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भारतीय कला में आ रही है चमक

लॉट-24 पेंटिंग
भारतीय समकालीन कला का बाज़ार ज़ोर पकड़ रहा है. मुंबई में इस सप्ताह एक भारतीय पेंटिंग एक सार्वजनिक नीलामी में 92 लाख रूपए में बिकी.

मराठी कलाकार वीएस गाएतोंडे की इस बेनामी पेंटिंग को दुबई के एक कला प्रेमी ने फ़ोन पर ख़रीदा. इसके पहले किसी भी भारतीय कलाकृति की भारत में इतनी ऊँची बोली नहीं लगाई गई.

इस नीलामी का आयोजन मुंबई के ओशियाँस कला के नीलामीघर ने किया. इस नीलामी में 99 कलाकृतियाँ 6 करोड़ 2 लाख रूपए में बिकीं. नीलामीघर के अध्यक्ष नेविल तुली ने कहा कि नीलामी की सफलता से भारतीय कला बाज़ार में बढ़ती समझदारी साफ झलकती है.

तुली कहते हैं कि लोग इन कलाकृतियों में निवेश करने को तैयार है क्योंकि 'वो देख रहे हैं कि कला अच्छा, सुरक्षित और टिकाऊ निवेश का ज़रिया है. अगर इस विषय में सही ढंग से समझ हो तो इसके जैसा बढ़िया और कोई निवेश नहीं है. पाँच-सात साल में कला और रचना में इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल निवेश काफी बढ़ेगा.'

जानकारों के मुताबिक भारतीय समकालीन कला का बाज़ार औसतन 30 से 40 फ़ीसदी से हर साल बढ़ रहा है. कुछ कहते हैं कि न्यूयॉर्क में इनकी नीलामी से कमाए गए पैसे पिछले चार सालों में पाँच गुना बढ़ गए हैं.

कला प्रेमी संगीता काठीवाड़ा इसकी वजह बताती हैं, "भारतीय कला में सबसे ज़्यादा दिलचस्पी प्रवासी भारतीय ले रहे हैं क्योंकि जब वो लोग अपने देश से दूर रहते हैं तो उन्हें यहाँ की बातें और सुहावनी लगने लगती हैं और वो लोग इसे काफ़ी संजीदगी से लेते हैं."

"उनकी आमदनी भी बढ़ रही है तो इससे काफ़ी फ़र्क़ पड़ता है और इस तरह से वो अपनी नई पीढ़ियो को भारतीय कला और संस्कृति के बारे में शिक्षा भी दे सकते हैं."

सुर्ख़ियों में

भारतीय कला दो साल पहले दुनिया भर में सुर्ख़ियों में आई जब पेंटर तैयब मेहता की एक पेंटिंग डेढ़ करोड़ रुपए में न्यूयॉर्क के क्रिस्टीस गैलरी में बिकी. ये आज तक की सबसे महँगी भारतीय पेंटिंग है.

तब से इस बज़ार ने कई छलाँगे लगाई है. दो महीने पहले मुंबई की एक कला कंपनी सैफ़्रॉन आर्ट ने इंटरनेट नीलामी के ज़रिए 140 कलाकृतियाँ 13 करोड़ रूपए में बेचीं जो भारतीय कला इतिहास में सबसे बड़ी है.

कंपनी के अध्यक्ष दिनेश वज़ीरानी कहते हैं, "भारतीय लोगों की सोच में काफी बदलाव आया है. पहले वो सोना-चाँदी में ही पैसा लगाते थे, लेकिन आज वो कला के मूल्य को समझने लगे हैं."

कंपनी मार्च में एक और दो तारीख़ को भारत के नौ सबसे बड़े कलाकारों की 45 कलाकृतियों की नीलामी करेगी. इनमें मशहूर कलाकार एमएफ़ हुसैन, जहाँगीर सबावाला, अकबर पदमसी, एसएच रज़ा और एफ़एन सूज़ा भी शामिल है.

एमएफ़ हुसैन
हुसैन की कलाकृतियाँ काफ़ी महंगी होती हैं

इन कलाकारों की कुछ कलाकृतियाँ अगले सप्ताह लंदन में दिखाई जाएगी.

वित्तीय मामलों के जानकार जेम्स मेकलई कहते हैं कि जिस तरह भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है, उसी तरह उसकी कला को भी मान्यता मिल रही है, भारतीय कला का भाव तो बढ़ेगा ही. ज्यों-ज्यों भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर होगी, उसकी कला के दाम भी बढ़ेंगे.

लेकिन कला समीक्षक अनुपा मेहता इस से पूरी तरह सहमत नहीं हैं और कहती हैं कि भारतीय कला को अभी काफी लंबा सफर तय करना है, "आज भी एक भारतीय कलाकृति किसी भी अन्य देश की कलाकृति के मुक़ाबले काफ़ी कम पैसे में बिकती है."

अनुपा मेहता कहती हैं कि विदेशों में ज़्यादातर समकालीन कला की ही प्रदर्शनियाँ की जाती हैं क्योंकि कोई भी कलाकृति जो कानून द्वारा निर्धारित समय अवधि के परे है, उसको भारत से बाहर ले जाने पर पाबंदी है.

उनका मानना है, "हमें एक ऐसे सिस्टम की ज़रूरत है जिसमें ये पाबंदिया ना हों और हम हर तरह की कला के बाज़ार में अपनी कला प्रदर्शित कर सकें."

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