मम्मी...! मैं कहां से आया?

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- Author, खुशबू दुआ
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
क्या जवाब देंगे अपने बच्चे को जब वो अपने बालसुलभ कौतुहल से पूछ बैठे कि-मम्मी मैं कहां से आया?
लाज़िमी है कि आपका जवाब- भगवान के घर से या फिर हॉस्पिटल से आए जैसा ही कुछ हो. लेकिन क्या यह जायज़ होगा कि आप बच्चे को सटीक जवाब देने की कोशिश करने के बजाय उन्हें उनके ही सवाल में घूमाना शुरू कर दें?
शायद नहीं..! जिस भारतीय समाज में सेक्स से जुडी वर्जनाएं गहराई से बैठी हुई हैं, वहां ऐसे सवालों के जवाब नए सवाल ही हो सकते हैं.

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लेकिन जाने-माने मनोचिकित्सक डॉक्टर दयाल मीरचंदानी की राय है, "बच्चों को समझाते वक़्त माता-पिता को ख़ास ध्यान देना चाहिए कि वो बच्चों को उनकी ही भाषा में समझाएं."
डॉ. मीरचंदानी के मुताबिक़, हॉस्पिटल से लाने या भगवान के घर से भेजे जाने जैसे जवाब बच्चों पर गलत असर भी डाल सकते हैं.
मसलन कई बार माता-पिता बच्चों से कहते हैं, "वह उन्हें हॉस्पिटल से लाए." ऐसे में बच्चे को यह गलतफहमी हो सकती है कि उसे गोद लिया गया है और कभी भी उसे हॉस्पिटल में भी छोड़ा जा सकता है.
भगवान के घर से भेजे जाने वाले जवाब कई बार बच्चों को अपने हमउम्र बच्चों के बीच मजाक का विषय बना सकता है. सही तरीके से दी गई सही जानकारी बच्चों को ऐसी स्थितियों से बचा सकता है.

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उनसे छुपाने की बजाय उसे शिक्षित करें, क्योंकि बच्चों के लिए जो मना है वही ज़्यादा आकर्षक होता है.
मीरचंदानी बताते हैं कि, "फॅमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया कई कोर्स चलाता है. जिसमें माता-पिता जान सकते हैं कि अपने बच्चों को कैसे सही सेक्स शिक्षा दी जाए.
अगर सही उम्र में सही सेक्स एजुकेशन नहीं मिले, तो इसका नुकसान छोटी उम्र में गर्भवती होना या सेक्स संबंधी बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है.
विदेश की तुलना में भारत में सेक्स ऑफेंडर की पहचान करना बहुत मुश्क्लि है.
डॉक्टर्स मानते हैं कि गवर्नमेंट को एजुकेशन सिस्टम में बदलाव लाना चाहिए. बच्चों को सही सेक्स एजुकेशन देनी चाहिए. इससे एचआईवी और हैपेटाइटिस सी जैसी खतरनाक बीमारियों से भी कई लोग बचे रहेंगे.

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अब भारत में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है. ऐसी ही शुरुआत यशराज फिल्म्स के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर आशीष पाटिल (बिज़नस एंड क्रिएटिव हेड -y फिल्म्स) ने की है.
एक वेब सीरीज 'सेक्स चैट विथ पप्पू एंड पापा' के ज़रिए आशीष ने यौन समस्याओं और उनसे जुड़े सवालों के जवाब बड़े ही रोचक तरीके से दिए हैं.
उनके मुताबिक़, "अगर माता-पिता बच्चों से प्रत्यक्ष बात करें तो इसका सीधा असर बच्चों के यौन व्यवहार पर पड़ता है."
आशीष बताते हैं,"अगर मनोरंजन के ज़रिए बच्चों को सेक्स एजुकेशन दिया जाए, तो बच्चों के दिल और दिमाग तक ज़्यादा अच्छे तरीके से बातें पहुंच जाती हैं.
इस वेब सीरीज़ के रिसर्च में प्रसूतिशास्री, हार्मोनल एक्सपर्ट, मेडिकल एक्सपर्ट जैसे लोगों का भी योगदान रहा.

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आंकड़े बताते हैं कि भारत में सेक्स एजुकेशन ना के बराबर है और करीब 70- 80 प्रतिशत स्कूलों में यह है ही नहीं.
जर्मनी में सेक्स एजुकेशन 5 साल की उम्र से दी जाती है और शायद यही वजह है कि वहां पर यौन-संबंधी अपराध लगभग ना के बराबर होते हैं.
इसी तरह कनाडा में 4 साल की उम्र में बच्चों को सेक्स एजुकेशन दी जाती है. बताया जाता है कि पहले प्रेम ज़रूरी है फिर यौन-संबंध.
आशीष पाटिल की यह वेबसीरीज़ उन्होंने 15 अलग-अलग भाषाओं में भी उपलब्ध कराई हैं, ताकि ज़्यादा- से-ज्यादा लोग इसे देखें और समझें.
हालांकि अरबी भाषा में यह सबटाइटल नहीं कर पाए, क्योंकि वहां के देशों को यह विषय आपत्तिजनक लगा.
एक जानी-मानी नेटवर्क कनेक्शन कंपनी भी उनका प्रचार करने से हिचकिचा रही है, लेकिन इस वेबसीरीज़ को लाखों लोगों ने यूट्यूब पर देखा और सराहा.

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हमने आगे बात की उन लोगों से जो एेसे ही सवालों का सामना कर चुके हैं.
यानी कि उन बच्चों के माता- पिता से, जिन्हें बच्चों के ऐसे सवाल माता-पिता को दुविधा में डाल देते हैं.
9 साल के बच्चे की मां होने के साथ बच्चों को स्कूल में पढ़ानेवाली चिन्मयी दावे का भी यही अनुभव रहा, जब उनके बच्चे ने उनसे ऐसा सवाल किया.
चिन्मयी के मुताबिक़,"सेक्स एजुकेशन भारत में सही तरीके से नहीं सिखाया जाता."
वह आगे बताती हैं,"सेक्स एजुकेशन के नाम पर यहां सिर्फ नौवीं कक्षा में एक रिप्रोडक्शन का चैप्टर होता है. जिसे टीचर अक्सर होमवर्क के तौर पर बच्चों को खुद पढ़ने के लिए कह देते हैं.
उनके मुताबिक़,"ऐसा नहीं होना चाहिए. ज़रूरी है कि टीचर एक सुरक्षित दूरी बनाकर बच्चों को बेझिझक सेक्स के बारे में ऐसे समझाए जैसे आमतौर पर वह दूसरे विषय समझाती हैं.
चिन्मयी कहती हैं,"इस बारे में ज्यादा जिम्मेदारी पेरेंट्स की बनती है. टीचर और माता-पिता दोनों का सहयोग सेक्स एजुकेशन देने के लिए ज़रूरी है. सेक्स एजुकेशन में सुधार के बाद ही बहुत-सी बीमारियों और अपराधों से यह देश मुक्त हो सकता है."
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