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दंगों पर बनी फ़िल्म ब्लैक फ्राइडे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मणि रत्नम की 'बांबे' और पहलाज निहलानी की 'देव' के बाद मुंबई में 1993 में हुए सांप्रदायिक दंगों पर 'ब्लैक फ्राइडे' नाम की फिल्म आ रही है. लोकार्नो अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में प्रदर्शित यह फिल्म विदेश में काफी पसंद की गई है. एस हुसैन ज़ैदी की किताब ब्लैक फ्राइडे पर आधारित इस फिल्म की पटकथा अनुराग कश्यप ने लिखी है और वही फिल्म के निर्देशक भी हैं. अनुराग कश्यप ने ही 'सत्या' जैसी बहुचर्चित फिल्म की पटकथा भी लिखी है. अनुराग कहते हैं “बॉलीवुड में समसामयिक घटनाओं का यह पहला सजीव चित्रण होगा.” फिल्म सिर्फ़ 70 दिनों में बनकर तैयार हुई है और इसकी अधिकतर शूटिंग मुंबई और दुबई में की गई. सत्यकथा फिल्म की कहानी 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद 1993 में 13 मार्च से मुंबई में सिलसिलेवार बम विस्फोटों और सांप्रदायिक दंगों पर आधारित है. फिल्म में इन घटनाओं की जाँच पुलिस करती है और कुछ ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो प्रभावशाली लोगों को गवारा नहीं होते.
फिल्म के निर्माता अरिंदम मिश्रा कहते हैं “ ब्लैक फ्राइडे सिर्फ एक फिल्म नहीं, हमारी ज़िम्मेदारी भी है.” ऐसी फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की नज़र हमेशा रहती है और शायद इसीलिए निर्माता इसके रीलिज करने की कोई निश्चित तारीख नहीं बता पा रहे हैं. मिश्रा कहते हैं “अभी कोई तारीख तय नहीं है. सेंसर बोर्ड दो-चार शॉट पर कैंची चलाने के बाद इसे पास कर देगी.” दूसरी ओर, फिल्म के निर्देशक अनुराग कश्यप का कहना है कि फिल्म को निश्चित तौर पर दिसंबर माह तक रीलिज कर दिया जाएगा. मुंबई विस्फोटों और दंगों पर कई फिल्में बनीं है. कुछ बहुत पसंद की गईं. कुछ सेंसर के चक्कर में फँसी. कुछ पर विवाद हुआ और कुछ थिएटरों तक नहीं पहुँच सकीं. |
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