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भारतीय फ़िल्मों से पाबंदी हटाने पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान सरकार देश में भारतीय फ़िल्मों पर लगी रोक हटाने पर विचार कर रही है. ग़ौरतलब है कि 39 साल पहले भारत के साथ युद्ध होने के समय पाकिस्तान में भारतीय फ़िल्मों पर पाबंदी लगा दी गई थी हालाँकि चोरी-छुपे भारतीय फ़िल्में वहाँ देखी जाती रही हैं और काफ़ी लोकप्रिय भी हैं. पाकिस्तान के संस्कृति और पर्यटन मंत्री रईस मुनीर अहमद ने बताया है कि भारतीय फ़िल्मों पर से पाबंदी हटाने से सरकार को तो आमदनी होगी है सिनेमा हॉल के मालिकों को भी फ़ायदा होगा. उन्होंने कहा कि इससे एक फ़ायदा और होगा कि भारतीय फ़िल्मों में पाकिस्तान के लिए जो नफ़रत फैलाई जाती है उस पर रोक लग सकेगी. भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध बेहतर बनाने के लिए हाल में बहुत से क़दम उठाए गए हैं और पाकिस्तान में भारतीय फ़िल्में दिखाने की इजाज़त देना भी उसी दिशा में एक क़दम हो सकता है. सिनेमा घरों के मालिकों की समिति के चेयरमैन ज़ोरेज़ लशारी ने लाहौर में कहा कि पाकिस्तान के संस्कृति सचिव जलील अब्बास इस मुद्दे पर बातचीत के लिए अगले सप्ताह दिल्ली जाएंगे. उन्होंने कहा कि भारतीय फ़िल्मों पर से पाबंदी हटाने की घोषणा दोनों देशों के सचिवों की सितंबर में दिल्ली में होने वाली बैठक में हो सकती है. घाटा पाकिस्तान में भारतीय फ़िल्में काफ़ी देखी जाती हैं इसलिए वहाँ का देसी सिनेमा उद्योग और सिनेमाघर के मालिकों को ख़ासा नुक़सान उठाना पड़ता है. भारतीय फ़िल्में टेलीविज़न चैनलों पर देखने मिल जाती हैं और सस्ती कैसेटों के रूप में मिल जाती हैं इसलिए लोग आसानी से उन्हें देख लेते हैं. सिनेमाघरों के मालिकों की कार्यसमिति के चेयरमैन का कहना है कि पिछले कुछ सालों में ही सैकड़ों सिनेमाघर घाटे की वजह से बंद हो गए हैं और अगर सरकार ने भारतीय फ़िल्मों को दिखाने की इजाज़त नहीं दो तो और बहुत से बंद हो जाएंगे. |
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