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शुक्रवार, 03 सितंबर, 2004 को 20:08 GMT तक के समाचार
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शिया-सुन्नी पर बनी फ़िल्म विवादों में
पाकिस्तानी फ़िल्म निर्माता निर्देशक सैयद नूर
नूर को फ़िल्म से भाईचारे की उम्मीद है
पाकिस्तान में शिया-सुन्नी समुदायों के बीच जातीय हिंसा वर्षों से जारी है लेकिन इस पर पहली बार एक फ़िल्म बनी है.

ख़ास बात ये है कि यह फ़िल्म बनने के साथ ही विवादों में आ गई.

दो मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसा के मसले पर उर्दू में यह पहली फ़िल्म है जिसके नाम पर ही विवाद छिड़ गया.

पहले इसका नाम '786' रखा गया था जिस पर आपत्ति की गई थी. पाकिस्तान के फ़िल्म सेंसर बोर्ड ने इस विवाद को हल करने के लिए शिया और सुन्नी समुदाय के आठ विद्वानों की एक सलाहकार समिति बना दी थी.

अब सेंसर बोर्ड फ़िल्म के संशोधित रूप को देखेगा कि समिति की सिफ़ारिशों के अनुरूप फ़िल्म में बदलाव किए गए हैं या नहीं.

पारिवारिक फ़िल्में बनाने के लिए मशहूर निर्माता निर्देशक सैयद नूर ने यह फ़िल्म बनाई है.

शुक्रवार को लाहौर में उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सलाहकार समिति के सदस्यों ने फ़िल्म के शीर्षक - 786 और क़ुरआन की कुछ आयतों के अनुवाद पर ऐतराज़ किया था.

इस समिति की सिफ़ारिश के मुताबिक़ अब निर्देशक ने फ़िल्म के उन हिस्सों को ही निकाल दिया है जिनसे दोनों समुदायों के बीच संघर्ष भड़कने की आशंका हो.

बदलाव

अब फ़िल्म को नया नाम दिया गया है - 'हम एक हैं'. इस्लामी परंपरा के मुताबिक़ 786 का मतलब होता है - "शुरू करता हूँ मैं अल्लाह के नाम पर, जो बड़ा मेहरबान और रहम वाला है."

सलाहकार समिति के सदस्यों का कहना था कि फ़िल्म में जिस तरह से संगीत और नृत्य का इस्तेमाल किया गया है उस संदर्भ में 786 का प्रयोग सही नहीं है.

सैयद नूर के समर्थन में पोस्टर
नूर की फ़िल्म का समर्थन हुआ है

कहा गया था कि सेंसर बोर्ड और कुछ सिनेमाघरों को ऐसे गुमनाम ख़त मिले थे जिनमें फ़िल्म पर पाबंदी लगाए जाने की माँग की गई थी.

हालाँकि सैयद नूर का कहना था कि यह उनके प्रतिद्वंद्वियों की हरकत भी हो सकती है. उन्होंने कहा कि न तो उन्हें कोई धमकी मिली है और न ही उन लोगों को जो इस फ़िल्म को देखने जा रहे हैं.

"वे बे सिर-पैर के कुछ ख़त थे और उनमें कोई सही दलील भी नहीं थी."

पाकिस्तान में पिछले क़रीब बीस साल में जातीय हिंसा में चार हज़ार से भी ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

सैयद नूर को उम्मीद है कि समाज में भाईचारा बढ़ाने के इरादे से बनी उनकी इस तरह की यह फ़िल्म ज़रूर कामयाब रहेगी.

उन्होंने बदलाव के बाद फ़िल्म को ईद के मौक़े पर रिलीज़ करने की भी उम्मीद जताई है.

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