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वीडियो-टीवी भी सेंसर सर्टिफ़िकेट लें: खेर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सरकार अब वीडियो और केबल चैनलों के कार्यक्रमों के लिए सेंसर बोर्ड के प्रमाण पत्र को आवश्यक बनाने पर विचार कर रही है. केंद्रीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष अनुपम खेर के अनुसार बोर्ड ने इसके सारे विवरण भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भेज दिए हैं. बीबीसी को दिए गए विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि फ़िल्मों के लिए तो सेंसर बोर्ड काम कर रहा है लेकिन जो वीडियो एलबम निकाले जा रहे हैं और जिस तरह उनका केबल नेटवर्क और टीवी चैनलों में जिस तरह प्रसारण हो रहा है, उससे लगता है कि उनके लिए भी सेंसर सर्टिफ़िकेट आवश्यक होना चाहिए. उन्होंने बताया कि सेंसर बोर्ड ने ऐसे सभी वीडियो और टीवी चैनलों के बारे में पूरा विवरण सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भेज दिया है. अनुपम खेर का कहना है कि यदि सरकार उनकी अनुशंसाओं के आधार पर कार्रवाई करती है तो सभी वीडियो एलबम के लिए 'यू' सर्टिफ़िकेट लेना आवश्यक हो जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार क्या कदम उठाएगी ये तो वे नहीं बता सकते लेकिन उनका मानना है कि क़ानून का उल्लंघन करने वालों के लिए कड़े प्रावधान होना चाहिए. फ़िल्में फ़िल्मों में बढ़ती हिंसा और अश्लीलता के सवाल पर अनुपम खेर ने कहा, "यह स्पष्ट कर देना ठीक होगा कि सेंसर बोर्ड का काम फ़िल्म को सर्टिफ़िकेट देना है न कि फ़िल्म बनाने वालों को यह बताना कि वे कैसी फ़िल्में बनाएँ." उन्होंने कहा कि फ़िल्म बनाने वालों को नैतिकता का पाठ पढ़ाना बोर्ड का काम नहीं है. उनका कहना था कि जिस फ़िल्म को वयस्कों के योग्य ही पाया गया उसे देखने का अधिकार सिर्फ़ वयस्कों को है. अनुपम खेर मानते हैं कि एक बार किसी फ़िल्म को सर्टिफ़िकेट दे दिए जाने के बाद यह सुनिश्चित करना भी ज़रुरी है कि उसका पालन हो रहा है. उनका कहना है कि छोटे शहरों में यह सुनिश्चित करना ज़्यादा ज़रुरी है. |
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