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भंसाली की 'ब्लैक' एक भिन्न फ़िल्म | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्लैक शब्द है अंग्रेज़ी का जिसका अर्थ होता है - काला यानी एक ऐसा रंग जिससे वो लोग भी भली-भाँति परिचित होते हैं जो देख नहीं सकते. और यही है 'हम दिल दे चुके सनम' और ' देवदास' जैसी फ़िल्मों के निर्देशक संजय लीला भंसाली की नई फ़िल्म का जो शुक्रवार, चार फ़रवरी को रिलीज़ हो रही है. फ़िल्म 'ब्लैक' एक ऐसी लडड़की की कहानी है जो ना देख सकती है, ना बोल सकती है और ना ही सुन सकती है. फ़िल्म में इस लड़की का चरित्र निभाया है रानी मुखर्जी ने. रानी मुखर्जी कहती हैं, "मेरे अब तक के फ़िल्मी जीवन की यह सबसे मुश्किल भूमिका रही है, ये बहुत ही ख़ास फ़िल्म है मेरे करियर के लिए क्योंकि मैंने पहले कभी भी किसी फ़िल्म या भूमिका के लिए इतनी तैयारी नहीं की." रानी मुखर्जी कहती हैं कि अब तक जितनी भी फ़िल्मों में उन्होंने काम किया है उसमें भूमिकाओं के लिए उन्होंने अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से मदद ली है. जैसे कि अगर वकील की भूमिका है तो उसकी भूमिका के लिए उन परिवारों से मदद ली जिनमें वकील हैं और वकीलों के व्यवहार को नज़दीक से देखा.
लेकिन ब्लैक फ़िल्म के लिए उनके पास ऐसा कोई तरीक़ा नहीं था क्योंकि वो ऐसी किसी लड़की या आदमी को नहीं जानती जो, ना देख सकते हों, ना सुन सकते हों और न ही बोल सकते हों. रानी इसीलिए कहती हैं, "संजय जी ने जब मेरे सामने इस भूमिका की पेशकश थी तो मैं घबरा गई थी." चुनौतियाँ शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों के सामने क्या चुनौतियाँ होती हैं, रानी मुखर्जी ने यह समझने के लिए उनके साथ वक़्त बिताया और इसमें उनकी मदद की उनके सहअभिनेता अमिताभ बच्चन ने. फ़िल्म ब्लैक में अमिताभ बच्चन रानी मुखर्जी के अध्यापक का क़िरदार निभा रहे हैं.
अमिताभ बच्चन बताते हैं, "यह एक ऐसी कहानी है कि अध्यापक और विद्यार्थी किस तरह से जीवन व्यतीत करते हैं, ताकि उस बच्ची की आशाओं के लिए कुछ कर सकें, उसके जीवन में कुछ रौशनी ला सकें और अंत में अध्यापक किस तरह उसे एक सपना देता है, पूरा करने के लिए और किस तरह ये सपना पूरा होता है." ब्लैक संजय लीला भंसाली की चौथी फ़िल्म है और उनकी अब तक की फ़िल्मों से बिल्कुल अलग भी. जहाँ हम दिल दे चुके सनम और देवदास में आलीशान प्रकाश व्यवस्था और महंगे लिबास थे तो ब्लैक को इसके नाम के अनुरूप काफ़ी अंधेरे में फ़िल्माया गया है. फ़िल्म ब्लैक के लिबास भी ज़्यादातर सादे रंगों में हैं जैसे-काले, भूरे वग़ैरा. संगीत संजय की फ़िल्मों का एक अटूट हिस्सा रहा है लेकिन ब्लैक फ़िल्म में गाने ही नहीं हैं. संगीत सिर्फ़ पृष्ठभूमि में चलता है जिसे मांटी शर्मा ने दिया है. ब्लैक को रवि चंदन ने कैमरे की आँख से देखा है और फ़िल्म के विज्ञापनों को देखकर लोगों में काफ़ी उत्सुकता है. कुछ फ़िल्मी विश्लेषक भी ब्लैक को लेकर उत्साहित हैं. एक फ़िल्म समीक्षक इंदू मिरानी कहती हैं, "यह भावुक और अलग क़िस्म की फ़िल्म होगी. मुझे लगता है कि ये सबको पसंद आएगी. यह पढ़े-लिखे दर्शकों के लिए भी है."
दर्शकों को याद होगा कि ब्लैक की शूटिंग के दौरान उसके सैट पर आग लग गई थी और उसमें बड़ा नुक़सान हुआ था. लेकिन संजय के साथ-साथ फ़िल्म के बाक़ी कर्मचारियों ने भी हार नहीं मानी और जल्दी ही शूटिंग फिर से शुरू की गई. संजय लीला भंसाली के इसी रुख़ ने उनके अभिनेताओं को काफ़ी प्रभावित किया है. अमिताभ बच्चन कहते हैं, "मैं तो उन्हें जीनियस मानता हूँ और उनकी पहली ही फ़िल्म से उनका प्रशंसक रहा हूँ. यह मेरा सौभाग्य है कि उन्होंने मुझे भी चुना." अमिताभ बच्चन को भी इस फ़िल्म के लिए काफ़ी तैयारी करनी पड़ी. उन्होंने संकेत भाषा सीखी. वह कहते हैं, "चूँकि हमें शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों के साथ काम करना था, हमें उनकी भाषा सीखनी पड़ी. और उनकी भाषा बड़ी विचित्र होती है क्योंकि वो ना देख सकते हैं, ना सुन सकते हैं और ना बोल सकते हैं." "सिर्फ़ छूकर सब चीज़ों का पता लगाना होता है, सारे अक्षर हथेली के अंदर बनाने पड़ते हैं. इसके लिए हमने छह-सात महीने प्रशिक्षण लिया. किताबें पढ़ीं, इस तरह पूरी तैयारी के बाद ही हम सैट पर गए." |
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