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गुरुवार, 02 अक्तूबर, 2003 को 08:32 GMT तक के समाचार
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कोई भारतीय फ़िल्म ऑस्कर लायक नहीं

दुनिया की सबसे बड़ी फ़िल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड की ओर से अगले साल के ऑस्कर पुरस्कारों के लिए कोई फ़िल्म नहीं भेजी जाएगी.

पिछले दो वर्षों में लगान और देवदास जैसी फ़िल्में भेज चुके भारतीय फ़िल्म फ़ेडरेशन को इस बार कोई भी फ़िल्म इस लायक नहीं लगी कि उसे ऑस्कर के लिए भेजा जाए.

ऑस्कर के लिए शुरुआती दौर में छह फ़िल्मों को चुना गया था, लेकिन फ़िल्म फ़ेडरेशन ने इस सभी फ़िल्मों को नामंज़ूर कर दिया.

ये छह फ़िल्में थी- कोई मिल गया, गंगाजल, जजंतरम ममंतरम, झंकार बीट्स, अंदाज़ और जॉगर्स पार्क.

फ़िल्म फ़ेडरेशन का कहना है कि ये फ़िल्में पूरी तरह पश्चिमी रंग में रंगी हुई हैं और इनसे भारतीय संस्कृति की कोई झलक नहीं मिलती.

इसके अलावा बंगाली और दक्षिण भारतीय फ़िल्मों को भी ऑस्कर में भेजने के लायक नहीं समझा गया.

नकल

संस्था के अध्यक्ष फ़िल्म निर्देशक हरमेश मल्होत्रा हाल में ही रिलीज हुई फ़िल्म जॉगर्स पार्क से कुछ ज़्यादा ही नाराज़ थे, जो आधी अंग्रेज़ी में है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि दूसरी फ़िल्में अंग्रेज़ी फ़िल्मों की नकल लगती हैं.

 ऑस्कर के लिए भेजी जाने वाली फ़िल्में भारतीय दिखनी चाहिए और इसमें उसकी झलक भी मिलनी चाहिए

हरमेश मल्होत्रा

हरमेश मल्होत्रा ने कहा, "ऑस्कर के लिए भेजी जाने वाली फ़िल्में भारतीय दिखनी चाहिए और इसमें उसकी झलक भी मिलनी चाहिए."

उन्होंने लगान का जिक्र किया, जिसे 2002 में ऑस्कर के लिए भेजा गया था और लगान विदेशी फ़िल्मों की श्रेणी में आख़िरी दौर तक पहुँच गई थी.

हरमेश मल्होत्रा ने इस पर खेद जताया कि अब ज़्यादातर हिंदी फ़िल्में भारतीय समाज के उस वर्ग को दिखाती हैं, जो पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित है.

भारत में हर साल क़रीब आठ सौ हिंदी फ़िल्में बनती हैं.

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