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मराठी फिल्म ऑस्कर के लिए नामाँकित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की ओर से इस साल ऑस्कर पुरस्कारों के लिए मराठी फिल्म 'श्वास' को नामांकित किया गया है. कम बजट की यह फिल्म कैंसर जैसे गंभीर मुद्दे पर आधारित है. 'श्वास' ऑस्कर के लिए भेजी जाने वाली पहली मराठी फिल्म भी है. 'श्वास' को इस साल सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है. फिल्म की कहानी गाँव के एक बच्चे और उसके दादा के इर्द-गिर्द घूमती है. बच्चे को कैंसर हो जाता है. जब उसके दादा उसे इलाज के लिए शहर ले जाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि बच्चे का तुरंत ऑपरेशन जरुरी है और ऑपरेशन में बच्चे के आंखों की रोशनी चली जाएगी. फिल्म में कैंसर पीड़ित बच्चे का किरदार अश्विन चिताले ने निभाया है जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया. बच्चे के दादा का किरदार अरुण नलवडे ने निभाया है. नलवडे फिल्म के प्रोडयूसर भी हैं. पैसे की कमी फिल्म के निर्माण की कहानी भी कुछ कम दिलचस्प नहीं. फिल्म बनाने के लिए न केवल एक सहकारी संस्था बनायी गई बल्कि कई लोगों से पैसे भी उधार लिए गए. फिल्म के निर्देशक संदीप सावंत ने बीबीसी से कहा “ हाँ ये सही है. हमारे पास पैसे नहीं थे. हम पाँच छह दोस्तों ने पैसे जमा किए और फिल्म शुरु की.” 36 वर्षीय सावंत की यह पहली फिल्म है. कैंसर जैसे गंभीर मुद्दे पर फिल्म बनाने के बारे में सावंत ने कहा कि लोग अभी भी ऐसी फिल्में देखना चाहते हैं और वो आगे भी ऐसी फिल्में बनाने की कोशिश करेंगे. ऑस्कर के लिए 'श्वास' के भेजे जाने से प्रसन्न सावंत ने कहा कि वो इसके प्रचार का हरसंभव प्रयास करेंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या 'श्वास' मराठी फिल्म उद्योग में सांस डाल सकेगी तो उन्होंने कहा “ अगर आप मुद्दों पर आधारित साफ और सादगीपूर्ण फिल्में बनायेंगे तो सभी को पसंद होगा.” 'श्वास' पिछले चार पाँच हफ्तों से मुंबई के कुछेक सिनेमाघरों में लगी हुई है और अच्छा बिजनेस कर रही है. ऑस्कर नामांकन के लिए चुने जाने की खबर के बाद भीड़ बढ़ने की ही संभावना है. उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भारत की ओर से किसी भी फिल्म को ऑस्कर के लिए नहीं भेजा गया था. |
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