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फ़िल्मफ़ेयर ने प्रायोजक हटाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदी सिनेमा की दुनिया में सबसे पुराने फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों के साथ इस साल कुछ विवाद खड़ा हो गया है और विवाद है प्रायोजक का. फ़िल्मफ़ेयर ने अपने प्रायोजक धारीवाल उद्योग लिमिटेड से नाता तोड़ेने का फ़ैसला किया है. धारीवाल समूह ही मानिकचंद गुटका बनाता है. इस समूह के चेयरमैन रसिकलाल मानिकचंद धारीवाल पर माफ़िया से संबंध होने के आरोप लगे हैं. मानिकचंद गुटका फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कारों को 1999 से प्रायोजित करता आ रहा है तब से इन पुरस्कारों का आधिकारिक नाम 'मानिकचंद फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार' रहा है. फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार बैनेट कोलमैन एंड कंपनी की तरफ़ से दिए जाते हैं और यह कंपनी अब इन पुरस्कारों की प्रायोजक कंपनी के साथ उठे इस विवाद पर अपनी छवि को लेकर ख़ासी चिंतित है. बैनेट कोलमैन एंड कंपनी ने इन पुरस्कारों को प्रायोजित करने का मानिकचंद गुटका का ठेका आगे बढ़ाने से मना करने संबंधित वक्तव्य अपने प्रमुख अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में बुधवार को प्रकाशित किया. वक्तव्य में कहा गया है कि रसिकलाल मानिकचंद धारीवाल के माफ़िया के साथ कथित संबंधों से टाइम्स समूह फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कारों की साफ़सुथरी छवि को नुक़सान पहुँचता है. रसिकलाल मानिकचंद धारीवाल माफ़िया के साथ संबंधों के आरोपों का सामना कर रहे हैं और महाराष्ट्र पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत ग़ैरज़मानती वारंट जारी किए हैं. आरोपों में कहा गया है कि धारीवाल ने पाकिस्तान के कराची शहर में गुटका बनाने वाली एक फ़ैक्टरी स्थापित करने में कथित माफ़िया सरगना दाऊद इब्राहीम की मदद की. धारीवाल ने इन आरापों का खंडन किया है. महाराष्ट्र पुलिस के अनुरोध पर अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल से भी धारीवाल के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है. |
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