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हुसैन की 100 तस्वीरों के 100 करोड़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नंगे पाँव चलनेवाले मशहूर चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं. उन्होंने अपने 100 चित्रों को बेचने का सौदा किया है जिनकी क़ीमत होगी एक अरब रूपए. भारत में तस्वीरों का ये अब तक का सबसे बड़ा सौदा समझा जा रहा है. उनकी तस्वीरों को मुंबई के एक व्यवसायी गुरू स्वरूप श्रीवास्तव ख़रीदेंगे जो हुसैन की नई तस्वीरों की एक श्रृंखला तैयार करेंगे.
इस श्रृंखला का नाम रखा गया है - आवर प्लैनेट कॉल्ड अर्थ. हुसैन का कहना है कि तस्वीरों की बिक्री से मिली रक़म से वे बॉलीवुड की एक भव्य फ़िल्म बनाएँगे. बढ़िया निवेश हुसैन की तस्वीरों के ख़रीदार गुरू स्वरूप श्रीवास्तव आम तौर पर सुर्खियों से अलग रहकर काम करनेवाले मुंबई के एक व्यवसायी हैं और पहले तस्वीरों के संग्रह से उनका कोई लेना-देना नहीं था. उनका कहना है कि हुसैन की तस्वीरें ख़रीदने का फ़ैसला उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन्हें ये एक अच्छा निवेश लगा. वे कहते हैं,"मुझे लगा कि इन तस्वीरों से मुझे सबसे अधिक फ़ायदा हो सकता है इसलिए मैंने हुसैन साहब को इस बात के लिए तैयार किया कि वे अपनी तस्वीरों को भारत में ही रहने दें". श्रीवास्तव ने बताया कि अपनी बात रखने के लिए उन्होंने हुसैन को पिछली मुलाक़ात में चेक भी दे दिया. फिर बनाएँगे फ़िल्म हुसैन
89वर्षीय हुसैन तस्वीरों की बिक्री से हुई कमाई से एक नई फ़िल्म बनाना चाहते हैं. उन्होने कहा,"मैं इस फ़िल्म में सारे नामी कलाकारों को उतार दूँगा..अमिताभ बच्चन, शाहरूख़ ख़ान..सबको". हुसैन इसके पहले भी फ़िल्में बना चुके हैं. उन्होंने सबसे पहले 1997 में राजस्थान के बारे में एक फ़िल्म बनाई थी- थ्रू द आईज़ ऑफ़ ए पेंटर. इस फ़िल्म के लिए उन्हें बर्लिन फ़िल्म महोत्सव में पुरस्कार भी मिला था. ख़ुद को सार्वजनिक तौर पर माधुरी दिक्षित के मुरीद बतानेवाले हुसैन ने 2001 में 'गजगामिनी' फ़िल्म बनाई जिसमें माधुरी के अलावा शाहरूख़ ख़ान भी थे. इस वर्ष हुसैन की एक और फ़िल्म पर्दे पर आई जिसका नाम है - 'मीनाक्षी- ए टेल ऑफ़ थ्री सिटीज़'. इस फ़िल्म में मुख्य अभिनेत्री हैं तब्बू और अभिनेता हैं रघुवीर यादव. |
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