है, इसमें कोई सामाजिक संदेश नहीं है और ये अच्छा मनोरंजन नहीं है. लेकिन अनुराग ने तर्क दिया, "इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो असल में नहीं होता और फिल्में केवल मनोरंजन के लिए नहीं होती, वह आपको अलग-अलग तरीके से असर कर सकती है और मुझे ये हक है कि मैं अपनी बात फिल्म के ज़रिए से लोगों को दिखाऊँ." पूरे आठ महीने के बाद पाँच को सेंसर बोर्ड ने पास किया था और वो भी कई दृश्य और संवाद काटने के बाद. भले ही पाँच रिलीज़ ना हुई हो, लेकिन उसे कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सवों में सराहा गया और भारतीय फिल्म जगत के भी कई लोगों ने उसे देखकर प्रशंसा की. फिल्म विश्लेषक राजीव मसंद ने कहा कि यह एक बेहतरीन फिल्म है, "पाँच शायद अपने वक्त के पहले ही आ गई है. इस तरह की फिल्में भारत में नहीं बनती." वास्तविकता कश्यप को रात के अंधेरे से काफी लगाव है और वे फिल्में भी रात में शूट करना पसंद करते हैं. वे कहते हैं, "भारतीय सिनेमा से मैं अपने आपको जोड़कर नहीं देख पाता. हिन्दी फिल्मों में एक ऐसी काल्पनिक दुनिया दिखाई जाती है जहाँ सब कुछ अच्छा है, खूबसूरत है, रंगीन है, लोग हँसते-नाचते दिखाई देते हैं, लेकिन ये सच्चाई नहीं है. हमारे यहाँ रोज़मर्रा की काफी मुश्किलें है लेकिन शायद इन फिल्मकारों को अपनी वातानुकूलित कमरों के बाहर दिखता ही नहीं है. लेकिन मुझे दिखता है और ये मुद्दे मुझे परेशान करती है. इसलिए मैं इन पर फिल्में बनाता हूँ." अनुराग फिल्मी माहौल में बड़े नहीं हुए हैं. बनारस से मुंबई तक उन्होंने एक लंबा सफर तय किया है. उन्हें लोग ख़ब्ती भी कहते हैं. लेकिन वे मानते हैं कि बॉलीवुड बहुत ही पिछड़ा हुआ है. वे कहते हैं, "यहाँ राजा का बेटा है तो वो राजकुमार ही होगा. किसी भी हीरो के बच्चे पर कोई भी पैसा लगाने को तुरंत तैयार हो जाता है लेकिन कोई बाहर से आए तो भले ही वो कितना भी प्रतिभाशाली हो, उसे कोई फिल्म में काम नहीं देता." इटालियन फिल्मकार विट्टोसियो डे सिका की फिल्मों से प्रेरित होकर कश्यप ने फिल्मों की तरफ रुख किया. उन्होंने एक थियेटर अभिनेता के रूप में अपनी कैरियर की शुरुआत की लेकिन फिर कुछ शारीरिक दिक्कतों की वजह से उसे छोड़कर लिखना शुरु किया. जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि अगर वो अपनी कहानियों को अपने हिसाब से पर्दे पर उतरता देखना चाहते हैं तो उन्हें फिल्में खुद ही बनानी पड़ेंगी. और ऐसे हुआ एक निर्देशक का जन्म. लेकिन अनुराग को विश्वास है कि इस साल उनकी दोनों फिल्में रिलीज़ हो जाएंगी. साथ ही वे 'ग़ुलाल' भी बना पाएंगे जो थोड़ी सी शूटिंग के बाद ही रूक गई थी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||