संपत्ति का अंतर सबसे बड़ा आतंक: प्रकाश झा

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    • Author, सुप्रिया सोगले
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए

'मृत्युदंड', 'गंगाजल', 'अपहरण', 'राजनीती' और 'चक्रव्यूह' जैसी संजीदा फ़िल्में बनाने वाले फिल्मकार प्रकाश झा भारत की राजनीतिक गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखते हैं.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा कि 'नागरिकों की संपत्ति में फर्क सबसे बड़ा आतंक है.'

वो कहते हैं, "देश में एक प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनके पास देश का 75 से 90 प्रतिशत धन है और बाकी 99 प्रतिशत लोगों के पास केवल 10 प्रतिशत धन है."

वो कहते हैं, "ये फ़र्क़ अपने आप में बड़ा आतंक है. इस संतुलन को सही करने में जो वक़्त और बुनियादी ढांचा चाहिए और उसे लाने में संघर्ष होना तय है."

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पिछले दिनों जेएनयू परिसर में संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु की बरसी पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था.

कथित तौर पर इस कार्यक्रम में भारत विरोधी नारे लगे. भाजपा सांसद महेश गिरी की शिकायत पर पुलिस ने कई छात्रों पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया.

इस प्रकरण पर झा कहते हैं, "अगर कोई देश के टुकड़े होने के नारे लगाता है तो वो देश का भला नहीं चाहता. पर पहले तो इसी पर विवाद है कि ऐसा कुछ जेएनयू में हुआ है, क्योंकि गिरफ़्तार किए गए छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार कह रहे हैं कि उन्होंने ऐसे नारे नहीं लगाए."

वो कहते हैं, "राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी कहा है की वीडियो मौलिक (ओरिजिनल) नहीं है."

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प्रकाश झा कहते हैं, "हमारे देश में आज़ादी है कि हम किसी भी विषय पर चर्चा कर सकते हैं. अगर अफज़ल गुरु की फ़ांसी पर कुछ लोग चर्चा करना चाहते हैं तो इसमें क्या गलत है."

झा के अनुसार, "देश और क़ानून ने जो अपना काम करना था किया. लेकिन लोग अपने विचार क्यों नहीं रख सकते? भारत का इतिहास और संस्कृति हर किसी को अपने विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है."

दूसरी तरफ, सेंसर बोर्ड से अपनी आने वाली फिल्म 'जय गंगाजल' को पास कराने में भी उन्हें कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

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इस पर झा कहते हैं, "गंगाजल, अपहरण और चक्रव्यूह जैसी फिल्मों के दौरान 'साला' शब्द को आसानी से मंज़ूरी मिल गई थी. लेकिन इस बार उसे मंज़ूरी नहीं मिली."

झा फ़िल्म को लेकर आई मुश्किलों पर कहते हैं, "हमने फिर ट्राइब्यूनल में अर्ज़ी डाली और हमें फ़िल्म में कुछ ख़ास बदलाव करने की ज़रूरत नहीं पड़ी."

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